दबंगों के जुल्म का शिकार कमजोर तबका, रोजाना दो से अधिक का उत्पीड़न, 7.9 प्रतिशत बढ़े अपराध
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हरियाणा में लगातार कमजोर तबका दबंगों के जुल्म का शिकार होता जा रहा है। रोजाना से अधिक कमजोर तबके के लोग दबंगों के अत्याचार झेल रहे हैं। आलम यह है कि पिछले तीन वर्षों में कमजोर वर्गों के खिलाफ अपराध की दर बढ़ती जा रही है। पिछले साल के अंत तक ये मामले 7.9 प्रतिशत बढ़े हैं।
हालात यह है कि हरियाणा में हर दिन दो से अधिक कमजोर तबके से जुड़े लोगों पर अत्याचार हो रहा है। इसके साथ-साथ रोजाना 32 से ज्यादा महिला उत्पीड़न के मामले भी सामने आ रहे हैं। बाल अपराध की दर जरूर 3.8 प्रतिशत कम हुई है। सोमवार को विभिन्न विधायकों द्वारा बढ़ते क्राइम के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछा गया था।
सरकार की ओर से गृहमंत्री अनिल विज ने इसका जवाब दिया। चूंकि एक ही जैसा सवाल पांच विधायकों का था। लिहाजा विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने सभी सवालों को आपस में मर्ज कर सभी विधायकों को इस पर एक-एक सप्लीमेंटरी प्रश्न पूछने को कहा। मगर इस पर विधायक नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि जब सभी के सवाल अलग-अलग हैं, तो उसे मर्ज क्यों किया गया।
इससे उन्हें एक-एक अतिरिक्त सप्लीमेंटरी प्रश्न पूछने को मिलता। लेकिन अब वे एक ही प्रश्न पूछ पाएंगे। इस पर कांग्रेसी विधायकों ने स्पीकर से जमकर बहस की। लेकिन भाजपा विधायकों ने स्पीकर के इस निर्णय को अच्छा और सदन का समय बचाने वाला कदम बताया। खैर, बहस के बाद गृहमंत्री ने अपनी रिपोर्ट सदन में पेश की। विज ने बताया कि प्रदेश में बच्चों के विरूद्ध अपराध कम भी हुआ है।
तीन वर्षों में तीन वर्ग के क्राइम का हाल
- वर्ष 2017 2018 2019
- कमजोर तबके के खिलाफ अपराध 804 1016 1097
- महिलाओं के विरूद्ध अपराध 9989 12691 13104
- बाल अपराध 3188 4022 3870
कमजोर तबके खिलाफ ऐसे रोकेंगे अपराध
अनुसूचित जाति/जनजाति व अन्य कमजोर तबकों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार अब गंभीरता से कदम उठाने वाली है। गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट के तहत जो केस दर्ज होंगे। उस पर एडीजीपी व एसपी स्तर के अधिकारी नजर रखेंगे। पुलिस मुख्यालय में एससी-एसटी सरंक्षण सेल बनाया है।
हर जिले में ऐसे मामलों के नोडल अफसर डीएसपी होंगे। शिकायत मिलने पर तथ्यों के आधार पर तुरंत कार्रवाई होगी। महिला थानों में इस तरह के मामलों के लिए एक महिला अधिकारी की भी नियुक्ति की गई है। पुलिस आयुक्तों व जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता, अभियुक्त व एफआईआर या अन्य किसी पुलिस कार्रवाई में जाति के नाम का उल्लेखन न करें। सभी समुदाय भाईचारे और सदभाव के माहौल में रहें, इसके लिए भी पुलिस जागरूक करेगी।