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‘बैटल कैजुअल्टी वेलफेयर फंड’ की आड़ में भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिश, पढ़ें मामला

Wed, 09 Sep 2020 11:54 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 09 Sep 2020 11:54 AM IST
सार

  • सैन्य अफसरों ने कहा, इस फंड से नहीं खरीदे जा रहे उपकरण और हथियार
  • फंड का इस्तेमाल युद्ध में घायलों और शहीदों के परिजनों की मदद में होता है
  • सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही जानकारी फर्जी और बिल्कुल बेबुनियाद

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Conspiracy to Discredit the Indian Army Under Cover of Battle Casualty Welfare Fund
सरहद पर तैनात भारतीय सेना का जवान - फोटो : PTI

विस्तार

देश विरोधी ताकतें लगातार भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिशों में जुटी हुई हैं। इसके लिए ये विरोधी तत्व सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म का सहारा ले रहे हैं। मकसद है किसी भी तरह भारतीय सेना की मजबूत छवि को धूमिल किया जाए। ऐसे ही लोगों ने अब भारतीय सेना को दो और आरोपों से घेरने की कोशिश की है। जिसका जवाब सेना की ओर से भी दिया गया है।
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सेना के एक आला अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सेना की इमेज खराब करने वाली कुछ फर्जी जानकारियां तेजी से वायरल की जा रही हैं। ये न तो तथ्यपरक हैं और न ही सही। फर्जी वायरल में कहा गया है कि सशस्त्र बलों के युद्ध हताहत कल्याण कोष के लिए लोगों से मिलने वाले दान (बैटल कैजुअल्टी वेलफेयर फंड) का इस्तेमाल सेना हथियारों और उपकरणों की खरीद के लिए कर रही है।
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उन्होंने साफ किया है कि बैटल कैजुअल्टी वेलफेयर फंड उत्साही नागरिकों की इच्छा के अनुरूप ही बनाया गया था। लोग अपनी इच्छा से इस फंड में मदद स्वरूप राशि जमा करवाते हैं। इस फंड का इस्तेमाल युद्ध में घायल व शहीद होने वाले जवानों व अफसरों के परिजनों की मदद के लिए किया जाता है। इससे सेना के लिए हथियारों व उपकरणों की खरीद नहीं की जाती है।
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सीएसडी कैंटीन का कोटा भी कम नहीं होगा

कुछ असामाजिक तत्वों ने सोशल मीडिया पर यह भी फर्जी वायरल कर दिया कि सैनिक, पूर्व सैनिक व अन्य लाभार्थियों के लिए सीएसडी कैंटीन सुविधा के अंतर्गत उनकी हकदारी का कोटा भी कम कर दिया गया है। अर्थात उनके सामान खरीद की सीमा अब और कम हो गई है। सेना ने साफ किया है कि सीएसडी कैंटीन के लाभार्थियों की हकदारी कम नहीं की गई है। जिस कोटे के हिसाब से वे पहले सामान लेते थे, वही कोटा अब भी लागू है।

इस समय देश ही नहीं दुनिया भी भारतीय सेना का लोहा मान रही है। इसीलिए राष्ट्रविरोधी ताकतें तकलीफ में हैं और इस तरह की ओछी हरकतों से सेना को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।
- केएस दत्त, रक्षा विशेषज्ञ

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