फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Decision on Partap Singh Bajwa Political Career

आज होगा बाजवा के राजनीतिक कैरियर का फैसला

Mon, 19 May 2014 08:47 AM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 19 May 2014 08:47 AM IST
विज्ञापन
Decision on Partap Singh Bajwa Political Career

लोक सभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी फिर से तेज हो गई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा दिया है।

विज्ञापन


हालांकि बाजवा का भविष्य आज दिल्ली में होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की मीटिंग पर टिका है। लोकसभा चुनाव केबाद होने जा रही कार्यसमिति की इस पहली मीटिंग को काफी अहम माना जा रहा है।

विज्ञापन

लंबे समय से चल रही कैप्टन-बाजवा में जंग

Decision on Partap Singh Bajwa Political Career

प्रदेश कांग्रेस प्रधान पर कब्जे को लेकर कैप्टन और बाजवा के बीच लंबे समय से जंग चल रही है। 2012 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद आलाकमान ने कैप्टन को हटाकर बाजवा को प्रधान बना दिया था। अब वही स्थिति बाजवा के सामने आ गई है।

पिछली बार कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस 13 में से आठ सीटें जीती थी। इस बार बाजवा की प्रधानी में पार्टी सिर्फ तीन सीट जीत सकी है। बाजवा खुद 1.30 लाख मतों के बड़े अंतर से भाजपा के विनोद खन्ना से हार गए हैं। कैप्टन अमरिंदर ने भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण जेटली को एक लाख से ज्यादा वोटों से मात दी है।

नतीजों के एक दिन बाद ही कैप्टन ग्रुप ने बाजवा के खिलाफ किलेबंदी शुरु कर दी थी। सबसे पहले विधायक राणा गुरमीत सोढी ने बाजवा केइस्तीफेकी मांग की। अगले ही दिन केवल ढिल्लों समेत कई विधायकों और नेताओं ने यह मांग दोहराई। साथ ही यह भी कहा कि कैप्टन अमरिंदर को प्रधान बनाया जाना चाहिए।

बाजवा की नजरें सीडब्‍ल्यूसी पर

Decision on Partap Singh Bajwa Political Career

अब बाजवा और कैप्टन, दोनों ही गुटों की नजरें सीडब्ल्यूसी पर टिकी हैं। कई राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। सबसे पहले निगाहें इस पर हैं कि क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी इस्तीफा देंगे।

उसके बाद क्या तमाम राज्यों के सीएम व प्रदेश प्रधान से लेकर दूसरे राष्ट्रीय नेता भी इस्तीफा देते हैं। अगर कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर इस्तीफों का दौरा न शुरु हुआ तो बाजवा को भी राहत मिल सकती है। पर अगर दूसरे नेताओं ने इस्तीफा दिया तो बाजवा को भी इसी परंपरा पर चलना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed