नशे की सप्लाई के लिए भी हो रही डिजिटल पेमेंट, हाईकोर्ट पहुंची अर्जी
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डी एडिक्शन सेंटर से इलाज करवा रहे लोगों की ओर से ड्रग्स की डिजिटल पेमेंट की दी गई जानकारी का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में एक समाचार पत्र की खबर को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट को बताया गया है कि ट्राईसिटी के कई इलाकों में खुलेआम नशीले पदार्थ बिक रहे हैं।
इसकी खरीद फरोख्त कैश में नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यम से की जा रही है। इस अर्जी पर हाईकोर्ट ने मुख्य याचिका के साथ सुनवाई का निर्णय लिया है। मामले में अर्जी दाखिल करते हुए एडवोकट नवकिरण सिंह ने हाईकोर्ट को बताया की बीते दिनों एक समाचार पत्र में उन्होंने ड्रग्स की डिजिटल पेमेंट से जुड़ी खबर पढ़ी।
यह खबर डी-एडिक्शन केंद्र इलाज करवा रहे कुछ लोगों की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित थी। नवकिरण ने मामले में समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार को आधार बनाते हुए इसे बेहद गंभीर स्थिति करार दिया।
हाईकोर्ट ने अर्जी को मुख्य याचिका के साथ सुनने का लिया निर्णय
साथ ही ड्रग रैकेट को तोड़ने और नशे के तस्करों को गिरफ्तार करने के लिए उचित आदेश जारी करने की अपील की। नवकिरण सिंह ने हाईकोर्ट में पहले ही पंजाब में हजारों करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट के चल रहे मामले में यह अर्जी दायर की है।
उन्होंने कोर्ट से इस समाचार को रिकॉर्ड में लेने की मांग की है। नवकिरण सिंह ने हाईकोर्ट को बताया है कि यह जानकरी पंचकूला के डी-एडिक्शन सेंटर में इलाज करवा रहे नशे के अदि लड़के और लड़कियों ने ही दी है।
जिन्होंने बताया है कि मनीमाजरा, जोलोवाल और पिंजौर बॉर्डर के पास खुलेआम ड्रग्स बेचीं और खरीदी जा रही हैं। डिजिटल मोड से इसकी पेमेंट की जा रही है। नवकिरण सिंह ने हाईकोर्ट से मांग की है कि अगर नशा तस्करों और ड्रग रैकेट के मामले में डी-एडिक्शन केंद्रों में इलाज करवा रहे लोग काफी अहम जानकारियां दे सकते हैं तो एनडीपीएस के केस में गिरफ्तार किये गए तस्करों से भी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा सकती हैं।
लिहाजा इसके लिए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया जाए। यह टीम एक दूसरे से सभी सूचनाएं साझा करे। जिससे नशे का कारोबार समाप्त किया जा सके। चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार एवं जस्टिस एबी चौधरी की खंडपीठ ने इस अर्जी पर सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी है।