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बेजुबानों पर भी संकट: मिनी लॉकडाउन के कारण शादियां रद्द, काम बंद होने से घटी घोड़ियों की खुराक
Thu, 20 May 2021 04:47 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 20 May 2021 04:47 PM IST
सार
चंडीगढ़ में लॉकडाउन लगे होने के कारण लोग सादगी से शादी समारोह कर रहे हैं। इससे इस कारोबार से जुड़े लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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कोरोना के कारण शादियों पर संकट।
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
शादी का सीजन है और चंडीगढ़ में लॉकडाउन लगा है। परिवार का गुजारा करना मुसीबत हो गया है। आर्थिक संकट ने ऐसा घेर लिया है कि जानवरों तक को भरपेट खुराक नहीं दे पा रहे हैं। यह कहना है उन घोड़ी वालों का, जिनका पूरा रोजगार ही शादियों पर टिका होता है। उनका कहना है कि आमदनी कम होने से घोड़ियों की खुराक पर भी असर पड़ा है। घोड़ी वालों का कहना है कि यदि कम खुराक मिलेगी तो घोड़ी कमजोर हो सकती है। हालत यह है कि मालिक भले ही भूखा रहे, घोड़ी को तो खिलाना ही होगा। एक घोड़ी पर हर रोज कम से कम दौ सौ रुपये का खर्च आता है।
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पैसा ही नहीं, कहां से लाएं घोड़ियों की खुराक
अपने से अधिक घोड़ियों पर ध्यान रखना पड़ता है। पिछले साल भी सीजन में सब कुछ खत्म हो गया। इस बार आस बंधी तो अब लॉकडाउन के कारण परेशानी बढ़ गई। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। पैसे के अभाव में घोड़ियों की खुराक भी कम हो गई है। हरा चारा, मक्की के दाने और चना खिलाते हैं। यह सब खरीदना महंगा पड़ता है। ऐसे में अब भरपेट खाना भी नहीं दे पा रहे। -बिल्ला बलान
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मुश्किल वक्त.. दूसरा काम भी ढूंढ रहा हूं
मेरे पास चार घोड़ियां हैं। लॉकडाउन में जो भी बुकिंग थी, सब खत्म हो गई है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। चार घोड़ियों पर हर दिन 800 रुपये का खर्च है। आर्थिक संकट के चलते इनकी खुराक में भी कमी आ रही है। भरपेट खुराक न मिलने से यह कमजोर हो जाएंगी। कोई दूसरा काम तलाश रहा हूं। - सूरज बलान
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निगम चालान काटना भी बंद करे
घोड़ियों का चालान करने के कारण बहुत परेशानी होती है। हम सभी लोगों की खुशियों में शामिल होते हैं। हमारी तो यही चाहत होती है कि सभी के घरों में खुशियां हों। घोड़ी को झुग्गी में छाया बनाकर रखते हैं। नगर निगम के लोग चालान करते हैं। इससे और आर्थिक नुकसान होता है। सरकार घोड़ी वालों के लिए भी जगह दे ताकि हम सभी अपना गुजारा कर सकें। और महंगे चालान से बच सके। अभी तो लॉकडाउन में काम भी बंद है। -अमित बलान
सरकार भी नहीं कर रही मदद
हमारी आमदनी नहीं है, लेकिन घोड़ी के लिए चारा और दाने का इंतजाम करना है। पैसों के अभाव में इनकी खुराक पर असर पड़ा है। जितना दाना इन्हें चाहिए, आर्थिक संकट के कारण नहीं दे पा रहे हैं। हमेशा चिंता लगी रहती है कि कहीं घोड़ी बीमार न पड़ जाए। एक बार थोड़ी तबीयत खराब हो जाने पर कम से कम एक हजार रुपये का खर्च आता है। सरकार से हमें कोई मदद नहीं मिलती। -विशाल बलान