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रेप पीड़िता को सस्ती दर पर आवास पर यूटी प्रशासन पक्ष स्पष्ट करे: हाईकोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 04 Aug 2018 09:45 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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होशियारपुर निवासी रेप पीड़िता को उसकी बच्ची के साथ रियायती दर पर आवास सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को पक्ष स्पष्ट करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने बताया था कि प्रशासन पीड़िता व उसकी बेटी को वर्किंग वुमन हॉस्टल में 1800 रुपये में कमरा उपलब्ध करवाने को तैयार है। आम तौर पर यहां किराया 5400 रुपये होता है लेकिन पीड़िता के प्रति सहानुभूति के चलते दाम तीन गुना कम किए गए हैं। साथ ही यह भी बताया कि सामान्य तौर पर एक कमरा तीन महिलाओं को अलॉट किया जाता है। लेकिन पीड़िता को एक कमरा देने का निर्णय लिया गया है। हालांकि उसे बिजली, पानी सहित अन्य सुविधाओं के लिए भुगतान करना होगा।
इसके साथ ही प्रशासन ने बताया कि रेप पीड़िता को मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुरूप याची पीड़िता को मुआवजा उपलब्ध करवाने पर विचार किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता को बड़ी मामूली वेतन मिलता है और ऐसी स्थिति में प्रशासन यह देखे कि उसके रहने आदि के खर्च में सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा सकती है या नहीं।
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चंडीगढ़ को दो लाख मुआवजा जारी करने का दिया था आदेश
पीड़िता ने एडवोकेट के जरिये हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में पीड़िता को मुआवजा दिए जाने के पंजाब सरकार को आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर पंजाब स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी ने मुआवजा जारी कर दिया था। बाद में पीड़िता ने कहा था की वो अपनी छह वर्ष की बेटी के साथ चंडीगढ़ में रह रही है। उसकी बेटी यहां स्कूल में पढ़ रही है जिसकी पूरी जिम्मेदारी उस पर है। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन उसे मुआवजा जारी करे। हाईकोर्ट ने इस पर चंडीगढ़ को दो लाख रुपये मुआवजा जारी करने के आदेश दिए थे।
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मामले की सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने बताया था कि प्रशासन पीड़िता व उसकी बेटी को वर्किंग वुमन हॉस्टल में 1800 रुपये में कमरा उपलब्ध करवाने को तैयार है। आम तौर पर यहां किराया 5400 रुपये होता है लेकिन पीड़िता के प्रति सहानुभूति के चलते दाम तीन गुना कम किए गए हैं। साथ ही यह भी बताया कि सामान्य तौर पर एक कमरा तीन महिलाओं को अलॉट किया जाता है। लेकिन पीड़िता को एक कमरा देने का निर्णय लिया गया है। हालांकि उसे बिजली, पानी सहित अन्य सुविधाओं के लिए भुगतान करना होगा।
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इसके साथ ही प्रशासन ने बताया कि रेप पीड़िता को मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुरूप याची पीड़िता को मुआवजा उपलब्ध करवाने पर विचार किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता को बड़ी मामूली वेतन मिलता है और ऐसी स्थिति में प्रशासन यह देखे कि उसके रहने आदि के खर्च में सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा सकती है या नहीं।
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चंडीगढ़ को दो लाख मुआवजा जारी करने का दिया था आदेश
पीड़िता ने एडवोकेट के जरिये हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में पीड़िता को मुआवजा दिए जाने के पंजाब सरकार को आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर पंजाब स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी ने मुआवजा जारी कर दिया था। बाद में पीड़िता ने कहा था की वो अपनी छह वर्ष की बेटी के साथ चंडीगढ़ में रह रही है। उसकी बेटी यहां स्कूल में पढ़ रही है जिसकी पूरी जिम्मेदारी उस पर है। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन उसे मुआवजा जारी करे। हाईकोर्ट ने इस पर चंडीगढ़ को दो लाख रुपये मुआवजा जारी करने के आदेश दिए थे।