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बंदा सिंह बहादुर को संरक्षण देने वाले परिवार के वंश को खाने पड़े धक्के
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली।
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:06 PM IST
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चप्पड़चिड़ी में शो देखने आए बाबा बंदा सिंह बहादुर के वंश के परिवार के सदस्य
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चप्पड़चिड़ी में आयोजित लेजर शो में भले ही सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी हो, लेकिन संघर्ष के दौरान बाबा बंदा सिंह बहादुर को नौ महीने तक अपने घर पर रखने वाले परिवार को प्रोग्राम में शामिल होने के लिए धक्के खाने पड़े।
एक तो पहले सरकार ने निमंत्रण पत्र नहीं भेजा, किसी तरह वह चप्पड़चिड़ी पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें प्रोग्राम में शामिल होने से रोक दिया। इसके बाद मीडिया ने जब दखल दिया तो वह लोग आयोजन स्थल तक पहुंच पाए।
जानकारी के मुताबिक, सोनीपत के सेहरी खांडा गांव से आए डॉ. राज सिंह व उनके परिवार ने बताया कि सरकार ने उन्हें इस प्रोग्राम में आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बाद भी वह प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आए। इस दौरान उन्होंने पर्यटन मंत्री सोहन सिंह ठंडल से मुलाकात की।
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साथ ही कहा कि प्रोग्राम में शामिल होने के लिए उन्हें पास मुहैया करवा दे या एंट्री करवा दे। इस पर मंत्री ने टूरिज्म डायरेक्टर की ड्यूटी लगा दी थी। लेकिन, वह डेढ़ घंटे तक विभिन्न गेटों पर वह भटकते रहे। डॉ. राज ने बताया कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने जब लड़ाई लड़ी थी तो वह उनके गांव सेहरी खांडा में नौ महीने रहे थे। वहां उन्होंने अपनी 10 हजार सेना तैयार की थी। इस दौरान उनके परिवार ने ही बाबा की की सेवा व मेजबानी की थी।
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एक तो पहले सरकार ने निमंत्रण पत्र नहीं भेजा, किसी तरह वह चप्पड़चिड़ी पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें प्रोग्राम में शामिल होने से रोक दिया। इसके बाद मीडिया ने जब दखल दिया तो वह लोग आयोजन स्थल तक पहुंच पाए।
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जानकारी के मुताबिक, सोनीपत के सेहरी खांडा गांव से आए डॉ. राज सिंह व उनके परिवार ने बताया कि सरकार ने उन्हें इस प्रोग्राम में आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बाद भी वह प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आए। इस दौरान उन्होंने पर्यटन मंत्री सोहन सिंह ठंडल से मुलाकात की।
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साथ ही कहा कि प्रोग्राम में शामिल होने के लिए उन्हें पास मुहैया करवा दे या एंट्री करवा दे। इस पर मंत्री ने टूरिज्म डायरेक्टर की ड्यूटी लगा दी थी। लेकिन, वह डेढ़ घंटे तक विभिन्न गेटों पर वह भटकते रहे। डॉ. राज ने बताया कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने जब लड़ाई लड़ी थी तो वह उनके गांव सेहरी खांडा में नौ महीने रहे थे। वहां उन्होंने अपनी 10 हजार सेना तैयार की थी। इस दौरान उनके परिवार ने ही बाबा की की सेवा व मेजबानी की थी।