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हादसाः गोबर गैस प्लांट में उतरे पिता, दो बेटे और चाचा समेत एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Updated Thu, 19 Jul 2018 09:35 AM IST
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डेरा रामपुरा में गोबर गैस प्लांट में दम घुटने से गांव अमीन के पंच, उनके पिता, सगे भाई और चाचा की मौत हो गई। प्लांट के टैंक की मरम्मत करने उतरे पंच का बड़ा भाई जब बाहर नहीं निकला तो परिवार के सदस्य एक-एक कर टैंक में उन्हें बचाने के लिए उतरे लेकिन कोई बाहर नहीं आ सका।
घटना का शिकार हुए परिवार ने एक माह पहले ही पशुओं के बाड़े के पीछे गोबर गैस प्लांट लगवाया था। बलदेव सिंह (57) के भतीजे इकबाल सिंह ने पुलिस को बताया कि उनके चाचा बलदेव सिंह का अमीन रोड स्थित रामपुरा डेरा में गोबर गैस का प्लांट है।
इसका टैंक करीब 15 फुट गहरा है। कई दिनों से लीकेज के चलते टैंक में बारिश का पानी भर जाता था। लीकेज ठीक करने के लिए बुधवार दोपहर 12 बजे बलदेव सिंह का बड़ा बेटा रुपिंद्र सिंह (31) टैंक में उतरा था। अंदर जाने के बाद वह जहरीली गैस की चपेट में आ गया। उसके शोर मचाने पर उसे बचाने के लिए उसका छोटा भाई व पंच देवेंद्र सिंह (25) गड्ढे में उतर गया।
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जहरीली गैस से उसका भी दम घुटने लगा और गड्ढे में बेहोश होकर गिर गया। दोनों बेटों को बचाने के लिए बलदेव सिंह (59) भी टैंक में उतरने लगा। कुछ सीढ़ियां उतरते ही वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए और टैंक में गिर गए। इस पर बलदेव सिंह के चचेरे भाई जोगिंदर सिंह (42) उनकी जान बचाने पहुंचे और वह भी गैस की चपेट में आ गए।
मौके पर शोरगुल होने के बाद परिजन और पास में काम कर रहे राजमिस्त्री घटनास्थल पर पहुंचे। मिस्त्री महिंद्र भी टैंक में उतरा तो गैस चढ़ने से छटपटाने लगा। लोगों ने उसे तुरंत बाहर खींच लिया। मृतकों के परिजन इकबाल सिंह, अमरीक सिंह, कुलदीप सिंह, राजू, रविंदर सिंह ने आठ मजदूरों की मदद से चारों को टैंक से बाहर निकाला।
एडीसी अनीष यादव दलबदल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद चारों शवों को परिजनों को सौंप दिए। पंच देवेंदर सिंह का सबसे बड़ा भाई कनाडा में रहता है। उसके चाचा अमेरिका गए हुए हैं। उनके लौटने के बाद सभी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
छह मिनट में गई चार की जान, पांचवां बाल-बाल बचा
सबसे पहले रुपिंदर गोबर गैस प्लांट में उतरा तो तीन मजदूर उपेंद्र, संदीप और मनोज इसका ढक्कन रस्सी से पकड़ कर खड़े थे। इन्होंने बताया कि छह मिनट में एक के बाद एक चार लोग प्लांट में उतरे और जीवित बाहर नहीं निकल सके। आखिर में एक मिस्त्री ने इन्हें भीतर जाकर देखने का प्रयास किया था, लेकिन उसे लोगों की मदद से बाहर निकाला गया और वह बाल-बाल बचा।
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घटना का शिकार हुए परिवार ने एक माह पहले ही पशुओं के बाड़े के पीछे गोबर गैस प्लांट लगवाया था। बलदेव सिंह (57) के भतीजे इकबाल सिंह ने पुलिस को बताया कि उनके चाचा बलदेव सिंह का अमीन रोड स्थित रामपुरा डेरा में गोबर गैस का प्लांट है।
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इसका टैंक करीब 15 फुट गहरा है। कई दिनों से लीकेज के चलते टैंक में बारिश का पानी भर जाता था। लीकेज ठीक करने के लिए बुधवार दोपहर 12 बजे बलदेव सिंह का बड़ा बेटा रुपिंद्र सिंह (31) टैंक में उतरा था। अंदर जाने के बाद वह जहरीली गैस की चपेट में आ गया। उसके शोर मचाने पर उसे बचाने के लिए उसका छोटा भाई व पंच देवेंद्र सिंह (25) गड्ढे में उतर गया।
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जहरीली गैस से उसका भी दम घुटने लगा और गड्ढे में बेहोश होकर गिर गया। दोनों बेटों को बचाने के लिए बलदेव सिंह (59) भी टैंक में उतरने लगा। कुछ सीढ़ियां उतरते ही वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए और टैंक में गिर गए। इस पर बलदेव सिंह के चचेरे भाई जोगिंदर सिंह (42) उनकी जान बचाने पहुंचे और वह भी गैस की चपेट में आ गए।
मौके पर शोरगुल होने के बाद परिजन और पास में काम कर रहे राजमिस्त्री घटनास्थल पर पहुंचे। मिस्त्री महिंद्र भी टैंक में उतरा तो गैस चढ़ने से छटपटाने लगा। लोगों ने उसे तुरंत बाहर खींच लिया। मृतकों के परिजन इकबाल सिंह, अमरीक सिंह, कुलदीप सिंह, राजू, रविंदर सिंह ने आठ मजदूरों की मदद से चारों को टैंक से बाहर निकाला।
एडीसी अनीष यादव दलबदल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद चारों शवों को परिजनों को सौंप दिए। पंच देवेंदर सिंह का सबसे बड़ा भाई कनाडा में रहता है। उसके चाचा अमेरिका गए हुए हैं। उनके लौटने के बाद सभी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
छह मिनट में गई चार की जान, पांचवां बाल-बाल बचा
सबसे पहले रुपिंदर गोबर गैस प्लांट में उतरा तो तीन मजदूर उपेंद्र, संदीप और मनोज इसका ढक्कन रस्सी से पकड़ कर खड़े थे। इन्होंने बताया कि छह मिनट में एक के बाद एक चार लोग प्लांट में उतरे और जीवित बाहर नहीं निकल सके। आखिर में एक मिस्त्री ने इन्हें भीतर जाकर देखने का प्रयास किया था, लेकिन उसे लोगों की मदद से बाहर निकाला गया और वह बाल-बाल बचा।