छत्रपति हत्याकांडः सरकार को मिली बड़ी राहत, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी राम रहीम की पेशी
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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड के मुख्य आरोपी राम रहीम को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अब 11 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने के निर्देश दिए हैं। शहर की सुरक्षा के मद्देनजर हरियाणा सरकार के निर्देश पर जिला अटार्नी पंकज गर्ग ने चार जनवरी को कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका के माध्यम से मांग की गई थी कि राम रहीम की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की जाए।
कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि डेरा मुखी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनारिया जेल से पेश किया जाए। जबकि तीन अन्य आरोपी किशन लाल, निर्मल और कुलदीप को प्रत्यक्ष रूप से कोर्ट में पेश किया जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि याचिका की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश हुए वकील एचपीएस वर्मा ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिसके चलते कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राम रहीम को पेश करने के निर्देश देकर हरियाणा सरकार को बड़ी राहत दी है।
दो जनवरी को बहस हुई थी पूरी
दो जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान छत्रपति हत्याकांड मामले की बहस पूरी हो गई थी। अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं। सीबीआई कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने सुनारिया जेल के सुपरिंटेंडेंट को निर्देश दिए थे कि राम रहीम को 11 जनवरी को प्रत्यक्ष रूप से पेश किया जाए।
गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम साध्वी यौन शोषण केस में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल कैद की सजा काट रहा है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने ही इस मामले में 25 अगस्त 2017 को फैसला सुनाया था।
दंगे के बाद राम रहीम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुआ पेश
सीबीआई की स्पेशल कोर्ट द्वारा साध्वी यौन शोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार देने के बाद शहर में दंगा फैल गया था, जिसमें करीब 38 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों वाहनों को आग लगा दी गई थी। दंगे के बाद कोर्ट ने सुनारिया जेल में ही राम रहीम को सजा सुनाई थी। वहीं, छत्रपति हत्याकांड के आरोपी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही करवाने का फैसला लिया गया था।
गुरमीत राम रहीम पर यह है आरोप
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर किशन लाल, निर्मल और कुलदीप के साथ मिलकर साजिश रचकर सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या कराने का आरोप है। आरोप है कि बाइक पर आए कुलदीप ने गोली मारकर रामचंद्र छत्रपति की हत्या कर दी थी, उसके साथ निर्मल भी था। छत्रपति ने अपने सांध्य कालीन समाचार पत्र ‘पूरा सच’ में इस संबंध में अनाम साध्वी का पत्र प्रकाशित किया था। छत्रपति हत्याकांड केस की 2003 में एफआईआर दर्ज हुई थी और 2006 में जांच के लिए यह केस सीबीआई को सौंपा गया था।
यह था मामला
गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर हमला कर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रामचंद्र छत्रपति जिंदगी की लड़ाई हार गए थे, लेकिन उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हार नहीं मानी और सीबीआई जांच की मांग के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की और दिसंबर में इस केस की जांच शुरू हो गई थी। हालांकि 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम की याचिका को खारिज कर दिया था। करीब 16 साल इस केस की सुनवाई पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चली।
अब दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट 11 जनवरी को अपना फैसला सुनाएगी। यह वही अदालत है जिसने गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। ऐसे में यदि 11 जनवरी को कोई फैसला आता है तो सलाखों के पीछे बंद गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।