बुड़ैल जेल ब्रेकः किसने, कब, क्या और कैसे किया?
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पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, आरोपी जगतार सिंह तारा और एक अन्य हत्या केस में दोषी देवी सिंह ने महीनों पहले ही बुड़ैल जेल में 21/22 जनवरी 2004 में ही सुरंग की खुदाई शुरू कर दी थी। इन्हें बैरक नंबर-7 में रखा गया था।
यहां उन्होंने जेल प्रशासन से कुछ सुविधाएं देने की मांग की थी, लेकिन वह उपलब्ध न करवाने पर सभी भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। बाद में प्रशासन ने उन्हें सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं। इनमें जिम का सामान भी शामिल था। सुरंग खोदने के लिए वेट लिफ्टिंग रॉड का इस्तेमाल किया गया।
वहीं औजारों का इस्तेमाल सुरंग खोदने में किया गया था। बैरक के अंदर की गतिविधियों को पूरी तरह से गुप्त रखा जाता था। सुरंग खोदने के दौरान निकलने वाली मिट्टी को साफ कर दिया जाता था। बैरक में पानी की तेज आवाज के बीच सुरंग खोदने की आवाज दबाई जाती थी। यही नहीं, जेल ब्रेक के गुप्त मिशन को अंजाम देने के लिए हवारा, भ्यौरा, तारा सभी कोड में बात करते थे।
वेट लिफ्टिंग रॉड का किया था प्रयोग
बचाव पक्ष के वकील रबिंद्र पंडित ने बताया कि अभियोजन पक्ष कोर्ट में केस को प्रूफ नहीं कर सका। पुलिस की जांच में कई खामियां थीं। इसे छिपाने के लिए पुलिस ने झूठे केस दर्ज किए, जो कि अदालत में टिक नहीं सके। पुलिस ने फर्जी कहानियों के दम पर फर्जी केस बनाए थे।
अदालत ने 123 पेज के फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष केस में पूरी तरह से आपराधिक साजिश को साबित करने में नाकाम रहा है। खासकर जेल ब्रेक में जेल अधिकारियों का ही रोल साबित नहीं हो सका। वहीं जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा के मामले में कोई ठोस बहस नहीं हुई।
केस प्रूफ नहीं कर सके : रबिंद्र पंडित
बचाव पक्ष के वकील रबिंद्र पंडित ने बताया कि अभियोजन पक्ष कोर्ट में केस को प्रूफ नहीं कर सका। उनके अनुसार केस में पुलिस की जांच में कई खामियां थीं। इसे छिपाने के लिए पुलिस ने झूठे केस दर्ज किए, जो कि अदालत में टिक नहीं सके। पुलिस ने फर्जी कहानियों के दम पर फर्जी केस बनाए थे।
मामले में किसकी क्या भूमिका
बलजीत कौर
केस की एकमात्र महिला आरोपी बलजीत कौर थी। हालांकि उसकी ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी, उस पर और उसके पति लखविंदर सिंह पर फरार आरोपियों को दो मोबाइल और सिम कार्ड मुहैया करवाने का आरोप था। आरोप के अनुसार ये मोबाइल फोन बलजीत कौर ने खरीदे थे और लखविंदर सिंह के जरिए जेल से फरार हुए आरोपियों तक पहुंचाया था। साथ ही बलजीत कौर पर आरोप था कि आरोपियों के फरार होने के बाद वह उनके साथ थी और उन्हें मोरिंडा भी ले गई थी।
नारायण सिंह चौरा
केस में मुख्य आरोपी नारायण सिंह चौरा पर बुड़ैल जेल से फरार होने वाले आरोपियों से नियमित तौर पर मिलने जाने का आरोप था। पुलिस के अनुसार चौरा उन्हें कपड़े, खाने-पीने के सामान के अलावा अन्य सामान उपलब्ध करवाता था। पुलिस के अनुसार चौरा आरोपियों को पगड़ी देता था, जिसका इस्तेमाल आरोपियों ने जेल से फरार होने में किया। साथ ही चौरा पर तार पर चेन फेंककर जेल की बिजली गुल करने का भी आरोप था। केस में पीओ घोषित गुरविंदर सिंह उर्फ गोल्डी पर जेल में हवारा को रुपये पहुंचाने का आरोप था। पाकिस्तानी जासूस आबिद महमूद पर हवारा को जेल में मिलने और आतंकवाद शुरू करने पर बातचीत का आरोप था। इसी तरह के आरोप अन्य कैदियों सुबेग, नंद सिंह और शेर सिंह पर भी थे।
गुरनाम सिंह: केस में आरोप के अनुसार गुरनाम सिंह पर फरार आरोपियों को कार उपलब्ध करवाने का आरोप था। साथ ही आरोपियों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचवाने में मदद करने का आरोप था।
हाईकोर्ट में करेंगे अपील
अभियोजन पक्ष आपराधिक साजिश साबित करने में रहा नाकाम
11 साल पहले हुए जेल ब्रेक में मंगलवार को फैसला आ ही गया। अदालत ने 123 पेज के फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष केस में पूरी तरह से आपराधिक साजिश को साबित करने में नाकाम रहा है। खासकर जेल ब्रेक में जेल अधिकारियों का ही रोल साबित नहीं हो सका। उनके खिलाफ अभियोजन पक्ष अपराध साबित ही नहीं कर सका। \
वहीं जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा के मामले में कोई ठोस बहस नहीं हुई। हालांकि केस में उनकी दोबारा गिरफ्तारी उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 224 के तहत अपराध साबित करने में पर्याप्त थी।
पुलिस ने पेश किए झूठे केस : तरमिंदर
बचाव पक्ष के वकील तरमिंदर सिंह के अनुसार पुलिस ने केस में कई झूठे तथ्य पेश किए थे। इसके आधार पर पुलिस ने जेल अधिकारियों को आरोपी बनाया। जेल में गश्त करने वाले स्टाफ के अलावा कई अन्य जरूरी लोगों को नजर अंदाज किया, जबकि वे केस में गवाह नहीं बनाए गए।
वहीं कोर्ट में केस की अंतिम सुनवाइयों के दौरान पेश होने वाले वार्डर राम मेहर और हीरानंद मिश्रा ने माना था कि उन्होंने कथित संदिग्ध सूचनाएं अपने अफसरों तक नहीं पहुंचाई। तरमिंदर सिंह ने पुलिस की ओर से दिखाई गई रिकवरी को प्लांटेड बताया। वहीं जेल मैनुअल के मुताबिक नए जेलर से जेल ब्रेक की जांच करवानी चाहिए थी जो नहीं करवाई गई।
पुलिस ने मुझ पर बनाया झूठा केस : चौरा
यूटी पुलिस ने बुड़ैल जेल ब्रेक में अहम मददगार के तौर पर नारायण सिंह चौरा को आरोपी बनाया था। चौरा पर जेल में हवारा तक मोबाइल पहुंचाने, जेल ब्रेक वाली रात बिजली गुल करने के लिए तार फेंकने और जेल ब्रेक की साजिश रचने का आरोप था। मंगलवार को कोर्ट रूम के बाहर चौरा ने बताया कि पुलिस ने उस पर झूठा केस बनाया था।
जेल में आमतौर पर रोजाना बिजली गुल हुआ करती थी। पुलिस ने केस में जेनरेटर लॉग बुक में 20 तारीख को 21 किया और 7:30 बजे के समय को कागजों में 9 बजे कर दिया। वहीं मोबाइल की रिकवरी भी फर्जी दिखाई। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी तक कागजों में देरी से दिखाई।
तारा के खिलाफ ट्रायल जल्द
बुड़ैल जेल प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की कोर्ट को एक पत्र लिखा गया था। इसमें उन्होंने तारा के खिलाफ बेअंत सिंह हत्याकांड का ट्रायल शुरू करने की अपील की गई थी। इस पर अदालत ने दिल्ली सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सीबीआई ने भी ट्रायल पर सहमति दिखाई।
इसके बाद अदालत ने जेल प्रशासन को पत्र भेजा है। इसके तहत तारा को 20 अगस्त को पेश करने के लिए नोटिस किया है। वहीं जेल ब्रेक केस का भी ट्रायल जल्द शुरू हो सकता है। यूटी पुलिस के ऑपरेशन सेल को अदालत में चालान पेश करना है। इसके बाद सीजेएम कोर्ट में उसके खिलाफ आरोप तय कर संबंधित केस का ट्रायल शुरू होगा।
बेअंत मर्डर केस में 6 को हो चुकी है सजा
पंजाब के सीएम बेअंत सिंह की हत्या मामले में 27 जुलाई 2007 को कुल 9 आरोपियों में से 6 को तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवि कुमार सोंधी ने दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। सजा पाने वालों में जगतार सिंह हवारा, शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह, नसीब सिंह, बलवंत सिंह व गुरमीत सिंह शामिल थे।
वहीं नसीब सिंह को एक्सप्लोजिव एक्ट की धारा-5 में दोषी ठहराया था। केस में नवजोत सिंह को बरी कर दिया गया था। वहीं वर्ष 2004 में बुड़ैल जेल ब्रेक कर फरार हुए परमजीत सिंह भ्यौरा को बाद में सजा हुई थी।