10 अप्रैल से खरीद शुरू : पंजाब में आढ़ती ही करेंगे किसानों को फसल का भुगतान, गेहूं की एमएसपी 1975 रुपये तय
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पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के उस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें फसल खरीद पर किसानों को अदायगी सीधे उनके बैंक खाते में करने को कहा गया। सरकार ने राज्य में 10 अप्रैल से शुरू हो रही रबी सीजन की खरीद के लिए दिशा निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होगी और आढ़तियों के जरिए भुगतान की प्रक्रिया जारी रहेगी।
केंद्र सरकार ने इस साल रबी सीजन से प्रत्येक राज्य में एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) व अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा फसल खरीद पर पैसे का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में करने का फैसला किया था। इस प्रक्रिया के तहत मंडियों में फसल लेकर आने वाले किसानों को अपनी जमीन की फर्द की फोटो कॉपी दिखानी होगी और फसल बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा।
पंजाब में इस फैसले का जोरदार विरोध होते ही राज्य सरकार ने साफ कर दिया कि वह किसानों और आढ़तियों के बीच का रिश्ता खत्म नहीं करेगी और फसल अदायगी की पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। किसानों को अदायगी ऑनलाइन तरीके से अनाज खरीद पोर्टल द्वारा आढ़तियों के जरिए की जाएगी।
गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये तय किया
राज्य सरकार द्वारा जारी नए दिशा निर्देश के तहत, रबी सीजन 2021-22 के दौरान कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए फसल खरीद 10 अप्रैल से 31 मई तक चलेगी। इस दौरान एफसीआई व अन्य केंद्रीय एजेंसियों समेत सभी खरीद एजेंसियों के जरिये एमएसपी पर ही फसल की खरीद की जाएगी। इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि मंडियों में आने वाली गेहूं की सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भारत सरकार द्वारा तय एमएसपी पर फसल खरीदी जा सके। इसके साथ ही राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि मंडियों में पहुंचने वाली गेहूं को किसी भी स्तर पर तय एमएसपी से कम मूल्य पर न खरीदा जाए।
पंजाब से केंद्रीय एजेंसियां खरीदेंगी 130 लाख टन गेहूं
केंद्र सरकार, खाद्य एवं वितरण मंत्रालय ने चालू रबी सीजन के दौरान पंजाब से 130 लाख टन गेहूं खरीदने का फैसला किया है। यह देखते हुए राज्य सरकार ने सभी खरीद एजेंसियों के लिए खरीद का रिवाइज लक्ष्य तय कर दिया है। इसके तहत एफसीआई कुल गेहूं का 20 फीसदी (26 लाख टन) फसल खरीदेगी, जबकि राज्य सरकार की एजेंसियां- पनग्रेन 23 फीसदी (29.90 लाख टन), मार्कफेड 22 फीसदी (28.60 लाख टन) और पनसप 22 फीसदी (28.60 लाख टन), वेयरहाउस 13 फीसदी (16.90 लाख टन) गेहूं खरीदेगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लक्ष्य पूर्व अनुमान के हिसाब से तय किए गए हैं लेकिन मंडियों में फसल की आमद तक खरीद का काम जारी रखा जाएगा।
कोविड के चलते 2800 अधिक खरीद केंद्र बनेंगे
राज्य सरकार ने कोविड संकट के ध्यान में रखते हुए कुल 1871 मुख्य मंडी यार्ड व सब-यार्ड घोषित किए हैं। इसके अलावा हर हाल में खरीद को यकीनी बनाने के लिए 2800 अधिक खरीद केंद्र बनाने का एलान भी किया है। इसके तहत उन राइस मिलों को भी खरीद केंद्र घोषित किया गया है, जहां चारदीवारी, फसल रखने, फसल की साफ-सफाई, बिजली, पानी आदि हर तरह की सुविधा है।