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सिजाफ्रेनिया क्या है? जानना चाहते हैं तो ये पढ़ें

Wed, 08 Jan 2014 01:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/दीपक शाही
अमर उजाला ब्यूरो/दीपक शाही Updated Wed, 08 Jan 2014 01:22 PM IST
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Consider then the case there is suspicion and irritability
सिजोफ्रेनिया के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जनरल अस्पताल सेक्टर-6 में हर माह 30-35 मरीज आते हैं।
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यह एक मानसिक रोग है और इससे सोचने, अनुभव करने व कार्य व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है। अपने देश में एक करोड़ से ज्यादा व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में हैं।

मनोरोग चिकित्सक के अनुसार इस बीमारी का मुख्य कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन मेडिकल साइंस की स्टडी के अनुसार गर्भावस्था या जन्म के समय जेनेटिक या मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक द्रव्यों के बदलाव से सिजोफ्रेनिया की संभावना रहती है और इसका असर 18-25 वर्ष की आयु के बीच दिखने लगता है।

आंकड़ों के अनुसार महिला और पुरुष समान रूप से इस बीमारी के शिकार हैं, लेकिन दोनों में इस बीमारी के शिकार होने की आयु सीमा अलग-अलग है।

महिलाओं में 15-25 वर्ष और पुरुषों में 25-35 वर्ष की आयु में यह बीमारी होती है, लेकिन दो प्रतिशत व्यक्तियों में इस बीमारी का प्रभाव बचपन से ही विकसित होने लगता है।
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प्रारंभिक संकेत
स्वयं के स्वास्थ्य, व्यक्ति में परिवर्तन, सोने के ढंग में परिवर्तन होना, स्कूल या कार्यस्थल पर जाना अच्छा नहीं लगना, अस्वाभाविक उच्चारण करना, परिस्थिति के विरुद्ध व्यवहार आदि।
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लक्षण
- अपने जीवन साथी के चरित्र पर शक करना, काल्पनिक व्यक्तियों से बातें करना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना और जल्द उत्तेजित हो जाना।

- ऐसा लगना कि कोई आपके खिलाफ षडयंत्र रच रहा है। बेतुके शरीर अनुभव का होना। असामान्य और कष्टदायक आवाज सुनाई देना।

- अधिक समय तक अकेले रहना पसंद करना, अपने पर दबाव महसूस करना, सामान्य रूप से अधिक  व्याकुल महसूस करना, खुद की महानता का अनुभव होना। ऐसा लगना जैसे आप दूसरों से महत्वपूर्ण हैं।


- नींद में दिक्कत आना या ज्यादा नींद का आना। नींद में विदाई देने का भ्रम होना, स्पर्श या स्वाद का अनुभव होना।

उपचार
इस बीमारी का उपचार दो तरीके से किया जा सकता है। एक तो पीड़ित व्यक्ति को दवा खिलाकर, दूसरा सीधे मस्तिष्क के रसायनों को संतुलित करना। इससे भ्रम, चिंता, शंका, मन का विचलन और अन्य लक्षण नियंत्रित हो जाते हैं।
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