चौंकाने वाले हैं पंजाब में महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध के ये आंकड़े, 'अपनों' के मुकरने से आरोपी हो रहे बरी
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पंजाब में पुख्ता कानून-व्यवस्था के दावे के बावजूद बीते चार साल में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के 8329 मामले दर्ज किए गए। जिसमें लुधियाना जिले में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ सबसे अधिक वारदात हुईं हैं।
कामकाज के ढुलमुल तरीके का आलम यह है कि केवल 4856 केसों को ही अदालतों तक पहुंचाया जा सका है, जबकि 2016 से पहले के 423 लंबित मामलों के अलावा दिसंबर, 2020 तक 4151 मामले लंबित हैं।
दूसरी ओर, जितने मामले अदालतों तक पहुंचे, उनमें से 3364 मामलों में गवाहों के मुकरने, बयान में अंतर होने, संदेह के आधार पर, पुलिस जांच में कमियों के कारण और पर्याप्त सबूतों के अभाव में आरोपी बरी हो गए। कुछ केस ऐसे भी रहे, जिनको हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया।
कई मामलों में पीड़ित और उनके परिजन ही अदालत में आरोपियों के खिलाफ गवाही से मुकर गए। इस तरह केवल 1458 मामलों में अपराधियों को ही सजा मिल सकी।
पंजाब सरकार के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन एंड लिटिगेशन ने 2016 से दिसंबर 2020 तक राज्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के आंकड़े जारी कर स्थिति की जानकारी दी है। इनके अनुसार, बीते चार साल में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में लुधियाना जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां कुल 1104 केस दर्ज हुए हैं।
इनमें से 451 केसों में अदालती फैसले आ सके हैं, जबकि कुल 908 केसों में जांच जारी है। जिन 451 केसों में अदालतों ने फैसले सुनाए हैं, उनमें भी 189 में अपराधियों को सजा हुई है, जबकि 252 मामलों में आरोपी बरी हो गए।
राज्य के अन्य जिलों में बीते चार साल के दौरान अमृतसर में दर्ज 605 में से 337 मामलों में अदालत का फैसला आया और 200 में आरोपी बरी हो गए। बरनाला में दर्ज हुए 193 केसों में से 164 में अदालत के फैसले आए लेकिन यहां भी केवल 38 मामलों में सजा हुई और 126 में आरोपी छूट गए।
बठिंडा में चार साल में दर्ज 514 में से 217 केसों में अदालती फैसले के अनुसार 165 केसों में आरोपी गवाहों के मुकर जाने के कारण बरी हो गए। फरीदकोट में दर्ज 142 में से 111 केस अदालत तक पहुंचे लेकिन 90 फीसदी मामलों में पीड़ितों के परिजनों के ही अदालत में मुकर जाने के कारण आरोपी बरी हो गए।
फतेहगढ़ साहिब में दर्ज 410 मामलों में से 211 के आए फैसलों में 140 मामलों में आरोपी बरी हो गए और केवल 53 केसों में ही सजा हुई। फाजिल्का में भी 193 में से 137 मामले अदालतों तक पहुंचे लेकिन इनमें 110 केसों में आरोपी बरी हो गए।
फिरोजपुर में 297 केसों में से 209 अदालत में पहुंचे लेकिन 130 में पीड़ित और उनके परिजन ही अदालत में बयान से मुकर गए, जबकि 78 केसों में आरोपियों को पर्याप्त सबूत न होने और जांच अधिकारी द्वारा सही तरीके से जांच न करने के कारण लाभ मिल गया।
गुरदासपुर में 192 मामलों में 64 केसों में गवाह मुकरे
गुरदासपुर में दर्ज 430 केसों में से 192 मामलों में अदालती सुनवाई के दौरान 64 केसों में गवाह मुकर गए। सात केस अदालतों ने रद्द कर दिए। कुल 137 केसों में आरोपी बरी हो गए। होशियारपुर में भी 452 केसों में से 261 अदालतों में पहुंचे, जिनमें से 182 मामलों में आरोपी बरी हो गए।
जालंधर में 390 केसों में से 135 में दिसंबर, 2020 तक अदालती फैसले आए लेकिन इनमें 97 केसों में पीड़ित और गवाहों के मुकर जाने के कारण आरोपी रिहा हो गए। कपूरथला जिले में भी अदालत पहुंचे 127 केसों में से 95 केसों में आरोपी बरी हो गए।