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दिवाली से पहले कर्मचारियों के घर अंधेरा

Tue, 29 Oct 2013 09:14 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 29 Oct 2013 09:14 AM IST
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Darkness on employee's houses before Diwali
दो दर्जन कर्मचारी अपने परिवार के साथ दिवाली की प्लानिंग कर रहे थे कि नगर निगम ने इन कर्मचारियों को झटका देते हुए बर्खास्त करने निर्णय ले लिया है।
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नगर निगम ने 26 अक्तूबर को इन कर्मचारियों को अपना फरमान सुना दिया। ऐसे में इन कर्मचारियों ने अपने परिवार के साथ ब्लैक दिवाली मनाने का निर्णय लिया है।

जब से इन कर्मचारियों को नौकरी चले जाने की खबर मिली है तब से उनके परिवार में मायूसी छा गई है। बता दें कि इन कर्मचारियों को ठेके पर भर्ती किया गया था।

वहीं, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इन कर्मचारियों की भर्ती छह माह के लिए की गई थी। उनका कहना है कि कर्मचारियों का कार्यकाल पूरा हो गया है। इसके बाद यह कार्रवाई की गई है।

फिर से भर्ती का नहीं लिया निर्णय
स्टाफ की कमी के चलते छह माह पहले नगर निगम ने इन कर्मियों को भर्ती किया था। अब इन कर्मचारियों को निकाल देने के बाद फिर से स्टाफ की कमी हो गई है, लेकिन नगर निगम ने फिर से भर्ती करने का अभी कोई निर्णय नहीं लिया है।
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बर्खास्त हुए कर्मचारियों का कहना है कि जब तक स्थायी तौर पर भर्ती नहीं हो जाती तब तक उनका कार्यकाल बढ़ा दिया जाए। प्रशासन के अलग-अलग विभागों में इस समय करीब 500 कर्मचारी ऐसे हैं जो अस्थायी तौर से नियुक्त हैं, लेकिन उनका कार्यकाल हर साल बढ़ा दिया जाता है। यह भर्ती भी स्थायी नौकरी के बदले में की गई है।
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31 अक्तूबर को सदन में उठेगा मामला
बर्खास्त कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, कमिश्नर, भाजपा पार्षद दल के नेता और कई पार्षदों को ज्ञापन सौंपा है।

डिप्टी मेयर सतीश कैंथ का कहना है कि कर्मचारियों का कार्यकाल तब तक बढ़ा देना चाहिए, जब तक स्थायी तौर पर भर्ती नहीं हो जाती है। उनका कहना है कि वह इस मामले को सदन की बैठक में भी उठाएंगे।

भाजपा पार्षद दल के नेता अरुण सूद का कहना है कि नगर निगम में पहले से स्टाफ की कमी है। कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकालना चाहिए।

भर्ती से पहले हुआ था विवाद
नगर निगम के आला अधिकारी इसलिए भी इन कर्मचारियों का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय नहीं ले रहे है, क्योंकि छह माह पहले इन कर्मचारियों की ज्वाइनिंग से पहले मार्च माह में सदन में इनकी भर्ती प्रक्रिया को लेकर हंगामा हुआ था।

एक पार्षद ने इन कर्मचारियों को नगर निगम की ओर से जारी नियुक्ति पत्र का सवाल उठाया था, जबकि इनकी भर्ती एक कंपनी की ओर से की गई थी कंपनी ने ही इन कर्मचारियों का लिखित परीक्षा और इंटरव्यू लिए थे।

ऐसे में कंपनी की ओर से ही उन्हें नियुक्ति पत्र जारी होने चाहिए। सदन में मामला उठने के बाद नगर निगम ने इन कर्मचारियों से अपने नियुक्ति पत्र वापस ले लिए थे।

हर माह मिलते है 22 हजार 300 रुपये
हर कर्मचारी को माह में 22 हजार 300 रुपये वेतन मिलता है, जबकि 5 से 6 हजार रुपये की राशि नगर निगम की ओर से उस कंपनी को भी प्रति कर्मचारी अदा की जाती है, जिसके माध्यम से यह कर्मचारी भर्ती हुए हैं।

सूत्रों का कहना है कि ऑडिट विभाग ने इस पर भी एतराज जताया है। बर्खास्त कर्मचारियों का कहना है कि नगर निगम को सीधा उनके साथ समझौता करना चाहिए, जिससे कंपनी को दी जाने वाली राशि भी बच जाएगी।


छह माह की नौकरी के लिए आवेदन, परीक्षा, इंटरव्यू, मेडिकल रिपोर्ट की प्रक्रिया के लिए दो माह का समय लगा था।

ज्वाइनिंग से पहले कई दूसरी जगह करते थे नौकरी
बर्खास्त होने वाले कर्मचारियों में कई शादीशुदा हैं। कई ऐसे भी है जिन पर पूरे परिवार का बोझ है। इसके साथ ही अधिकतर कर्मचारी नगर निगम में ज्वाइनिंग से पहले किसी और जगह भी नौकरी करते थे।
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