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हाईकोर्ट का फरमान- एसिड अटैक पीड़ितों को 15 दिन के भीतर मिले एक लाख अंतरिम मुआवजा
Thu, 09 Apr 2020 01:13 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 09 Apr 2020 01:13 PM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एसिड अटैक पीड़ितों को 15 दिन के अंदर अंतिम मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब के मुख्य सचिव व चडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया है कि वो सुप्रीम कोर्ट द्वारा लक्ष्मी बनाम यूनियन आफ इंडिया केस में दिए गए दिशा निर्देश के तहत एसिड अटैक विक्टिम को घटना के पंद्रह दिम के भीतर एक लाख का मुआवजा देना सुनिश्चित करे।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश को निर्देश दिया था कि एसिड अटैक की घटना सामने आने के तुरंत बाद विक्टिम को पंद्रह दिन के भीतर एक लाख का मुआवजा जारी किया जाए व सरकार अपने खर्चे पर उसको तुरंत बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध करवाए। इसके अलावा दो महीने के भीतर अन्य मुआवजा राशि का भुगतान भी किया जाए।
हाईकोर्ट ने यह आदेश तेजाब हमले के एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए। इस मामले में बेंच ने सरकार को पिछली सुनवाई पर विक्टिम को मुआवजा के तीन लाख रुपये जारी करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने बेंच को बताया कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद भी विक्टिम को अभी तक किसी भी तरह की कोई वित्तीय सहायता या इलाज की सुविधा नही दी गई।
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अधिकारी इस मामले को सामान्य मामले की तरह लेकर लापरवाही से काम कर रहे हैं। बेंच ने इस पर सख्त रूप अपानते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में साफ कर चुका है विक्टिम को सरकार की तरफ से तुरंत निशुल्क इलाज व पंद्रह दिन के भीतर एक लाख का मुआवजा दिया जाए तो सरकार इसकी पालना क्यों नहीं कर रही। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वो दो सप्ताह के भीतर विक्टिम को मुआवजा देकर उसका निशुल्क इलाज निश्चित करे।
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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश को निर्देश दिया था कि एसिड अटैक की घटना सामने आने के तुरंत बाद विक्टिम को पंद्रह दिन के भीतर एक लाख का मुआवजा जारी किया जाए व सरकार अपने खर्चे पर उसको तुरंत बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध करवाए। इसके अलावा दो महीने के भीतर अन्य मुआवजा राशि का भुगतान भी किया जाए।
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हाईकोर्ट ने यह आदेश तेजाब हमले के एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए। इस मामले में बेंच ने सरकार को पिछली सुनवाई पर विक्टिम को मुआवजा के तीन लाख रुपये जारी करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने बेंच को बताया कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद भी विक्टिम को अभी तक किसी भी तरह की कोई वित्तीय सहायता या इलाज की सुविधा नही दी गई।
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अधिकारी इस मामले को सामान्य मामले की तरह लेकर लापरवाही से काम कर रहे हैं। बेंच ने इस पर सख्त रूप अपानते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में साफ कर चुका है विक्टिम को सरकार की तरफ से तुरंत निशुल्क इलाज व पंद्रह दिन के भीतर एक लाख का मुआवजा दिया जाए तो सरकार इसकी पालना क्यों नहीं कर रही। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वो दो सप्ताह के भीतर विक्टिम को मुआवजा देकर उसका निशुल्क इलाज निश्चित करे।