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कोरोनाः हरियाणा में बड़े संकट की आहट, सब्जी उत्पादकों-पौध लगाने वाले किसानों को लाखों की चपत
Thu, 26 Mar 2020 01:38 PM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 26 Mar 2020 01:38 PM IST
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हरियाणा में सब्जी उत्पादकों, सब्जियों की पौध उगाने वाले किसानों को कोरोना महामारी ने बड़ी चपत लगाई है। सब्जियों के मार्केट न पहुंचने और किसानों की पौध न बिकने से लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। स्थानीय मंडियों में किसानों को बहुत ही कम दाम मिल रहे हैं, जबकि दिल्ली, सहारनपुर व अंबाला मंडी में सब्जियां नहीं पहुंच पा रहीं। आढ़ती भी किसानों से कम ही सब्जी खरीद रहे हैं, चूंकि मार्केट में थोक व रिटेल के ग्राहक ही नहीं हैं। अधिकतर सब्जी विक्रेताओं की दुकानें बंद हो चुकी हैं। जिससे आने वाले दिनों में सब्जियों के खेतों में ही खराब होने के आसार बन रहे हैं।
सब्जी की पौध लगाने वाले किसानों की नर्सरियां भरी पड़ी हैं, लेकिन पौध खरीदने के लिए पंजाब, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से किसान उपलब्ध नहीं है। कुछ बड़े किसानों ने 15-16 एकड़ में पौध लगाई है। जबकि छोटे किसानों ने 2 से 5 एकड़ में पौध उगाई हुई है। शाहबाद-मारकंडा निवासी किसान हरबीर तूर ने बताया कि उन्होंने दाढ़लू गांव में 15 से 20 एकड़ में टमाटर, घीया, खीरा व मिर्च की पौध लगाई थी। 15 से 20 लाख की पौध अभी खड़ी है। किसान खरीद के लिए नहीं आ पा रहा। टमाटर की पौध लगाने का समय मार्च में ही होता है। अप्रैल में यह नहीं लग पाएगी।
अभी उत्तम समय था, लेकिन कोरोना की वजह से बंद लागू हो गया। बारिश की वजह से सब्जी लगाने में किसान पहले ही लेट हो चुके थे। वह आशंकित हैं कि उनकी लाखों की पौध नर्सरी में ही खराब हो जाएगी। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी व प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि सरकार किसानों की सब्जियों को मंडी तक पहुंचाना व उचित दाम दिलाना भी सुनिश्चित करे। किसान पर कोरोना की मार पड़ी है। सब्जी उत्पादक किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए।
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सब्जी की पौध लगाने वाले किसानों की नर्सरियां भरी पड़ी हैं, लेकिन पौध खरीदने के लिए पंजाब, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से किसान उपलब्ध नहीं है। कुछ बड़े किसानों ने 15-16 एकड़ में पौध लगाई है। जबकि छोटे किसानों ने 2 से 5 एकड़ में पौध उगाई हुई है। शाहबाद-मारकंडा निवासी किसान हरबीर तूर ने बताया कि उन्होंने दाढ़लू गांव में 15 से 20 एकड़ में टमाटर, घीया, खीरा व मिर्च की पौध लगाई थी। 15 से 20 लाख की पौध अभी खड़ी है। किसान खरीद के लिए नहीं आ पा रहा। टमाटर की पौध लगाने का समय मार्च में ही होता है। अप्रैल में यह नहीं लग पाएगी।
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अभी उत्तम समय था, लेकिन कोरोना की वजह से बंद लागू हो गया। बारिश की वजह से सब्जी लगाने में किसान पहले ही लेट हो चुके थे। वह आशंकित हैं कि उनकी लाखों की पौध नर्सरी में ही खराब हो जाएगी। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी व प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि सरकार किसानों की सब्जियों को मंडी तक पहुंचाना व उचित दाम दिलाना भी सुनिश्चित करे। किसान पर कोरोना की मार पड़ी है। सब्जी उत्पादक किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए।
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सब्जी न लगने से बढ़ेगा संकट
कोरोना के कारण अगर सब्जी नहीं लगी तो आने वाले दिनों में बड़ा संकट उत्पन्न होने वाला है। क्योंकि सब्जी लगेगी ही नहीं तो मार्केट में कैसे आएगी। जिससे दो-तीन महीने बाद सब्जियों की बड़ी किल्लत हो सकती है। इससे महंगाई भी बढ़ेगी और सब्जियां महंगे दामों पर मिलेंगी।
मंडी में दामों में भारी गिरावट
जीटी रोड बेल्ट सब्जी उत्पादन के लिए खास तौर पर जानी जाती है। दिल्ली से सटे क्षेत्र में भी खेती होती है। दिल्ली व उत्तरप्रदेश की मंडियों में किसानों की एंट्री भी बंद है। इससे स्थानीय मंडियों में किसानों को सब्जी का बहुत कम दाम मिल रहा है। गोभी पहले 10 से 15 रुपये में बिक रही थी। अब 5-6 रुपये प्रति किलोग्राम रेट मिल रहा है।
टमाटर के रेट आढ़ती अब 30 की जगह 20 रुपये दे रहे हैं। घीया 12-15 रुपये में बिक रहा था, अब किसान को 7-8 रुपये रेट मिल रहा है। मूली, गाजर, धनिया व मटर के रेट भी गिर गए हैं। मशरूम उत्पादकों को भी काफी मार पड़ी है। लाखों रुपये का मशरूम खराब होने की कगार पर है।
मंडी में दामों में भारी गिरावट
जीटी रोड बेल्ट सब्जी उत्पादन के लिए खास तौर पर जानी जाती है। दिल्ली से सटे क्षेत्र में भी खेती होती है। दिल्ली व उत्तरप्रदेश की मंडियों में किसानों की एंट्री भी बंद है। इससे स्थानीय मंडियों में किसानों को सब्जी का बहुत कम दाम मिल रहा है। गोभी पहले 10 से 15 रुपये में बिक रही थी। अब 5-6 रुपये प्रति किलोग्राम रेट मिल रहा है।
टमाटर के रेट आढ़ती अब 30 की जगह 20 रुपये दे रहे हैं। घीया 12-15 रुपये में बिक रहा था, अब किसान को 7-8 रुपये रेट मिल रहा है। मूली, गाजर, धनिया व मटर के रेट भी गिर गए हैं। मशरूम उत्पादकों को भी काफी मार पड़ी है। लाखों रुपये का मशरूम खराब होने की कगार पर है।