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पंजाब में कांग्रेस के लिए बागी फिर बनेंगे मुसीबत, जानिए कैसे

Fri, 20 Jan 2017 01:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 20 Jan 2017 01:06 AM IST
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Disloyalist of Congress will again create trouble, know the reason
कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

पंजाब में कांग्रेस के लिए बागी एक बार फिर मुसीबत बन गए हैं। कई हलकों में पार्टी का टिकट न मिलने से नाराज नेताओं ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया है। 

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दिलचस्प है कि पार्टी नेतृत्व ने अभी तक डैमेज कंट्रोल एक्सरसाइज शुरू नहीं की है। जबकि, 21 जनवरी तक नामांकन वापस लेने का समय है। साल 2012 के चुनाव में कांग्रेस की हार की एक अहम वजह कई हलकों में पार्टी के नेताओं की बगावत भी थी। 
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इस बार सुनाम से टिकट के दावेदार रजिंदर दीपा ने दमन बाजवा को टिकट देने के बाद आजाद के रूप में नामांकन किया है। इसी तरह लुधियाना ईस्ट से पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी के करीबी गुरमेल पहलवान ने भी आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया है। 
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जालंधर में तीन बागी खड़े हो गए हैं। राणा रंधावा ने जालंधर कैंट, सुरिंदर महे ने जालंधर वेस्ट और गुरविंदर अटवाल ने नकोदर से नामांकन कर दिया है। माझा में भी तीन बागी खड़े हैं। 

साल 2012 में पार्टी की हार की प्रमुख वजह थी बगावत

Disloyalist of Congress will again create trouble, know the reason
कांग्रेस

अशोक शर्मा ने पठानकोट, नरेश पुरी ने सुजानपुर और रुमाल चंद ने भोआ से आजाद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन कर दिया है। पुरी और शर्मा पिछली बार भी आजाद लड़े थे। 

बंगा से तरलोचन सूंध पहले ही आजाद लड़ने का ऐलान कर चुके थे। अब गढ़शंकर से निमिशा मेहता ने नामांकन कर दिया है। फाजिल्का से टिकट मांग रहे मोहिंदर रिणवा और मानसा से गुरप्रीत कौर आजाद खड़े हो गए हैं। 

2012 के चुनाव में कांग्रेस के दो दर्जन से ज्यादा बागी आजाद खड़े हो गए थे। पिछली बार पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने बागियों को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन इस बार हाईकमान शुरू से ही इस मुद्दे पर गंभीर थी। 

प्रदेश के तीन प्रमुख नेताओं कैप्टन अमरिंदर सिंह, अंबिका सोनी और चरनजीत सिंह चन्नी को संभावित बागियों को पहले ही समझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया है। 

बुधवार को कैप्टन ने खुद नामांकन भरना था। माना जा रहा है कि अगले दो-तीन दिन वह बागियों को समझाने के लिए निकलेंगे, लेकिन समस्या यह है कि अगर बागी नामांकन वापस भी ले लेते हैं तो वे अंदरखाते उम्मीदवारों का नुकसान करेंगे। 

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