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क्लीनिकल ट्रायल करो पर जरा संभालकर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 30 Jan 2014 03:47 PM IST
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क्लीनिकल ट्रेंड्स में चाहे जितने परिवर्तन आ जाएं पर ध्यान यह रखना होगा कि इसमें सुरक्षा होनी चाहिए। यह कहना है नामी दवा कंपनियों के अधिकारियों का।
आईसी बायो क्लीनिकल रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सीआईआई में क्लीनिकल ट्रेंड में चेंज पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें डाबर रिसर्च लिमिटेड के मेडिकल अफेयर्स एंड क्लीनिकल रिसर्च के हेड डॉ. अरुण गुप्ता भी पहुंचे।
उन्होंने कहा कि क्लीनिकल रिसर्च में लिबर्टी है पर इस लिबर्टी में ध्यान यह रखना होगा कि हरेक फेज में ट्रायल होने वाले पर खास नजर रखी जाए।
उन्होंने कहा कि अब जरूरी कर दिया गया है कि दवा के ट्रायल के बाद पेशेंट की रिपोर्ट चौबीस घंटे के भीतर दी जाए। उन्होंने कहा कि यह तय करना होगा कि मरीज की हालत क्या है? उस पर दवा का प्रयोग किया जा सकता है कि नहीं।
उन्होंने कहा कि ट्रायल तो रिसर्च का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि ट्रायल में सेफ्टी को किसी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एथिक्स कमेटी है जो कि ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट 1988 के अंतर्गत किए जाने वाले ट्रायल्स पर नजर रखती है।
इस मौके पर वीनस रेमीडीज के हेड क्लीनिकल रिसर्च बाबूराव विक्रम ने क्लीनिकल ट्रायल्स और मार्केटिंग सर्विलांस, औरिगा रिसर्च लिमिटेड के हेड प्रोजेक्ट प्लानिंग एंड मैनेजमेंट मनोज कारवा ने बताया कि किस तरह से नियामों में चेंज आया है।
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आईसी बायो क्लीनिकल रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सीआईआई में क्लीनिकल ट्रेंड में चेंज पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें डाबर रिसर्च लिमिटेड के मेडिकल अफेयर्स एंड क्लीनिकल रिसर्च के हेड डॉ. अरुण गुप्ता भी पहुंचे।
उन्होंने कहा कि क्लीनिकल रिसर्च में लिबर्टी है पर इस लिबर्टी में ध्यान यह रखना होगा कि हरेक फेज में ट्रायल होने वाले पर खास नजर रखी जाए।
उन्होंने कहा कि अब जरूरी कर दिया गया है कि दवा के ट्रायल के बाद पेशेंट की रिपोर्ट चौबीस घंटे के भीतर दी जाए। उन्होंने कहा कि यह तय करना होगा कि मरीज की हालत क्या है? उस पर दवा का प्रयोग किया जा सकता है कि नहीं।
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उन्होंने कहा कि ट्रायल तो रिसर्च का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि ट्रायल में सेफ्टी को किसी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एथिक्स कमेटी है जो कि ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट 1988 के अंतर्गत किए जाने वाले ट्रायल्स पर नजर रखती है।
इस मौके पर वीनस रेमीडीज के हेड क्लीनिकल रिसर्च बाबूराव विक्रम ने क्लीनिकल ट्रायल्स और मार्केटिंग सर्विलांस, औरिगा रिसर्च लिमिटेड के हेड प्रोजेक्ट प्लानिंग एंड मैनेजमेंट मनोज कारवा ने बताया कि किस तरह से नियामों में चेंज आया है।
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