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पीजीआई और यूटी शिक्षा विभाग को नोटिस, जानिए क्या है मामला?

Sun, 21 Aug 2016 10:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 21 Aug 2016 10:24 AM IST
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district court noticed pgi and ut education department
जिला अदालत ने पीजीआई और यूटी शिक्षा विभाग को भेजा नोटिस - फोटो : amar ujala
पीजीआई कैंपस में बने गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के मामले में जिला अदालत ने पीजीआई और यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट से जवाब मांगा है। चंडीगढ़ के वकील शिव मूर्ति यादव ने एजुकेशन सेक्रे टरी यूटी, डायरेक्टर स्कूल एजुके शन, डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर यूटी, स्कूल की प्रिंसिपल, डायरेक्टर पीजीआई, पार्षद सौरभ जोशी को पार्टी बनाकर जिला अदालत में  सिविल केस दायर किया है।
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मामले में कोर्ट से मांग की गई है कि आदेश दिया जाए कि पीजीआई में नई जगह स्कूल बनाया जाए और जब तक स्कूल नहीं बन जाता, तब तक पेशेंट्स/केयर टेकर्स को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। क्योंकि स्कूल में पढ़ रहे छात्रों को संक्रामक रोग फैलने का खतरा है। वहीं इस स्कू ल के छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने पर रोक लगाई जाए।
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शुक्रवार को  याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को 13 सितंबर के लिए नोटिस भेज जवाब मांगा है। पीजीआई में एक समारोह पर आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के समक्ष भी परिजन अपनी यह समस्या उठा चुके हैं।
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यह कहा है याचिका में
याचिका में शिव मूृर्ति ने कहा है कि उनका बेटा  इस स्कूल में 7वीं का स्टूडेंट है। वहीं उनकी 4 साल की बेटी भी अपने भाई के साथ उसी स्कूल में पढ़ना चाहती थी। अप्रैल, 2016 में वह स्कूल में अपनी बेटी को एडमिशन दिलाने गए। वहा स्कूल प्रिंसिपल ने उन्हें कहा कि उनके और सैकड़ों लोगों के बच्चे जो जनता कलोनी, नया गांव, डिस्ट्रिक्ट एसएएस नगर में रहते हैं, उनके बच्चों का एडमिशन नहीं हो सकता।

कारण पूछने पर बताया गया कि डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर की गाइडलाइंस हैं कि चंडीगढ़ से बाहर के बच्चों को एडमिशन नहीं दिया जाएगा। शिव मूर्ति यादव से संबंधित गाईडलांइस मांगी तो प्रिंसिपल  ने देने से मना कर दिया। जिसके बाद आरटीआई के तहत संबंधित जानकारी प्रिंसिपल से प्राप्त की। आरटीआई में कहा गया कि प्राइमरी क्लास में स्कूल से एक किमी के दायरे में आने वाले बच्चों, अपर क्लास मेें 3 किलोमीटर तक के यूटी के बच्चों को एडमिशन दिया जाएगा।


यदि सीटें बच जाती हैं तो प्राइमरी क्लास में 3 किमी व अपर प्राइमरी क्लास में 5 किमी तक के बच्चों को भर्ती किया जाएगा परंतु है।इसके बाद भी अगर सीटें खाली रहती हैं तो 5 किमी के दायरे से बच्चे लिए जा सकते हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि राइट टू एजुकेशन के तहत एजुकेशन डिपार्टमेंट दूसरे राज्य के बच्चों को एडमिशन देने से मना नहीं कर सकता।
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