{"_id":"622517718e305e00a65afd2d","slug":"compost-will-be-made-from-the-garbage-of-pu-s-girls-hostel-no-3-chandigarh-news-pkl4439432155","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीयू के गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 के कूड़े से बनेगी खाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीयू के गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 के कूड़े से बनेगी खाद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी का सरोजिनी हॉल गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 अब छात्रावास के कूड़े को बाहर भिजवाने के बजाय उसका निपटारा कर खाद बनाएगा। इसे लेकर गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 के साथ सभी छात्रावासों के मालियों और सफाईकर्मियों के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर वर्कशॉप कम ट्रेनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यातिथि एमसी के अतिरिक्त आयुक्त रुपेश अग्रवाल रहे।
गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 पिछले एक माह से कंपोस्ट पार्क को बनाने के लिए तैयारी कर रहा था। पीयू के प्रोफेसर डॉ. कंवलप्रीत और डॉ. सोनी के सहयोग से बैक्टीरियल कंपोस्ट और वर्मीकंपोस्ट बनाने की शुरुआत की गई है। इसमें छात्रावास, मेस और कैंटीन से निकला हुए कचरे को खाद में तब्दील किया जाएगा। बैक्टीरियल कंपोस्ट में सब्जियों के वेस्ट, पत्तियों, प्याज-लहसुन के छिलके का इस्तेमाल करेंगे। वहीं वर्मीकंपोस्ट में मटर, गाजर आदि वेस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें शोधार्थी, विद्यार्थियों और अन्य छात्रावासों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान डीएसडब्ल्यू प्रो. जगतार सिंह, प्रो. मीना शर्मा, एसोसिएट डीएसडब्ल्यू अशोक कुमार, प्रो. सुखबीर कौर और प्रो. सविता के साथ गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 की वार्डन डॉ. रवनीत कौर ने हिस्सा लिया। मुख्यातिथि रुपेश अग्रवाल ने कहा कि पीयू ऐसी पहल करने वाला पहला संस्थान है, उम्मीद है कि अन्य संस्थान भी कचरा अलग-अलग कर उससे खाद बनाने पर काम करेंगे।
विज्ञापन
गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 पिछले एक माह से कंपोस्ट पार्क को बनाने के लिए तैयारी कर रहा था। पीयू के प्रोफेसर डॉ. कंवलप्रीत और डॉ. सोनी के सहयोग से बैक्टीरियल कंपोस्ट और वर्मीकंपोस्ट बनाने की शुरुआत की गई है। इसमें छात्रावास, मेस और कैंटीन से निकला हुए कचरे को खाद में तब्दील किया जाएगा। बैक्टीरियल कंपोस्ट में सब्जियों के वेस्ट, पत्तियों, प्याज-लहसुन के छिलके का इस्तेमाल करेंगे। वहीं वर्मीकंपोस्ट में मटर, गाजर आदि वेस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें शोधार्थी, विद्यार्थियों और अन्य छात्रावासों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान डीएसडब्ल्यू प्रो. जगतार सिंह, प्रो. मीना शर्मा, एसोसिएट डीएसडब्ल्यू अशोक कुमार, प्रो. सुखबीर कौर और प्रो. सविता के साथ गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 की वार्डन डॉ. रवनीत कौर ने हिस्सा लिया। मुख्यातिथि रुपेश अग्रवाल ने कहा कि पीयू ऐसी पहल करने वाला पहला संस्थान है, उम्मीद है कि अन्य संस्थान भी कचरा अलग-अलग कर उससे खाद बनाने पर काम करेंगे।
विज्ञापन