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स्मार्ट पुलिस के हालात: चंडीगढ़ पुलिस के पास फंड की कमी नहीं, फिर भी चौकी-थाने अस्थायी, उधार के हवालात 

Thu, 17 Feb 2022 04:18 PM IST
निवेदिता वर्मा संदीप खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संदीप खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 17 Feb 2022 04:18 PM IST
सार

औद्योगिक क्षेत्र थाने में जब्त वाहनों के कारण थाने के अंदर जगह नहीं बची है, इस कारण कर्मचारियों को अपने वाहनों को बाहर ही खड़ा करना पड़ता है। इसके अलावा कई थाने अस्थायी और काफी छोटी जगह में बने हुए हैं।

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Chandigarh Police do not even have their own police stations 
सेक्टर 22 की पुलिस पोस्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ शहर की पुलिस भले ही स्मार्ट हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्मार्ट सिटी में पुलिस के पास खुद के थाने और हवालात तक नहीं हैं। उधार के हवालात में कैदियों को बंद करना पड़ रहा है और खुद पुलिसकर्मियों को बैठने के लिए किराए के भवनों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि शहर के कई थाने और चौकियों का संचालन सरकारी घरों, शोरूम और टीनशेड से हो रहा है।

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औद्योगिक क्षेत्र थाने में जब्त वाहनों के कारण थाने के अंदर जगह नहीं बची है, इस कारण कर्मचारियों को अपने वाहनों को बाहर ही खड़ा करना पड़ता है। इसके अलावा कई थाने अस्थायी और काफी छोटी जगह में बने हुए हैं। इसके अलावा पुलिसकर्मियों के लिए बने मकानों की हालत भी काफी खस्ता है। हालात यह हैं कि जान हथेली पर रखकर पुलिसकर्मी इन मकानों में रह रहे हैं। पुलिस विभाग के पास फंड की कमी नहीं है, फिर भी ऐसे हालात हैं।

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इन चौकी व थानों में है समस्या 

- सारंगपुर थाना सारंगपुर कॉलोनी के हाउसिंग बोर्ड के मकान में चल रहा है  
- सेक्टर-22 पुलिस चौकी सरकारी मकान में बनी हुई है
- सेक्टर-61 की चौकी मार्केट के शोरूम में बनी है
-आईटी पार्क थाना टीनशेड में चल रहा है 
- मौलीजागरां थाना भी अस्थायी और काफी छोटा बना है 
- सुखना लेक चौकी एक छोटे से कमरे के अंदर बनी है 
- साइबर सेल, वुमन सेल और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) सेक्टर-17 के एक ही इमारत में चल रहीं हैं, लेकिन तीनों शाखाओं में खुद की हवालात तक नहीं है।  

गाड़ियों की कमी, अपने वाहन से जाते हैं कर्मचारी

पुलिस अफसरों के पास बेशक महंगी गाड़ियां हों, लेकिन थाने और साइबर सेल में गाड़ियों की काफी कमी है। गश्त को छोड़ दिया जाए तो अपराधियों को पकड़ने या अन्य कार्यों के लिए ज्यादातर पुलिसकर्मी खुद की गाड़ी का ही प्रयोग करते हैं। यही कारण है कि पेट्रोल बचाने के चक्कर में कई बार अपराधियों को पकड़ने में समय लग जाता है।
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साइबर थाने का प्रस्ताव अटका, दोगुनी हो रहीं शिकायतें 

शहर में साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए साल 2018 में पुलिस विभाग की तरफ से एक साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। यह प्रस्ताव अब तक अटका हुआ है, जबकि शिकायतों की संख्या हर साल दोगुनी होती जा रही है। वर्ष 2020 में साइबर सेल को 6500 से ज्यादा शिकायतें मिली थीं, यानी एक पुलिसकर्मी औसतन 93 शिकायतों का बोझ है। यही कारण है कि मामले का निस्तारण भी धीमी गति से होता है। साइबर सेल में अभी डीएसपी,  निरीक्षक, पांच उप निरीक्षक, 10 एएसआई समेत लगभग 70 पुलिसकर्मी तैनात हैं।

शहर में अस्थायी तौर पर पांच नए थाने बनाए गए थे, उन्हें एक ही भवन में स्थायी किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया है। कई थानों के निर्माण के लिए नक्शा भी बन चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। अस्थायी रूप से चल रहीं चौकियों को भी स्थायी करेंगे। सेक्टर-22 चौकी के लिए तो जगह भी तय हो चुकी है। वुमन सेल को अलग भवन में स्थायी किया जाएगा। - मनोज मीणा, कार्यवाहक एसएसपी, चंडीगढ़.

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