{"_id":"cc061ddc2a2dcd1ff4c878db17b1b9a1","slug":"colony-removal-campaign-of-ut-administration","type":"story","status":"publish","title_hn":"4 कॉलोनियों पर चला बुल्डोजर, हजारों बेघर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
4 कॉलोनियों पर चला बुल्डोजर, हजारों बेघर
मयंक मिश्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 10 May 2014 09:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूटी प्रशासन आज शहर की चार कॉलोनियों पंडित कालोनी, मजदूर कालोनी, नेहरू कालोनी और कुलदीप कालोनी को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन का यह अभियान सुबह 7 बजे शुरू हुआ। डीसी मोहम्मद शाइन और एसडीएम साउथ कशिश मित्तल की अगुवाई में यह अभियान चलाया गया।
विज्ञापन
10 बजे तक आधी से ज्यादा कॉलोनियों को खाली करा लिया गया है। हालांकि इस अभियान के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से कॉलोनियों को खाली कराने का काम चल रहा है।
विज्ञापन
दूसरी ओर, पंडित कॉलोनी में दो ऐसी झुग्गियों को भी हटाया गया जिन पर हाईकोर्ट ने स्टे लगाया हुआ था। कॉलोनी में झुग्गी नंबर 413 और 415 में रहने वाले लोगों ने अधिकारियों को बताया कि हाईकोर्ट की तरफ से उन्हें स्टे ऑर्डर दिए गए हैं, इसलिए उनकी झुग्गियों को न हटाया जाए।
विज्ञापन
लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और आधी से ज्यादा झुग्गियों को तोड़ दिया। उनका सामान भी तहस-नहस कर दिया। झुग्गी में रहने वाली प्रिया ने डीसी मोहम्मद शाइन को हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर वाले कागजात दिखाए, जिन्हें देखकर डीसी ने झुग्गी न तोड़ने का आदेश देकर कहा कि इन झुग्गियों को पुनर्वास कॉलोनी के तहत नए मकान दिए जाएं।
यूटी प्रशासन द्वारा आज की गई इस कार्रवाई से हजारों लोग बेघर हो गए। कॉलोनी को हटा दिए जाने के बाद जो नजारा था, वो दिल दहला देने वाला था। लोग अपना सामान समेट रहे हैं। औरतें रो-रो कर कह रही हैं कि अब हम कहां जाएं। हमारे बच्चे कैसे रहेंगे, क्या खाएंगे। हमारे पास तो इतने पैसे भी नहीं, नया घर कैसे बनाएं। एक तो कड़ी धूप, ऊपर से तहस-नहस हो चुके सामान को समेटने की चिंता। बेचारे लोग करें तो क्या करें। प्रशासन ने तो अपनी तरफ से काम कर दिया, लेकिन अब इन लोगों को रहने का ठिकाने का क्या होगा, ये तो शायद कोई नहीं जानता।