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अब कोविड मरीजों का नहीं बदलेगा शव
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चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के मरीजों के शव बदले जाने के बढ़ते मामलों का समाधान निकाल लिया है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कौर कंग ने बताया कि अब पारदर्शी बॉडी पैकिंग की व्यवस्था कर दी गई है। इसमें चेहरे को पारदर्शी रखा गया है, ताकि परिजन शव को पहचान सकें। इसमें देरी से भी शव आने पर परिजन आसानी से पहचान सकेंगे। वहीं, पैकिंग को दोबारा खोलने की नौबत भी नहीं आएगी।
शव बदलने की आती थी शिकायत
संक्रमण के खतरे के चलते परिजनों को अस्पताल से दूर रखा जाता है। गंभीर मरीज की मौत के बाद परिजनों को सूचना दी जाती है। इसके बाद परिजन अस्पताल आकर कागजी प्रक्रिया पूरी करते हैं। वहीं, अगर समय से अस्पताल आ जाते हैं तो शव की शिनाख्त भी कर लेते हैं। कोविड-19 मरीज की मौत के बाद शव को डबल पैकिंग में रखा जाता है। सिर से लेकर पांव तक दोहरी पैकिंग में बंद करके सील कर दिया जाता है। सील पैक होने के कारण शहर में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव बदलने का आरोप लगाया है।
शव बंद होने के बाद दोबारा खोलने की नहीं है अनुमति
कोविड-19 से बचाव के लिए बनाए गए मानकों में पॉजिटिव मरीज की मौत के बाद उसके शव को डबल पैकिंग में सील किया जाता है। ऐसे में अगर परिजन इस प्रक्रिया के पहले अस्पताल न पहुंचे तो वे अपने मरीज का अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाते हैं। क्योंकि उस सील को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं है। परिजनों की इस समस्या का समाधान करने के लिए नए प्रकार के पारदर्शी बॉडी पैकिंग की व्यवस्था बनाई गई है।
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शव बदलने की आती थी शिकायत
संक्रमण के खतरे के चलते परिजनों को अस्पताल से दूर रखा जाता है। गंभीर मरीज की मौत के बाद परिजनों को सूचना दी जाती है। इसके बाद परिजन अस्पताल आकर कागजी प्रक्रिया पूरी करते हैं। वहीं, अगर समय से अस्पताल आ जाते हैं तो शव की शिनाख्त भी कर लेते हैं। कोविड-19 मरीज की मौत के बाद शव को डबल पैकिंग में रखा जाता है। सिर से लेकर पांव तक दोहरी पैकिंग में बंद करके सील कर दिया जाता है। सील पैक होने के कारण शहर में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव बदलने का आरोप लगाया है।
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शव बंद होने के बाद दोबारा खोलने की नहीं है अनुमति
कोविड-19 से बचाव के लिए बनाए गए मानकों में पॉजिटिव मरीज की मौत के बाद उसके शव को डबल पैकिंग में सील किया जाता है। ऐसे में अगर परिजन इस प्रक्रिया के पहले अस्पताल न पहुंचे तो वे अपने मरीज का अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाते हैं। क्योंकि उस सील को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं है। परिजनों की इस समस्या का समाधान करने के लिए नए प्रकार के पारदर्शी बॉडी पैकिंग की व्यवस्था बनाई गई है।
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