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मानवता शर्मसार, बच्चों की मौत पर खेला खेल

Thu, 13 Nov 2014 11:42 AM IST
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक Updated Thu, 13 Nov 2014 11:42 AM IST
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Dirty Play on Child Death Figures in PGI

प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस में बच्चों की मौत के आंकड़ों का खेल खेला जा रहा है। यहां का आपात विभाग अपना रिकॉर्ड दुरुस्त रखने के लिए मानवता को ताक पर रख रहा है। विभाग तीन दिन तक उपचाराधीन रहने वाले बच्चों की मौत होने पर उन्हें ब्रॉटडेड (मरा हुआ लाया गया) दिखा रहा है।

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हैरानी की बात यह है कि गंभीर मरीजों को विभाग वार्ड में भर्ती भी नहीं करता। ऐसे मरीजों की संख्या प्रतिमाह लगभग 30 से 35 मानी जा रही है। अक्टूबर माह में ही ऐसे कई गंभीर बच्चे आए जिनका दो तीन दिन तक इलाज किया गया लेकिन मौत होने पर विभाग ने उन्हें बॉटडेड दिखाया।
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बाल रोग विभाग अपने वार्ड में मौतों की संख्या कम दिखाने और अन्य अस्पतालों से अपना रिकॉर्ड दुरुस्त रखने के कारण इस तरह की संवेदनहीन गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। विभाग में यह खेल लंबे समय से चल रहा है। इसके बाद भी पीजीआई प्रशासन इस मामले पर मौन बना हुआ है।
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ये बोले सीएमओ और विभागाध्यक्ष

Dirty Play on Child Death Figures in PGI

इलाज चलने के बावजूद अगर मरीज की एंट्री ब्रॉटडेड रजिस्टर में की जाती है तो सही नहीं है। इसके लिए हमने विभाग को कई बार सूचित किया है। लेकिन तानाशाही रवैये के चलते महिला चिकित्सक उल्टे हमें ही तंग करती हैं। गंभीर मरीजों का वार्ड में दाखिला तक नहीं किया जाता, ताकि उनके रिकॉर्ड में उपचार के दौरान मरने वालों की संख्या कम ही रहे।
- डॉ. संदीप, सीनियर सीएमओ, आपात विभाग, पीजीआईएमएस

जब मरीज मरा हुआ आता है तभी ब्राटडेड लिखा जाता है, इसके अलावा नहीं। यह गलत है कि उपचार के बाद मरीजों को ब्रॉटडेड घोषित किया जाता है। जो मरीज अधिक गंभीर स्थिति में होता है, उसे ही उपचार के लिए आपात विभाग में रखते हैं। मरीज की स्थिति पर निर्भर होता है कि उसे आपात विभाग में कितनी देर रखना है। जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह निराधार है।
- डॉ. गीता गठवाला, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, पीजीआईएमएस

यह भी है विवाद

Dirty Play on Child Death Figures in PGI

पीजीआई में बाल रोग व नियोनोटॉलोजी विभाग हैं। इसमें एक वरिष्ठ चिकित्सक को नियोनोटॉलोजी विशेषज्ञ हैं। इसी विभाग में गंभीर मरीजों को दाखिल कर उपचार दिया जाता है। लेकिन संस्थान में सभी मरीजों का बाल रोग विभाग में ही रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा है जबकि गंभीर मरीजों का रिकॉर्ड नियोनोटॉलॉजी में दर्ज किया जाना चाहिए।

केस एक
नाम : बेबी रीटा। 27 अक्टूब को भर्ती हुई और एक दिन इलाज चला। उसके एडमिशएन नंबर 208892 हैं। जबकि विभाग ने उसे 27 अक्टूबर को ही ब्रॉट डेड दिखा दिया।
केस दो
नाम : बेबी सीमा। 28 अक्टूबर को इसे दाखिला कराया गया, एक दिन इलाज चला लेकिन इसे 28 अक्टूबर को ही ब्रॉटडेड दिखा दिया गया । इसका एडमिशन नंबर 209071 हैं।
केस 3
नाम : बेबी कविता इसे 31 अक्टूबर को भर्ती कराया गया और चार दिन तक इलाज चला। इसके बावजूद मौत होने पर इसे 31 अक्टूबर को ब्रॉटडेड दिखा दिया गया है। इसके एडमिशन नंबर  211292 है।

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