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रातभर बिना पंखा, बिजली और एसी के विधानसभा में बैठे रहे कांग्रेसी विधायक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 13 Sep 2016 11:54 AM IST
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अंधेरे में बिना पंखे और एसी के धरने पर बैठे 30 विधायक
- फोटो : Amar ujala
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अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने का मौका न मिलने के विरोध में कांग्रेस ने शाम करीब छह बजे विधानसभा सदन में धरना शुरू कर दिया। यह सारी रात चला। विधानसभा में लाइटें स्विच ऑफ कर दिए जाने के कारण कांग्रेसी अंधेरे में बिना एसी और पंखे के ही धरने पर बैठे रहे।
विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया था। सोमवार शाम उस पर बहस शुरू हुई, लेकिन अकालियों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद स्पीकर चरनजीत सिंह अटवाल ने बहस खत्म कर वोटिंग कराई और अविश्वास प्रस्ताव गिर गया।
शाम करीब छह बजे इसके विरोध में सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी समेत कांग्रेस के लगभग तीस विधायक सदन के अंदर ही वेल में धरने पर बैठ गए। कुछ सीनियर और महिला विधायक चले गए थे। कुछ समय बाद विधानसभा सिक्योरिटी ने लाइटें स्विच ऑफ कर दीं।
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विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया था। सोमवार शाम उस पर बहस शुरू हुई, लेकिन अकालियों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद स्पीकर चरनजीत सिंह अटवाल ने बहस खत्म कर वोटिंग कराई और अविश्वास प्रस्ताव गिर गया।
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शाम करीब छह बजे इसके विरोध में सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी समेत कांग्रेस के लगभग तीस विधायक सदन के अंदर ही वेल में धरने पर बैठ गए। कुछ सीनियर और महिला विधायक चले गए थे। कुछ समय बाद विधानसभा सिक्योरिटी ने लाइटें स्विच ऑफ कर दीं।
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विधायक अंधेरे में बैठे रहे
विधानसभा सदन में धरना शुरू कर दिया
- फोटो : Amar ujala
सदन के अंदर पंखा, एसी आदि भी नहीं चल रहा था और विधायक अंधेरे में बैठे रहे। रात करीब पौने दस बजे लाइटें और एसी को चालू कर दिया गया।
उनके खाने और पानी पीने का इंतजाम सीएलपी ऑफिस में था, जहां आकर खाना खाकर वे वापस चले जाते थे। कांग्रेस ने पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा में भी रात भर धरना दिया था।
एक सितंबर को विधानसभा सत्र की रणनीति तय करने को कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में बैठक हुई थी, जिसमें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने ऐसा करने का सुझाव भी दिया था। कांग्रेस ने पहले से मंगलवार को रात भर धरना देने की तैयारी भी कर ली थी, लेकिन बकरीद की छुट्टी मंगलवार होने के कारण पार्टी को लगातार दो दिन नहीं मिल रहे थे। जिसके चलते पहले रात भर धरने का प्रोग्राम कैंसिल कर दिया गया था। लेकिन सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव के बाद फिर एकाएक फैसला ले लिया गया।
उनके खाने और पानी पीने का इंतजाम सीएलपी ऑफिस में था, जहां आकर खाना खाकर वे वापस चले जाते थे। कांग्रेस ने पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा में भी रात भर धरना दिया था।
एक सितंबर को विधानसभा सत्र की रणनीति तय करने को कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में बैठक हुई थी, जिसमें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने ऐसा करने का सुझाव भी दिया था। कांग्रेस ने पहले से मंगलवार को रात भर धरना देने की तैयारी भी कर ली थी, लेकिन बकरीद की छुट्टी मंगलवार होने के कारण पार्टी को लगातार दो दिन नहीं मिल रहे थे। जिसके चलते पहले रात भर धरने का प्रोग्राम कैंसिल कर दिया गया था। लेकिन सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव के बाद फिर एकाएक फैसला ले लिया गया।
बोलने का मौका न देने गैर-लोकतांत्रिक : कैप्टन
captain amrinder singh
- फोटो : amar ujala
प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा सदन में रात को धरने पर बैठने वाले पार्टी विधायकों का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलने की इजाजत न देना पूरी तरह गैर-लोकतांत्रिक है। राज्य में कानून-व्यवस्था का बुरा हाल है, सरकार पूरी तरह कंट्रोल खो बैठी है। ऐसे हालातों में विधानसभा ही ऐसे मसलों पर चर्चा के लिए सही फोरम था।
कैप्टन ने धरना खत्म करने को लाइट स्विच ऑफ करने और एसी बंद करने की निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे भाग नहीं सकती, उसे विपक्ष का सामना करना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब के इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलने की इजाजत न देना पूरी तरह गैर-लोकतांत्रिक है। राज्य में कानून-व्यवस्था का बुरा हाल है, सरकार पूरी तरह कंट्रोल खो बैठी है। ऐसे हालातों में विधानसभा ही ऐसे मसलों पर चर्चा के लिए सही फोरम था।
कैप्टन ने धरना खत्म करने को लाइट स्विच ऑफ करने और एसी बंद करने की निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे भाग नहीं सकती, उसे विपक्ष का सामना करना ही पड़ेगा।