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रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने से खुश नहीं हरियाणा के डॉक्टर, बताई बड़ी वजह
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 29 May 2016 10:13 AM IST
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स्वास्थ्य केंद्रों से रिलीव हो चुके कई एमबीबीएस डॉक्टरों को दोबारा वहीं सेवाएं देने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
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देश भर में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फार्मूला कुछ लोगों के गले नहीं उतर रहा है। प्रधानमंत्री ने चिकित्सकों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 58 से 65 साल कर दी है, लेकिन इसे चिकित्सकों की कमी का स्थायी समाधान नहीं बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री के फैसले से जहां चिकित्सकों में खुशी का माहौल है, वहीं हरियाणा सिविल मेडिकल सविर्सेज एसोसिएशन के पदाधिकारी इससे सहमत नहीं हैं।
हरियाणा सिविल मेडिकल सविर्सेज एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जसवीर सिंह परमार का कहना है कि चिकित्सकों की कमी का यह स्थायी समाधान नहीं है। इससे चिकित्सक कुछ समय के लिए तो टिके रहेंगे, लेकिन जूनियर को मौका नहीं मिलेगा। रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से नए स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आएंगे। चिकित्सकों की प्रमोशन प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए स्थायी समाधान यह है कि नई पोस्ट बढ़ाई जाए।
एसोसिएशन के प्रेस सचिव डॉ. दिनेश गर्ग का कहना है कि डाक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल करने के फैसले के बाद स्पेशलिस्ट की संख्या तो उतनी ही रहेगी। लेकिन जूनियर डॉक्टरों के प्रमोशन रुक जाएंगे। सरकार को जूनियर डॉक्टरों के संबंध में भी कुछ सोचना चाहिए। सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ का कहना है कि देश में डॉक्टर और मरीज का अनुपात बहुत कम है। एकदम से डॉक्टरों की कमी को दूरी नहीं किया जा सकता। इसीलिए प्रधानमंत्री ने रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई है, लेकिन इसके साथ-साथ युवा डॉक्टरों को भी आगे लाना होगा, क्योंकि वह लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से अवगत रहते हैं। उनके लिए भी कुछ अच्छी प्लानिंग होनी चाहिए।
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हरियाणा सिविल मेडिकल सविर्सेज एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जसवीर सिंह परमार का कहना है कि चिकित्सकों की कमी का यह स्थायी समाधान नहीं है। इससे चिकित्सक कुछ समय के लिए तो टिके रहेंगे, लेकिन जूनियर को मौका नहीं मिलेगा। रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से नए स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आएंगे। चिकित्सकों की प्रमोशन प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए स्थायी समाधान यह है कि नई पोस्ट बढ़ाई जाए।
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एसोसिएशन के प्रेस सचिव डॉ. दिनेश गर्ग का कहना है कि डाक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल करने के फैसले के बाद स्पेशलिस्ट की संख्या तो उतनी ही रहेगी। लेकिन जूनियर डॉक्टरों के प्रमोशन रुक जाएंगे। सरकार को जूनियर डॉक्टरों के संबंध में भी कुछ सोचना चाहिए। सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ का कहना है कि देश में डॉक्टर और मरीज का अनुपात बहुत कम है। एकदम से डॉक्टरों की कमी को दूरी नहीं किया जा सकता। इसीलिए प्रधानमंत्री ने रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई है, लेकिन इसके साथ-साथ युवा डॉक्टरों को भी आगे लाना होगा, क्योंकि वह लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से अवगत रहते हैं। उनके लिए भी कुछ अच्छी प्लानिंग होनी चाहिए।
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