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Chandigarh News: फतेहाबाद में इस बार भी तटबंध टूटने का खतरा, प्रशासन की देरी से किसान चिंतित
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जिले के 124 गांव व उनकी ढाणियां हो गई थीं जलमग्न, 40 दिन जूझती रही आधी आबादी
कपिल शर्मा
फतेहाबाद। पिछले साल बाढ़ की भयावह स्थिति झेल चुके किसानों की चिंता फिर बढ़ गई है। करीब 11 महीने पहले आई बाढ़ का जख्म जिला वासी अभी भूल ही नहीं पाए कि इस बार भी तटबंध टूटने की आशंका ने उनमें डर पैदा कर दिया है। किसानों को डर है कि इस बार भी अगर अधिक बारिश हुई तो प्रशासन के प्रबंध नाकाफी साबित होंगे। वहीं, अब तक बेफिक्र बैठे अधिकारी सिर्फ 18 दिन में घग्गर नदी और रंगोई नाले के तटबंध मजबूत करने से लेकर ड्रेनों की सफाई तक का काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं।
वर्ष 2023 में 13 जुलाई को पंजाब क्षेत्र में घग्गर नदी का बांध टूटने से जाखल के गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। इसके बाद धीरे-धीरे जिले के 124 गांवों के खेतों में जलभराव हो गया था। करीब 40 दिन तक जलभराव से जिले की आधी आबादी जूझती रही थी। हालांकि प्रशासन ने शहरों व गांवों की आबादी में पानी नहीं आने दिया था। जाखल क्षेत्र से होकर गुजरने वाली घग्गर नदी में पानी की क्षमता 22 हजार क्यूसेक है। इससे ज्यादा जलप्रवाह होने पर नदी का पानी रंगोई नाले में भी छोड़ा जाता है। संवाद
मुआवजे के लिए जाखल उपतहसील में 4 माह से चल रहा धरना
बाढ़ पीड़ित किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाया है। पहले पोर्टल पर नुकसान दर्शाने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद अधिकारी सत्यापन के नाम पर समय लगाते रहे। करीब छह महीने बाद किसानों को करीब 32 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया। इसमें बाढ़ के अलावा ज्यादा बारिश व सेम के कारण खराब हुई फसलों का मुआवजा भी शामिल था। इधर, किसान संगठनों ने कई किसानों के मुआवजे से वंचित रहने के आरोप लगाए। सुनवाई नहीं होने पर 7 फरवरी को जाखल उपतहसील कार्यालय में किसान संगठनों ने धरना शुरू दिया । पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान, किसान नेता लाभ सिंह, जग्गी महल ने आरोप लगाया कि पिछले चार महीने से किसानों का उपतहसील में धरना चल रहा है। अब भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।
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रंगोई नाले की सफाई नहीं हुई
पिछली बार पंजाब क्षेत्र में बांध टूटने से जाखल के जरिये फतेहाबाद में बाढ़ का पानी घुस गया था। घग्गर में ज्यादा पानी होने पर पानी रंगोई नाले में डाला जाता है। मगर, रंगोई नाले के तटबंध कमजोर साबित हुए। 3 जगह रंगोई नाले के तटबंध टूट गए। घग्गर में भी लीकेज हो गई थी। गांव लांबा के पास घग्गर में 15 फुट और गांव जाखल के पीछे घग्गर नदी में 10 फुट तक कटाव हो गया था। अभी तक प्रशासन ने घग्गर व रंगोई नाले के तटबंधों को मजबूत करने के प्रयास नहीं किए। टोहाना, फतेहाबाद, जाखल व रतिया में सड़कों के नीचे बनी पानी निकासी की पुलियों की भी सफाई करवाने की जरूरत है।
1123 मकान क्षतिग्रस्त हजारों एकड़ फसल तबाह
फतेहाबाद में 124 गांवों में करीब 92000 एकड़ में जलभराव हो गया था। इससे धान, नरमा, ज्वार व पशुओं के चारे की फसलें बर्बाद हो गई थीं। खेतों में बने 1123 मकानों को नुकसान हुआ था और 45 पशुओं की मौत हो गई थी। जाखल क्षेत्र के गांवों में खेतों में मिट्टी भर गई थी। इस मिट्टी को भी खेतों से बाहर निकालने का सारा काम किसानों ने अपने स्तर पर ही करवाया था और पंजाब के किसानों ने भी ट्रैक्टर भेजे थे।
प्रशासन ने 2800 बाढ़ पीड़ित और लोगों की सूची भेजी
जिला प्रशासन के अनुसार 2800 और बाढ़ पीड़ित लोगों की सूची मुआवजे के लिए प्रदेश सरकार के पास भेजी गई है, ताकि उनको मुआवजा मिल सके। मगर, पगड़ी संभाल जट्टा यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान के अनुसार अभी भी 18 हजार किसान मुआवजे से वंचित हैं। इनमें से 50 फीसदी से ज्यादा किसान जाखल क्षेत्र के हैं।
सिंचाई विभाग की बाढ़ के पानी को आगे निकालने के लिए यह थी योजना
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओमप्रकाश बिश्नोई के अनुसार पिछले साल आई बाढ़ के बाद सिंचाई विभाग ने करीब 90 करोड़ रुपये के काम करवाने के लिए एस्टीमेट तैयार किए थे। इसके तहत फतेहाबाद की मुंशीवाली माइनर, भिरड़ाना माइनर व रत्ताथेह माइनर के नीचे साइफन बनाए जाएंगे, ताकि बाढ़ का पानी आगे निकल जाए। अभी 9 गांवों में पाइप लाइन बिछाई जानी हैं, जो पास से गुजर रही नहरों तक जाएंगी। जाखल-कुलां मार्ग पर निकलने वाली भाखड़ा नहर घग्गर के ऊपर से गुजर रही है, इसके तटबंधों को ऊंचा किया जाना है। जिले में गुजरने वाले रंगोई नाले के तटबंधों को मजबूत किया जाना है, ताकि बाढ़ का पानी रंगोई नाले में डाला जाए तो तटबंध न टूटे। करीब 24 लाख रुपये से नए पंप सेट और अन्य सामान खरीदा जाना था। इनमें से अधिकांश कार्यों के टेंडर हो चुके हैं, काम शुरू होना बाकी है। वैसे प्रशासन का दावा है कि 30 जून से पहले सारे काम पूरे किए जाएंगे।
मैंने अधिकारियों के साथ फील्ड में जाकर सभी जगहों का निरीक्षण किया है। तटबंधों को मजबूत करने, चांदपुरा साइफन से लेकर सभी ड्रेनों की सफाई करवाने का कार्य 30 जून तक पूरे करवाने के निर्देश दे दिए हैं। जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। -राहुल नरवाल, डीसी, फतेहाबाद
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कपिल शर्मा
फतेहाबाद। पिछले साल बाढ़ की भयावह स्थिति झेल चुके किसानों की चिंता फिर बढ़ गई है। करीब 11 महीने पहले आई बाढ़ का जख्म जिला वासी अभी भूल ही नहीं पाए कि इस बार भी तटबंध टूटने की आशंका ने उनमें डर पैदा कर दिया है। किसानों को डर है कि इस बार भी अगर अधिक बारिश हुई तो प्रशासन के प्रबंध नाकाफी साबित होंगे। वहीं, अब तक बेफिक्र बैठे अधिकारी सिर्फ 18 दिन में घग्गर नदी और रंगोई नाले के तटबंध मजबूत करने से लेकर ड्रेनों की सफाई तक का काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं।
वर्ष 2023 में 13 जुलाई को पंजाब क्षेत्र में घग्गर नदी का बांध टूटने से जाखल के गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। इसके बाद धीरे-धीरे जिले के 124 गांवों के खेतों में जलभराव हो गया था। करीब 40 दिन तक जलभराव से जिले की आधी आबादी जूझती रही थी। हालांकि प्रशासन ने शहरों व गांवों की आबादी में पानी नहीं आने दिया था। जाखल क्षेत्र से होकर गुजरने वाली घग्गर नदी में पानी की क्षमता 22 हजार क्यूसेक है। इससे ज्यादा जलप्रवाह होने पर नदी का पानी रंगोई नाले में भी छोड़ा जाता है। संवाद
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मुआवजे के लिए जाखल उपतहसील में 4 माह से चल रहा धरना
बाढ़ पीड़ित किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाया है। पहले पोर्टल पर नुकसान दर्शाने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद अधिकारी सत्यापन के नाम पर समय लगाते रहे। करीब छह महीने बाद किसानों को करीब 32 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया। इसमें बाढ़ के अलावा ज्यादा बारिश व सेम के कारण खराब हुई फसलों का मुआवजा भी शामिल था। इधर, किसान संगठनों ने कई किसानों के मुआवजे से वंचित रहने के आरोप लगाए। सुनवाई नहीं होने पर 7 फरवरी को जाखल उपतहसील कार्यालय में किसान संगठनों ने धरना शुरू दिया । पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान, किसान नेता लाभ सिंह, जग्गी महल ने आरोप लगाया कि पिछले चार महीने से किसानों का उपतहसील में धरना चल रहा है। अब भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।
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रंगोई नाले की सफाई नहीं हुई
पिछली बार पंजाब क्षेत्र में बांध टूटने से जाखल के जरिये फतेहाबाद में बाढ़ का पानी घुस गया था। घग्गर में ज्यादा पानी होने पर पानी रंगोई नाले में डाला जाता है। मगर, रंगोई नाले के तटबंध कमजोर साबित हुए। 3 जगह रंगोई नाले के तटबंध टूट गए। घग्गर में भी लीकेज हो गई थी। गांव लांबा के पास घग्गर में 15 फुट और गांव जाखल के पीछे घग्गर नदी में 10 फुट तक कटाव हो गया था। अभी तक प्रशासन ने घग्गर व रंगोई नाले के तटबंधों को मजबूत करने के प्रयास नहीं किए। टोहाना, फतेहाबाद, जाखल व रतिया में सड़कों के नीचे बनी पानी निकासी की पुलियों की भी सफाई करवाने की जरूरत है।
1123 मकान क्षतिग्रस्त हजारों एकड़ फसल तबाह
फतेहाबाद में 124 गांवों में करीब 92000 एकड़ में जलभराव हो गया था। इससे धान, नरमा, ज्वार व पशुओं के चारे की फसलें बर्बाद हो गई थीं। खेतों में बने 1123 मकानों को नुकसान हुआ था और 45 पशुओं की मौत हो गई थी। जाखल क्षेत्र के गांवों में खेतों में मिट्टी भर गई थी। इस मिट्टी को भी खेतों से बाहर निकालने का सारा काम किसानों ने अपने स्तर पर ही करवाया था और पंजाब के किसानों ने भी ट्रैक्टर भेजे थे।
प्रशासन ने 2800 बाढ़ पीड़ित और लोगों की सूची भेजी
जिला प्रशासन के अनुसार 2800 और बाढ़ पीड़ित लोगों की सूची मुआवजे के लिए प्रदेश सरकार के पास भेजी गई है, ताकि उनको मुआवजा मिल सके। मगर, पगड़ी संभाल जट्टा यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान के अनुसार अभी भी 18 हजार किसान मुआवजे से वंचित हैं। इनमें से 50 फीसदी से ज्यादा किसान जाखल क्षेत्र के हैं।
सिंचाई विभाग की बाढ़ के पानी को आगे निकालने के लिए यह थी योजना
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओमप्रकाश बिश्नोई के अनुसार पिछले साल आई बाढ़ के बाद सिंचाई विभाग ने करीब 90 करोड़ रुपये के काम करवाने के लिए एस्टीमेट तैयार किए थे। इसके तहत फतेहाबाद की मुंशीवाली माइनर, भिरड़ाना माइनर व रत्ताथेह माइनर के नीचे साइफन बनाए जाएंगे, ताकि बाढ़ का पानी आगे निकल जाए। अभी 9 गांवों में पाइप लाइन बिछाई जानी हैं, जो पास से गुजर रही नहरों तक जाएंगी। जाखल-कुलां मार्ग पर निकलने वाली भाखड़ा नहर घग्गर के ऊपर से गुजर रही है, इसके तटबंधों को ऊंचा किया जाना है। जिले में गुजरने वाले रंगोई नाले के तटबंधों को मजबूत किया जाना है, ताकि बाढ़ का पानी रंगोई नाले में डाला जाए तो तटबंध न टूटे। करीब 24 लाख रुपये से नए पंप सेट और अन्य सामान खरीदा जाना था। इनमें से अधिकांश कार्यों के टेंडर हो चुके हैं, काम शुरू होना बाकी है। वैसे प्रशासन का दावा है कि 30 जून से पहले सारे काम पूरे किए जाएंगे।
मैंने अधिकारियों के साथ फील्ड में जाकर सभी जगहों का निरीक्षण किया है। तटबंधों को मजबूत करने, चांदपुरा साइफन से लेकर सभी ड्रेनों की सफाई करवाने का कार्य 30 जून तक पूरे करवाने के निर्देश दे दिए हैं। जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। -राहुल नरवाल, डीसी, फतेहाबाद