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भारत के क्रीम शहद की मिठास के कायल हुए अमेरिकी, निर्यात के साथ कीमतें बढ़ीं...फिर भी चाहिए
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 15 Oct 2018 01:54 PM IST
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शहद
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पंजाब के सरसों के साग के बाद हरियाणा का सरसों का शहद विदेशियों को खूब भा रहा है। सात समंदर पार अमेरिका में सरसों के शहद क्रीम हनी की मांग बढ़ रही है। हरियाणा के मधुमक्खी पालक क्रीम हनी का निर्यात काफी समय से अमेरिका को कर रहे हैं, लेकिन बीते दो-तीन सालों में न सिर्फ इसके निर्यात में इजाफा हुआ है, बल्कि दाम भी ऊंचा मिल रहा है।
हरियाणा के व्यापारी और निर्यातक पहले के मुकाबले 500 से 1,000 टन अतिरिक्त क्रीम हनी का निर्यात कर रहे हैं। इसके निर्यात में व्यापारी और निर्यातकों को भी काफी फायदा हो रहा है। मधुमक्खी पालकों से 80 रुपये तक प्रति किलोग्राम सरसों का शहद लेने के बाद व्यापारी इसे जहां डेढ़ से दोगुने दाम में निर्यातक को बेचता है, वहीं निर्यातक इसे कई गुना ऊंची कीमत पर अमेरिका को निर्यात करता है।
हरियाणा में सरसों का रकबा काफी ज्यादा है, इसलिए मधुमक्खी पालक इसके शहद का बड़ी मात्रा में उत्पादन करते हैं। सरसों के सीजन में उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के मधुमक्खी पालक भी यहां आकर मधुमक्खियों के डिब्बे रखते हैं। क्रीम हनी की खूबी है कि वह जम जाता है। देश में इसकी खपत कम होने का कारण इसके पीछे यह धारणा है कि शुद्ध न होने के कारण ही यह जमता है। अमेरिकी विशेषज्ञों ने जमे हुए शहद को पूरी तरह शुद्ध माना है, जिससे वहां क्रीम हनी की खपत बढ़ रही है।
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स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है शहद
विनय फौगाट बताते हैं कि शहद व पराग कण लाल रक्त कणों की संख्या बढ़ाते हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। थकान बिल्कुल महसूस नहीं होती। पराग कण स्पर्म की मात्रा में भी बढ़ोतरी करते हैं। बच्चा न होने की स्थिति में पराग कण महिलाओं के लिए काफी लाभदायक हैं। रॉयल जैली से भी उम्र बढ़ती है।
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हरियाणा के व्यापारी और निर्यातक पहले के मुकाबले 500 से 1,000 टन अतिरिक्त क्रीम हनी का निर्यात कर रहे हैं। इसके निर्यात में व्यापारी और निर्यातकों को भी काफी फायदा हो रहा है। मधुमक्खी पालकों से 80 रुपये तक प्रति किलोग्राम सरसों का शहद लेने के बाद व्यापारी इसे जहां डेढ़ से दोगुने दाम में निर्यातक को बेचता है, वहीं निर्यातक इसे कई गुना ऊंची कीमत पर अमेरिका को निर्यात करता है।
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हरियाणा में सरसों का रकबा काफी ज्यादा है, इसलिए मधुमक्खी पालक इसके शहद का बड़ी मात्रा में उत्पादन करते हैं। सरसों के सीजन में उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के मधुमक्खी पालक भी यहां आकर मधुमक्खियों के डिब्बे रखते हैं। क्रीम हनी की खूबी है कि वह जम जाता है। देश में इसकी खपत कम होने का कारण इसके पीछे यह धारणा है कि शुद्ध न होने के कारण ही यह जमता है। अमेरिकी विशेषज्ञों ने जमे हुए शहद को पूरी तरह शुद्ध माना है, जिससे वहां क्रीम हनी की खपत बढ़ रही है।
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स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है शहद
विनय फौगाट बताते हैं कि शहद व पराग कण लाल रक्त कणों की संख्या बढ़ाते हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। थकान बिल्कुल महसूस नहीं होती। पराग कण स्पर्म की मात्रा में भी बढ़ोतरी करते हैं। बच्चा न होने की स्थिति में पराग कण महिलाओं के लिए काफी लाभदायक हैं। रॉयल जैली से भी उम्र बढ़ती है।
नौकरी छोड़कर मधुमक्खी पालन में कमाया नाम
honey
हरियाणा सरकार की ओर से गठित संगठन अतुल्य बी मास्टर फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन के निदेशक और प्रमोटर विनय फौगाट मैकेनिकल में बीटेक हैं। 2012 में डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी की और उसके बाद कृषि व मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में डट गए। झज्जर जिले के मलिकपुर गांव के निवासी विनय को बीते वर्ष सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर शहद रत्न अवार्ड से नवाज चुके हैं।
विनय बताते हैं कि सरकार की मदद से राजस्थान व पंजाब को शहद उत्पादन में टक्कर देने की तैयारी है। सरकार मधुमक्खी पालकों को स्थानीय बाजार में प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रही है। संगठन के साथ 1,200 मधुमक्खी पालक जुड़ चुके हैं। एक-दो साल में संगठन इस स्थिति में आ जाएगा कि वह अपने स्तर पर विदेश खासकर अमेरिका में शहद का निर्यात करेगा। अभी व्यापारी और निर्यातक काफी मुनाफा कमा लेते हैं, जबकि उत्पादक को खास लाभ नहीं होता।
इंडो और इस्राइल हनी उत्कृष्टता केंद्र से होगा फायदा
इंडो-इस्राइल हनी उत्कृष्टता केंद्र के उपनिदेशक बिल्लू यादव ने बताया कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के रामनगर स्थित इंडो-इस्राइल हनी उत्कृष्टता केंद्र से शहद उत्पादकों को काफी लाभ होने जा रहा है। जगह-जगह एकीकृत मधुमक्खी पालक विकास केंद्र खोलने जा रहे हैं। यहीं से किसानों के शहद को बॉटलिंग कर पूरे प्रदेश में बिक्री के लिए भेजा जाएगा। इससे उन्हें अच्छे दाम मिलेंगे। हरियाणा में अभी सात से आठ हजार टन उत्पादन हो रहा है। इसे दो से तीन गुना करने की योजना है।
विनय बताते हैं कि सरकार की मदद से राजस्थान व पंजाब को शहद उत्पादन में टक्कर देने की तैयारी है। सरकार मधुमक्खी पालकों को स्थानीय बाजार में प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रही है। संगठन के साथ 1,200 मधुमक्खी पालक जुड़ चुके हैं। एक-दो साल में संगठन इस स्थिति में आ जाएगा कि वह अपने स्तर पर विदेश खासकर अमेरिका में शहद का निर्यात करेगा। अभी व्यापारी और निर्यातक काफी मुनाफा कमा लेते हैं, जबकि उत्पादक को खास लाभ नहीं होता।
इंडो और इस्राइल हनी उत्कृष्टता केंद्र से होगा फायदा
इंडो-इस्राइल हनी उत्कृष्टता केंद्र के उपनिदेशक बिल्लू यादव ने बताया कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के रामनगर स्थित इंडो-इस्राइल हनी उत्कृष्टता केंद्र से शहद उत्पादकों को काफी लाभ होने जा रहा है। जगह-जगह एकीकृत मधुमक्खी पालक विकास केंद्र खोलने जा रहे हैं। यहीं से किसानों के शहद को बॉटलिंग कर पूरे प्रदेश में बिक्री के लिए भेजा जाएगा। इससे उन्हें अच्छे दाम मिलेंगे। हरियाणा में अभी सात से आठ हजार टन उत्पादन हो रहा है। इसे दो से तीन गुना करने की योजना है।