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प्रोफेसर विरेंद्र के नार्को टेस्ट और रिमांड बढ़ाने की अर्जी खारिज

Mon, 28 Mar 2016 02:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Mon, 28 Mar 2016 02:53 PM IST
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dismissed of narco test and plea remand of professor virender
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर विरेंद्र के मामले में पुलिस को बड़ा झटका लगा है। रविवार को सीजेएम लोकेश गुप्ता की कोर्ट ने प्रोफेसर विरेंद्र का नार्को टेस्ट कराने और रिमांड बढ़ाने की अर्जी को खारिज कर दिया।

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प्रोफेसर की जेल बदलने के लिए जेल अधीक्षक की ओर से लगाई गई अर्जी भी खारिज हो गई है। अब प्रोफेसर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में सुनारिया जेल में रहेंगे। प्रोफेसर को रविवार सुबह 8 दिन का रिमांड पूरा होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था। आरोपी को 8 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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 8 दिन में क्यों नहीं कर सके पूछताछ?
प्रो. विरेंद्र सिंह का रिमांड 4 दिन तक बढ़वाने के लिए पुलिस ने कोर्ट में कहा कि प्रोफेसर ने उपद्रव के दौरान बहुत से लोगों से बातचीत की है। उनमें 280 को समन भेजा गया था ताकि उनको प्रोफेसर के सामने बैठाकर पूछताछ हो सके। लेकिन अभी तक लगभग 100 लोगों से ही पूछताछ हुई है।
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इसलिए प्रोफेसर के सामने बैठाकर अन्य लोगों से पूछताछ होनी है। इसके लिए 4 दिन का और समय चाहिए। वहीं प्रोफेसर के वकीलों ने इसका विरोध किया और रिमांड नहीं बढ़ाने की बात रखी। कोर्ट ने कहा कि जब पुलिस को आठ दिन का समय दिया गया था तो उन आठ दिन में पुलिस क्यों पूरी पूछताछ नहीं कर सकी। इसलिए रिमांड अर्जी को खारिज किया जाता है।

प्रोफेसर का शरीर कांपता है, नार्को टेस्ट नहीं करा सकते
कोर्ट में पुलिस ने कहा था कि प्रोफेसर का नार्को टेस्ट कराना जरूरी है। आरोपी के वकील जे. के. गक्खड़ और आरसी दलाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी को नार्को टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और मुंबई हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी भी रखी। वकीलों ने यह भी कहा कि प्रोफेसर को पार्किसन बीमारी है और उनका शरीर कांपता है। इसलिए उनका नार्को टेस्ट नहीं कराया जा सकता है। आखिर में कोर्ट ने नार्को टेस्ट की अर्जी खारिज कर दी।

प्रोफेसर की जेल भी नहीं बदली जाएगी
जेल अधीक्षक दयानंद मंडोला की ओर से सीजेएम कोर्ट में रविवार को अर्जी लगाई गई थी कि प्रोफेसर को सुनारिया जेल में रखने से झगड़ा हो सकता है। क्योंकि वहां पहले से ही हिंसा के आरोपी बंद हैं। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता जे. के. गक्खड़ और आरसी दलाल ने कहा कि जांच अधिकारी डीएसपी पवन कुमार शर्मा से पूछा जाए कि क्या उनकी कस्टडी में कई दिनों तक रहने के दौरान प्रोफेसर ने उनसे कोई अभद्रता की है। डीएसपी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इससे इंकार कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने जेल अधीक्षक की अर्जी को खारिज कर दिया।


ये है मामला
आरोप है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर विरेंद्र ने जाट आरक्षण आंदोलन को भड़काया। उनका एक विवादित ऑडियो टेप सामने आया था, जिसमें वे आंदोलन को दूसरी जगह भी शुरू करने की बात कह रहे हैं। इस टेप के आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन कुमार ने प्रोफेसर विरेंद्र सिंह और दलाल खाप के प्रवक्ता कैप्टन मानसिंह के खिलाफ  राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था।

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