{"_id":"57dab14c4f1c1ba009d477bb","slug":"congress-40-hours-protest-analysis-during-punjab-assembly-session","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विस में कांग्रेस के 40 घंटे के धरने ने बदले समीकरण, ऐसे पड़ी थी नींव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विस में कांग्रेस के 40 घंटे के धरने ने बदले समीकरण, ऐसे पड़ी थी नींव
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 Sep 2016 08:03 PM IST
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असेंबली सेशन के दौरान पंजाब कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विधानसभा में कांग्रेस के 40 घंटे के धरने ने राजनीति के समीकरण ही बदल दिए। इसके बाद पार्टी फ्रंटफुट पर और सरकार बैकफुट पर आ गई। धरने के बाद कांग्रेस को जितनी मीडिया कवरेज मिली, उतनी शायद अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने पर भी नहीं मिलती।
कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड ने सोशल मीडिया पर भी इसे हिट कराया। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई विधायकों ने विडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाले। सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस ने भी हंगामे का मन बना लिया था। सरकार की मजबूरी थी कि उसे बिल पास कराने थे, लिहाजा सत्तधारियों को शांत रहना था।
इसी बीच तरलोचन सूंड ने बिक्रम मजीठिया की तरफ जूता फेंक दिया। जिससे सीनियर नेता सुनील जाखड़, रजिंदर कौर भट्ठल, लाल सिंह, ब्रह्म मोहिंद्रा सकते में आ गए और अपनी सीटों पर जा बैठे। पर फौरन ही सीनियर नेताओं ने डैमेज कंट्रोल किया और रणनीति बना कर बात को संभाल लिया।
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कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड ने सोशल मीडिया पर भी इसे हिट कराया। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई विधायकों ने विडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाले। सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस ने भी हंगामे का मन बना लिया था। सरकार की मजबूरी थी कि उसे बिल पास कराने थे, लिहाजा सत्तधारियों को शांत रहना था।
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इसी बीच तरलोचन सूंड ने बिक्रम मजीठिया की तरफ जूता फेंक दिया। जिससे सीनियर नेता सुनील जाखड़, रजिंदर कौर भट्ठल, लाल सिंह, ब्रह्म मोहिंद्रा सकते में आ गए और अपनी सीटों पर जा बैठे। पर फौरन ही सीनियर नेताओं ने डैमेज कंट्रोल किया और रणनीति बना कर बात को संभाल लिया।
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आखिरी सत्र में विपक्ष ने दिखाए काफी आक्रामक तेवर
पंजाब विधानसभा सेशन
- फोटो : अमर उजाला
देखा जाए तो विधानसभा के आखिरी सत्र में विपक्ष ने काफी आक्रामक तेवर दिखाए। हालांकि कांग्रेस को अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने का मौका नहीं मिला। लेकिन अपने तीखे तेवरों की बदौलत वह सत्ताधारियों पर भारी पड़ी। चुनाव से पहले होने वाले आखिरी सत्र के पहले से ही हंगामापूर्ण होने के कयास लगाए जा रहे थे।
कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर इसकी भूमिका तैयार कर दी थी। नियमानुसार स्पीकर ने प्रस्ताव स्वीकार किया और इस पर बहस की अनुमति भी दी। लेकिन सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने यह मौका गंवा दिया। सत्ताधारियों पर तर्कसंगत हमलों के बजाय उन्होंने एक शब्द कह कर शिअद-भाजपा को मौका दे दिया।
अकालियों ने साफ कर दिया था कि जब तक चन्नी माफी नहीं मांगते, वे सदन नहीं चलने देंगे। हंगामे के चलते स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस खत्म करके सीधे वोटिंग करा दी। अल्पमत के चलते कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। उस समय कांग्रेस एक तरह से बैकफुट पर आ गई थी। लेकिन तभी पार्टी ने सत्र के बाद भी सदन में धरना देने का फैसला किया। यहीं से सारे समीकरण बदल गए। अकाली दल को यह उम्मीद नहीं थी।
कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर इसकी भूमिका तैयार कर दी थी। नियमानुसार स्पीकर ने प्रस्ताव स्वीकार किया और इस पर बहस की अनुमति भी दी। लेकिन सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने यह मौका गंवा दिया। सत्ताधारियों पर तर्कसंगत हमलों के बजाय उन्होंने एक शब्द कह कर शिअद-भाजपा को मौका दे दिया।
अकालियों ने साफ कर दिया था कि जब तक चन्नी माफी नहीं मांगते, वे सदन नहीं चलने देंगे। हंगामे के चलते स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस खत्म करके सीधे वोटिंग करा दी। अल्पमत के चलते कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। उस समय कांग्रेस एक तरह से बैकफुट पर आ गई थी। लेकिन तभी पार्टी ने सत्र के बाद भी सदन में धरना देने का फैसला किया। यहीं से सारे समीकरण बदल गए। अकाली दल को यह उम्मीद नहीं थी।