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Chandigarh News: पीयू में वीएसी और आईडीसी कोर्सेज पर बवाल, छात्राओं ने विकल्प बहाली की उठाई मांग
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग समेत कई विज्ञान विभागों में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) के तहत चलने वाले वैल्यू एडेड कोर्स (वीएसी) और इंटरडिसिप्लिनरी कोर्स (आईडीसी) के विषय चयन को लेकर छात्रों में भारी असंतोष व्याप्त है। बीए और बीएससी के विद्यार्थी इस बार अपने पसंद के अनुसार विषय चुनने का विकल्प खत्म किए जाने के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
हर साल छात्र विज्ञान और कला दोनों विभागों में अपनी रुचि के अनुसार कोर्स चुनते थे लेकिन इस बार वीएसी में केवल एक ही विषय थोप दिया गया है और आईडीसी कोर्स के विषय भी कम कर दिए गए हैं। इस समस्या से न केवल भौतिकी बल्कि लगभग सभी विज्ञान विभाग प्रभावित हैं।
छात्रों ने बताया कि विभागों ने यह कहकर दबाव बनाया कि 12 सितंबर अंतिम तारीख है जबकि असल में यह तारीख 17 सितंबर थी। इससे छात्र बिना विकल्प के फॉर्म भरने को मजबूर हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन अब कोर्स विकल्प बदलने से साफ इनकार कर रहा है।
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छात्रों की प्रमुख मांगें:
जिन विद्यार्थियों ने एग्जाम फॉर्म भरे हैं, उनके लिए दोबारा फॉर्म खोलकर विकल्प चुनने का मौका दिया जाए।
फीस जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए ताकि सभी को उचित अवसर मिल सके।
टीचरों के खाली पद भरे जाएं और माइनर विषयों में भी सीटें बढ़ाई जाएं।
छात्रों की रुचि और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक कोर्स संरचना में बदलाव किया जाए।
छात्रों की आपत्तियां
मनिका, पीएसयू ललकार का कहना है कि बिना रुचि के पढ़ाई का कोई लाभ नहीं होता। जबरन थोपे गए कोर्स से उनकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। पीएचडी स्कॉलर दीप्ति ने कहा कि छात्रों को पसंद के विषय चुनने का अधिकार है इसे दबाना शैक्षणिक और मानसिक उत्पीड़न के समान है। एएसए के गौतम भौरिया ने बताया कि कोर्स विकल्प बंद करना छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है और यह एनईपी 2020 व सीबीएसई के नियमों का भी स्पष्ट विरोधाभास है।
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हर साल छात्र विज्ञान और कला दोनों विभागों में अपनी रुचि के अनुसार कोर्स चुनते थे लेकिन इस बार वीएसी में केवल एक ही विषय थोप दिया गया है और आईडीसी कोर्स के विषय भी कम कर दिए गए हैं। इस समस्या से न केवल भौतिकी बल्कि लगभग सभी विज्ञान विभाग प्रभावित हैं।
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छात्रों ने बताया कि विभागों ने यह कहकर दबाव बनाया कि 12 सितंबर अंतिम तारीख है जबकि असल में यह तारीख 17 सितंबर थी। इससे छात्र बिना विकल्प के फॉर्म भरने को मजबूर हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन अब कोर्स विकल्प बदलने से साफ इनकार कर रहा है।
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छात्रों की प्रमुख मांगें:
जिन विद्यार्थियों ने एग्जाम फॉर्म भरे हैं, उनके लिए दोबारा फॉर्म खोलकर विकल्प चुनने का मौका दिया जाए।
फीस जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए ताकि सभी को उचित अवसर मिल सके।
टीचरों के खाली पद भरे जाएं और माइनर विषयों में भी सीटें बढ़ाई जाएं।
छात्रों की रुचि और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक कोर्स संरचना में बदलाव किया जाए।
छात्रों की आपत्तियां
मनिका, पीएसयू ललकार का कहना है कि बिना रुचि के पढ़ाई का कोई लाभ नहीं होता। जबरन थोपे गए कोर्स से उनकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। पीएचडी स्कॉलर दीप्ति ने कहा कि छात्रों को पसंद के विषय चुनने का अधिकार है इसे दबाना शैक्षणिक और मानसिक उत्पीड़न के समान है। एएसए के गौतम भौरिया ने बताया कि कोर्स विकल्प बंद करना छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है और यह एनईपी 2020 व सीबीएसई के नियमों का भी स्पष्ट विरोधाभास है।