{"_id":"518289689b04021eef5192d2d2e7b2fe","slug":"documentary-film-maker-group-4c","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की जननी है शहर की '4सी'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की जननी है शहर की '4सी'
शंकर सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Apr 2014 03:16 PM IST
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भारत भर में कई ऐसे डॉक्यूमेंट्री मेकर हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर कर डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाते हैं। इसमें एक नाम इफ्फत फातिमा का भी है। उन्होंने श्रीलंका में इमरजेंसी के दौरान भी फिल्म बनाई थी। इसे हाल ही में चंडीगढ़ की आर्ट गैलरी में दिखाया गया।
हालांकि, कुछ सालों तक चंडीगढ़ में ऐसा कोई जरिया नहीं था, जिससे इन फिल्मों को यहां के लोगों तक पहुंचाया जा सके। दो साल शहर के आत्म प्रकाश मिश्रा, हरीश और सावन ने मिलकर एक ग्रुप बनाया। इसका नाम रखा गया चंडीगढ़ क्रिएटिव सिनेमा सर्किल (4सी)। इस ग्रुप की कामयाबी पर हाल ही में चंडीगढ़ संगीत नाटक कला अकादमी ने भी इस ग्रुप का सहयोग किया।
ऐसे शुरू हुआ सफर
ग्रुप के मेंबर्स की उनके सफर के बारे में मंगलवार को अमर उजाला से खास बातचीत हुई। आत्म प्रकाश मिश्रा बद्दी में एक कंपनी में इंजीनियर केतौर पर नियुक्त है। उनके दोस्त हरीश पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में वकील है। दोनों ने 2012 में ग्रुप बनाया, जिसने शहर के इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर को मौका दिया।
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इसे अमलीजामा पहनाने के लिए सावन को जोड़ा। मिश्रा ने बताया हम चाहते थे कि ग्रुप की शुरुआत एक डॉक्युमेंट्री फिल्म फेस्टिवल हो। लेकिन, फेस्टिवल के लिए इतने रुपये नहीं थे। इसलिए फंडिंग के लिए फेस्टिवल से पहले एक फिल्म मेकिंग वर्कशॉप लगवाई गई। इसके लिए मुंबई के सुदर्शन जुयाल (सिनेमेटोग्राफर) ने मदद की।
इसके बाद पैसे इकट्ठे होने पर एक शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑर्गेनाइज करवाया गया। इस दौरान उनकी मुलाकात ग्रुप के चौथे सदस्य विजया सिंह से हुई, जो रिजनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश में प्रोफेसर हैं। आत्म ने बताया कि अभी तक हमारे ग्रुप को 19 महीने हुए है। हर महीने देशभर के मशहूर डॉक्युमेंट्री मेकर को उनकी फिल्म के साथ इनवाइट किया जाता है।
सामाजिक मुद्दे अहम
हरीश ने बताया डॉक्युमेंट्री से अच्छी कोई और चीज नहीं जो आपको सामाजिक मुद्दों से जोड़ती हो। हाल ही में इफ्फत ने जब कश्मीर से संबंधित फिल्म दिखाई तो लोगों को कश्मीर से जुड़ा एक नया नजरिया देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में अभी डॉक्युमेंट्री को लेकर इतनी जागरूकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साल उनके ग्रुप ने तीन दिन का फेस्टिवल आयोजित किया, जिसमें राहुल रॉय,आशीष और अनंत सेन ने शिरकत की।
प्रोफेसर से फिल्म मेकिंग तक का सफर
ग्रुप की सदस्य विजया ने बताया वह चंडीगढ़ के रिजनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश में प्रोफेसर हैं। फिल्म मेकिंग में पहले थोड़ा शौक था, लेकिन फिर सोचा कि इसको सीखा जाए। उनके ग्रुप में किसी का कोई पोस्ट नहीं है। सबको अपना-अपना काम करना होता है।
हर किसी की जिम्मेदारी होती है देश के फिल्म मेकरों को चंडीगढ़ लाया जाए। विजया ने बताया कि उनके पास ज्यादा बजट नहीं होता इस लिए जिस फिल्म मेकर को बुलाया जाता है, उसे कभी-कभी अपने घर में भी रखते हैं।
पहले शहर में नहीं थी डॉक्यूमेंट्री के लिए जगह
ग्रुप के युवा मेंबर सावन ने बताया कि कुछ साल पहले तक डॉक्युमेंट्री के लिए शहर में खास जगह नहीं थी। अगर किसी को कोई डॉक्युमेंट्री देखनी भी होती थी तो उसे ढूंढने में बहुत दिक्कत आती थी, लेकिन इस ग्रुप के बनने के बाद यह दिक्कत दूर हो गई। अब चंडीगढ़ संगीत नाटक कला अकादमी ने हमें इस काम के लिए चंडीगढ़ म्यूजियम आर्ट गैलरी-10 का ऑडिटोरियम दिया है। जहां लोगों को बड़ी तादाद में अपने काम के साथ जोड़ सकते हैं।
ग्रुप की एक्टिविटी पर एक नजर
-महीने के हर दूसरे शनिवार होता है डॉक्युमेंट्री शोकेस, जिसमें देश के अन्य भागों से आए फिल्म मेकर अपनी डॉक्युमेंट्री पेश करते हैं।
-साल के अगस्त महीने में यह ग्रुप पांच दिवसीय शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल आयोजित करता है। इसमें दो दिन फिल्म मेकिंग की वर्कशॉप होती है और तीन दिन शॉर्ट फिल्मों को दिखाया जाता है।
-साल के दिसंबर महीने में शॉर्ट शॉट नाम से एक दिवसीय फेस्टिवल आयोजित करते हैं, जिसमें लोकल या नेशनल फिल्म मेकर अपनी फिल्म दिखा सकते हैं।
-अगर आप शहर से जुड़े किसी मुद्दे या किसी भी तरह का एक्सपेरीमेंटल सिनेमा कर रहे हैं तो ग्रुप के इस 9805055434 या 9463939477 नंबरों पर संपर्क करके अपनी फिल्म निशुल्क शहरवासियों को दिखा सकते है।
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हालांकि, कुछ सालों तक चंडीगढ़ में ऐसा कोई जरिया नहीं था, जिससे इन फिल्मों को यहां के लोगों तक पहुंचाया जा सके। दो साल शहर के आत्म प्रकाश मिश्रा, हरीश और सावन ने मिलकर एक ग्रुप बनाया। इसका नाम रखा गया चंडीगढ़ क्रिएटिव सिनेमा सर्किल (4सी)। इस ग्रुप की कामयाबी पर हाल ही में चंडीगढ़ संगीत नाटक कला अकादमी ने भी इस ग्रुप का सहयोग किया।
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ऐसे शुरू हुआ सफर
ग्रुप के मेंबर्स की उनके सफर के बारे में मंगलवार को अमर उजाला से खास बातचीत हुई। आत्म प्रकाश मिश्रा बद्दी में एक कंपनी में इंजीनियर केतौर पर नियुक्त है। उनके दोस्त हरीश पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में वकील है। दोनों ने 2012 में ग्रुप बनाया, जिसने शहर के इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर को मौका दिया।
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इसे अमलीजामा पहनाने के लिए सावन को जोड़ा। मिश्रा ने बताया हम चाहते थे कि ग्रुप की शुरुआत एक डॉक्युमेंट्री फिल्म फेस्टिवल हो। लेकिन, फेस्टिवल के लिए इतने रुपये नहीं थे। इसलिए फंडिंग के लिए फेस्टिवल से पहले एक फिल्म मेकिंग वर्कशॉप लगवाई गई। इसके लिए मुंबई के सुदर्शन जुयाल (सिनेमेटोग्राफर) ने मदद की।
इसके बाद पैसे इकट्ठे होने पर एक शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑर्गेनाइज करवाया गया। इस दौरान उनकी मुलाकात ग्रुप के चौथे सदस्य विजया सिंह से हुई, जो रिजनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश में प्रोफेसर हैं। आत्म ने बताया कि अभी तक हमारे ग्रुप को 19 महीने हुए है। हर महीने देशभर के मशहूर डॉक्युमेंट्री मेकर को उनकी फिल्म के साथ इनवाइट किया जाता है।
सामाजिक मुद्दे अहम
हरीश ने बताया डॉक्युमेंट्री से अच्छी कोई और चीज नहीं जो आपको सामाजिक मुद्दों से जोड़ती हो। हाल ही में इफ्फत ने जब कश्मीर से संबंधित फिल्म दिखाई तो लोगों को कश्मीर से जुड़ा एक नया नजरिया देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में अभी डॉक्युमेंट्री को लेकर इतनी जागरूकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साल उनके ग्रुप ने तीन दिन का फेस्टिवल आयोजित किया, जिसमें राहुल रॉय,आशीष और अनंत सेन ने शिरकत की।
प्रोफेसर से फिल्म मेकिंग तक का सफर
ग्रुप की सदस्य विजया ने बताया वह चंडीगढ़ के रिजनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश में प्रोफेसर हैं। फिल्म मेकिंग में पहले थोड़ा शौक था, लेकिन फिर सोचा कि इसको सीखा जाए। उनके ग्रुप में किसी का कोई पोस्ट नहीं है। सबको अपना-अपना काम करना होता है।
हर किसी की जिम्मेदारी होती है देश के फिल्म मेकरों को चंडीगढ़ लाया जाए। विजया ने बताया कि उनके पास ज्यादा बजट नहीं होता इस लिए जिस फिल्म मेकर को बुलाया जाता है, उसे कभी-कभी अपने घर में भी रखते हैं।
पहले शहर में नहीं थी डॉक्यूमेंट्री के लिए जगह
ग्रुप के युवा मेंबर सावन ने बताया कि कुछ साल पहले तक डॉक्युमेंट्री के लिए शहर में खास जगह नहीं थी। अगर किसी को कोई डॉक्युमेंट्री देखनी भी होती थी तो उसे ढूंढने में बहुत दिक्कत आती थी, लेकिन इस ग्रुप के बनने के बाद यह दिक्कत दूर हो गई। अब चंडीगढ़ संगीत नाटक कला अकादमी ने हमें इस काम के लिए चंडीगढ़ म्यूजियम आर्ट गैलरी-10 का ऑडिटोरियम दिया है। जहां लोगों को बड़ी तादाद में अपने काम के साथ जोड़ सकते हैं।
ग्रुप की एक्टिविटी पर एक नजर
-महीने के हर दूसरे शनिवार होता है डॉक्युमेंट्री शोकेस, जिसमें देश के अन्य भागों से आए फिल्म मेकर अपनी डॉक्युमेंट्री पेश करते हैं।
-साल के अगस्त महीने में यह ग्रुप पांच दिवसीय शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल आयोजित करता है। इसमें दो दिन फिल्म मेकिंग की वर्कशॉप होती है और तीन दिन शॉर्ट फिल्मों को दिखाया जाता है।
-साल के दिसंबर महीने में शॉर्ट शॉट नाम से एक दिवसीय फेस्टिवल आयोजित करते हैं, जिसमें लोकल या नेशनल फिल्म मेकर अपनी फिल्म दिखा सकते हैं।
-अगर आप शहर से जुड़े किसी मुद्दे या किसी भी तरह का एक्सपेरीमेंटल सिनेमा कर रहे हैं तो ग्रुप के इस 9805055434 या 9463939477 नंबरों पर संपर्क करके अपनी फिल्म निशुल्क शहरवासियों को दिखा सकते है।