ढह गया पंजाब कांग्रेस का किला: पार्टी में अब सिर्फ कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरोधी ही बचे, भाजपा लिख रही 2024 की पटकथा
सुनील जाखड़ के बाद राजकुमार वेरका, बलबीर सिंह सिद्धू, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और सुंदर शाम अरोड़ा के भाजपा में शामिल होने से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस हाईकमान द्वारा पूर्व राज्य प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को हटाकर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को कमान सौंपना फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ है।
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विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद खुद को संभालने का प्रयास कर रही पंजाब कांग्रेस का बुरा वक्त थमने का नाम नहीं ले रहा। पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ के पार्टी छोड़ भाजपा में जाने के बाद शनिवार को तीसरा बड़ा झटका उस समय लगा जब चार पूर्व मंत्री और एक पूर्व विधायक समेत कई कांग्रेसी भाजपा में शामिल हो गए।
उधर, इस घटनाक्रम से भाजपा इतना उत्साहित हो गई है कि पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने एलान कर दिया है कि 2024 में भाजपा अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और अगर किसी दल को भाजपा से जुड़ना हो तो वह छोटे दल के रूप में साथ आ सकता है यानी भाजपा अब ‘बिग ब्रदर’ रह चुके शिअद को भी साथ आने पर छोटे भाई का ही दर्जा देगी। इस बीच पंजाब भाजपा के नेताओं ने रविवार को यह संकेत भी दिए हैं कि कुछ और कांग्रेसी जल्द ही भाजपा ज्वाइन करेंगे।
सुनील जाखड़ के बाद राजकुमार वेरका, बलबीर सिंह सिद्धू, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और सुंदर शाम अरोड़ा के भाजपा में शामिल होने से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस हाईकमान द्वारा पूर्व राज्य प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को हटाकर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को कमान सौंपना फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ है। दरअसल, राजा वड़िंग पार्टी के युवा चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर चल रहे हैं, जिससे सीनियर नेता खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे। गुरुवार को समाप्त हुई पार्टी कार्यकर्ताओं की कार्यशाला के बाद पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश चौधरी ने भी एलान किया है कि पार्टी में 50 फीसदी पदों पर युवा नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
पार्टी परिवर्तन की ताजा घटना के बाद अगर पंजाब कांग्रेस के दिग्गज चेहरों की गिनती की जाए तो विधानसभा चुनाव जीते पूर्व मंत्री और विधायकों के अलावा पार्टी में ऐसे नेता ही रह गए हैं, जिनकी पहचान कैप्टन अमरिंदर सिंह विरोधी नेताओं के रूप में होती रही है। ऐसे नेता कैप्टन के बराबर रुतबा चाहते हैं और कैप्टन के कांग्रेस छोड़ने के बाद से हाईकमान पर दबाव बनाने की स्थिति में आ चुके हैं।
पूर्व प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा, पूर्व मंत्री सुखजिंदर रंधावा सरीखे नेता कांग्रेस सरकार के दौरान समय-समय पर कैप्टन की नीतियों पर अंगुली उठाते रहे हैं। अब, राजा वड़िंग के लिए सबसे बड़ी समस्या उन सीनियर नेताओं को पार्टी से जोड़े रखने की है, जिन्हें मौजूदा नेतृत्व में अपने लिए कोई जगह दिखाई नहीं दे रही। ऐसे नेताओं में कई पूर्व विधायक भी हैं, जिन्हें कैप्टन सरकार में कई प्रयासों के बाद भी न तो मंत्री पद मिले और न ही बोर्ड-निगम की चेयरमैनी।
दूसरी ओर, कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा अपनी पार्टी का गठन कर भाजपा को दिए खुले समर्थन और कांग्रेस छोड़कर आ रहे नेताओं से भाजपा गदगद है। भाजपा यह महसूस कर रही है कि कैप्टन के सहारे वह 2024 के विधानसभा चुनाव में अपनी नैया पार लगा लेगी। जिस तरह भाजपा ने एक दिन पहले पार्टी में आए केवल ढिल्लों को अपने पार्टी कैडर को साइडलाइन कर संगरूर उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित किया है, उससे यह आसार भी दिखाई देने लगे हैं कि 2024 में पंजाब भाजपा कैप्टन के नेतृत्व में चुनाव में उतर सकती है। इसका एक कारण यह भी है कि रसातल में जा रही कांग्रेस के बाद पंजाब में आप, शिअद और भाजपा ही त्रिकोणीय जंग के लिए मैदान में दिखाई देंगे।