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हरियाणा में डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज बढ़े, देखिए कहां-कितने केस?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 29 Sep 2016 06:59 PM IST
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अस्पताल में मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डेंगू के कुल 634 में से अंबाला में सर्वाधिक 234 मामले अब तक सामने आ चुके हैं। उधर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर)के शहरों में चिकनगुनिया का प्रकोप भी लगातार बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अब तक डेंगू की वजह से प्रदेश में एक भी मौत नहीं हुई है। प्रदेश में डेगू के मामलों में पिछले करीब एक सप्ताह में मरीजों की तादाद में 200 तक का इजाफा हुआ है।
अंबाला में सर्वाधिक 243, पंचकूला में 109 जबकि गुड़गांव में अब तक डेंगू के 54 मरीजों की पुष्टि हुई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनकी कोशिश लार्वा को बढ़ने से रोका जाए जिसके लिए पूरे प्रदेश में फॉगिंग की जा रही है।
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इसके अलावा सोशल साइट्स और व्यक्तिगत तौर पर भी इससे बचाव को लेकर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचाव हो सके। चिकनगुनिया के अधिकतर मामले में एनसीआर में हैं, जिनमें रोहतक में सर्वाधिक 79, फरीदाबाद में 65 जबकि गुड़गांव में 22 मामले सामने आ चुके हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अब तक डेंगू की वजह से प्रदेश में एक भी मौत नहीं हुई है। प्रदेश में डेगू के मामलों में पिछले करीब एक सप्ताह में मरीजों की तादाद में 200 तक का इजाफा हुआ है।
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अंबाला में सर्वाधिक 243, पंचकूला में 109 जबकि गुड़गांव में अब तक डेंगू के 54 मरीजों की पुष्टि हुई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनकी कोशिश लार्वा को बढ़ने से रोका जाए जिसके लिए पूरे प्रदेश में फॉगिंग की जा रही है।
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इसके अलावा सोशल साइट्स और व्यक्तिगत तौर पर भी इससे बचाव को लेकर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचाव हो सके। चिकनगुनिया के अधिकतर मामले में एनसीआर में हैं, जिनमें रोहतक में सर्वाधिक 79, फरीदाबाद में 65 जबकि गुड़गांव में 22 मामले सामने आ चुके हैं।
लगातार चलाई जा रही है एंटी लार्वा एक्टिविटी
डेंगू
- फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो डेंगू से बचाव के लिए एंटी लार्वा एक्टिविटी चलाई जा रही है, ताकि लार्वा को बड़े होकर प्यूपा और फिर मच्छर बनने का मौका ही नहीं मिल सके। डॉक्टरों के मुताबिक लावॉ को मच्छर बनने में 10-12 दिनों का वक्त लगता है, लेकिन अगर शुरुआती दौर में ही एंटी लार्वा एक्टिविटी के जरिये उन्हें नियंत्रित कर लिया जाए तो बचाव काफी हद तक किया जा सकता है।
लार्वा की डेढ़ वर्ष तक की हो सकती है मियाद
डॉक्टरों के मुताबिक अगर कहीं लार्वा दिखता है तो सफाई के वक्त खास तौर पर सूखू कपड़े का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर साल में अगर उस जगह पर पानी फिर खड़ा होता है तो फिर खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू के मामलों में पिछले एक दिन में आठ जबकि चिकनगुनिया के 12 मरीजों की बढ़ोतरी हुई है। सभी अस्पतालों में इन बीमारियों से बचाव के लिए फीवर क्लीनिक बनाए गए हैं जबकि एंटी लार्वा एक्टिविटी के जरिये भी इसपर रोकथाम की तमाम कोशिशें जारी हैं। प्रदेश में अब तक डेंगू से मौत का एक भी मामला नहीं आया है।
- डॉ. विजय गर्ग, निदेशक
लार्वा की डेढ़ वर्ष तक की हो सकती है मियाद
डॉक्टरों के मुताबिक अगर कहीं लार्वा दिखता है तो सफाई के वक्त खास तौर पर सूखू कपड़े का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर साल में अगर उस जगह पर पानी फिर खड़ा होता है तो फिर खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू के मामलों में पिछले एक दिन में आठ जबकि चिकनगुनिया के 12 मरीजों की बढ़ोतरी हुई है। सभी अस्पतालों में इन बीमारियों से बचाव के लिए फीवर क्लीनिक बनाए गए हैं जबकि एंटी लार्वा एक्टिविटी के जरिये भी इसपर रोकथाम की तमाम कोशिशें जारी हैं। प्रदेश में अब तक डेंगू से मौत का एक भी मामला नहीं आया है।
- डॉ. विजय गर्ग, निदेशक