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हादसे में घायल को मेडिक्लेम न देने पर उपभोक्ता फोरम सख्त
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Jan 2016 05:08 PM IST
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मेडिक्लेम पॉलिसी होने के बाद भी बीमा कंपनी ने महिला को उसके टूटे दांतों के इलाज में खर्च राशि का क्लेम नहीं दिया। बल्कि कहा कि महिला इलाज के लिए जिस अस्पताल में गई, वह लोकल अथॉरिटी से रजिस्टर्ड नहीं था।
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नेशनल मेडिक्लेम पॉलिसी के नियमों के अनुसार इसे रद्द किया गया है। इस पर उपभोक्ता फोरम ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि हादसे में चोट के बाद घायल तुरंत नजदीक के अस्पताल में मेडिकल सुविधा के लिए जाएगा। ऐसा नहीं होगा कि मरीज ऐसा अस्पताल खोजे जो मेडिकल पॉलिसी की टर्म एंड कंडीशन पूरी करता हो।
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फोरम ने निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को इलाज में हुए खर्च एक लाख छह हजार 443 रुपये अदा करे। साथ ही 20 हजार रुपये मुआवजा और सात हजार रुपये मुकदमा खर्च दे।
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यह था मामला
निधि मित्तल निवासी सेक्टर-6 पंचकूला ने सेक्टर-26 डी मध्यमार्ग चंडीगढ़ स्थित नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और लुधियाना स्थित मेसर्स पार्क मेडिक्लेम टीपीए प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दी थी। निधि मित्तल ने फोरम को बताया था कि उनके पति विनोद मित्तल ने 17 जनवरी 2014 को एक मेडिक्लेम पॉलिसी ली। इसकी अवधि 17 जनवरी 2014 से 16 जनवरी 2015 तक थी। पॉलिसी पूरे परिवार की थी। पांच लाख रुपये की बीमा पॉलिसी के लिए उन्होंने 32 हजार 727 रुपये प्रीमियम जमा करवाया था।
13 अगस्त 2014 को वह फिसल गईं, उनके चेहरे पर गंभीर चोट आई और उनके जबड़े के छह दांत टूट गए। वह तुरंत पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित डॉ. संजय कालरा एडवांस डेंटल स्पेशियलिटी क्लीनिक में भर्ती हो गईं। इस संबंध में उन्होंने ई-मेल के माध्यम से 14 अगस्त को बीमा कंपनी को सूचित कर दिया। उनके इलाज पर एक लाख छह हजार 443 रुपये खर्च हुए। बीमा क्लेम के लिए उन्होंने बीमा कंपनी को आवश्यक दस्तावेज मुहैया करवाए, लेकिन उन्हें क्लेम नहीं दिया गया।