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आमने-सामने : कानूनी अड़चनों में फंस सकता है निजी क्षेत्र में 75 फीसदी आरक्षण का विधान

Sun, 07 Mar 2021 06:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा विवेक शर्मा, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 07 Mar 2021 06:35 AM IST
सार

  • एजी ने कहा- कंपनियों को लाभ देते हैं तो शर्त लगाने का सरकार को पूरा अधिकार
  • बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन बोले-देश के नागरिकों को बराबरी के अधिकार का हनन

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chandiharh News : Reservation law can be struck in legal hiccups
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा में निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून अपने प्रावधानों के कारण कानूनी पचड़े में पड़ सकता है। इस कानून की नोटिफिकेटशन और राज्यपाल की मंजूरी बाकी होने के कारण आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पहले खारिज हो गई थी।

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राज्यपाल के हस्ताक्षर होने और सरकार के अधिसूचना जारी करने के बाद इसे चुनौती देने का रास्ता साफ हो जाएगा। उद्योग और कानूनी जानकार जहां इस आरक्षण को देश के नागरिकों के समानता के अधिकार के खिलाफ मानते हैं वहीं दूसरी ओर हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने इसे कानूनी रूप से सही करार दिया है।
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हरियाणा इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से संजय राठी ने बताया कि सरकार का यह फैसला योग्यता से अन्याय है। निजी नियोक्ताओं को इस प्रकार सीमित क्षेत्र से नियुक्ति के लिए बाध्य करना उनके कार्य की गुणवत्ता पर बुरा असर डालेगा।
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ऐसे में इस प्रावधान को रद्द किया जाना चाहिए जिससे नियोक्ता अपने अनुकूल कार्य करने वाले कर्मचारी चुनने को स्वतंत्र रहे। इस आरक्षण को अब राज्यपाल से मंजूरी मिल चुकी है और ऐसे में अब इसे चुनौती देनेे का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

एडवोकेट जनरल बीआर महाजन ने कहा कि  राज्य में काम कर रही निजी क्षेत्र की कंपनियों को स्थापित होते समय बहुत सी सरकारी सहायता दी जाती है। इस सहायता को प्राप्त करने वाली कंपनियों का यह दायित्व बनता है कि राज्य सरकार की लगाई शर्तों का वह पालन करें। साथ ही राज्य सरकार को अपने नागरिकों के लिए कदम उठाने का पूरा अधिकार है। आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता यह शर्त केवल सरकारी नौकरियों पर लागू होेती है, निजी संस्थानों पर नहीं। 

निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह असंवैधानिक है। इस प्रकार आरक्षण देना देश के नागरिकों को समानता के अवसर से वंचित करना है। ऐसा आरक्षण सीधे तौर पर संवैधानिक ढांचे से छेड़छाड़ है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। साथ ही निजी संस्थानों पर ऐसा आरक्षण थोपना संस्थानों के साथ भी अन्याय है।

-लेखराज शर्मा, पूर्व चेयरमैन, बार काउंसिल ऑफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट


यह है नीति
राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में हरियाणा के लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य कर दिया। 50 हजार रुपये तक मासिक वेतन की नौकरियों पर यह नियम लागू किया है। निजी क्षेत्र की 10 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों, सोसायटी, ट्रस्ट आदि पर यह लागू होगा। एसडीएम या उच्च अधिकारियों को इसे लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। यह अधिकारी संस्थानों का निरीक्षण कर सकेंगे और उल्लंघन की स्थिति में इन्हें नियोक्ता पर 25 हजार रुपये से पांच लाख का जुर्माना लगाने का अधिकार दिया है।

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