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PGI Research: अब आठ हफ्ते नहीं 8 दिन में पूरी होगी विटामिन डी की कमी, इंडोक्रानोलॉजी विभाग ने किया शोध
Mon, 18 Nov 2024 07:59 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 18 Nov 2024 07:59 AM IST
सार
प्राइमरी हाइपरपैराथायरायडिज्म के मरीजों में विटामिन डी की मात्रा कम होने पर 8 हफ्ते तक दी जाने वाली दवा की खुराक को महज आठ दिनों में पूरा किया जा सकता है।
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Vitamin D
- फोटो : istock
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विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई के विशेषज्ञों ने प्राइमरी हाइपरपैराथायरायडिज्म के मरीजों के इलाज को बेहद आसान कर दिया है। इंडोक्रानोलॉजी विभाग के एक शोध के परिणाम के आधार पर नई गाइडलाइन तय की गई है।
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विभाग के प्रमुख प्रोफेसर संजय भडाडा ने बताया कि ऐसे मरीजों में विटामिन डी का स्तर कम होने से कई तरह का खतरा बढ़ने लगता है। इसकी आपूर्ति के लिए छह हजार पावर की विटामिन डी की खुराक 8 हफ्ते तक देनी होती है, जिसमें प्रतिदिन मरीज को एक खुराक दी जाती है।
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दूसरी ओर, पीजीआई में किए गए शोध के दौरान ऐसे 60 मरीजों को दो वर्गों में बताकर 30 को 8 हफ्ते तक हर हफ्ते दवा की एक खुराक दी गई, जबकि दूसरे वर्ग में शामिल मरीजों को 8 दिनों तक प्रतिदिन दवा की एक खुराक दी गई। तय समय अवधि पूरी होने के बाद दोनों वर्गों में शामिल मरीजों में विटामिन डी का स्तर चेक किया गया। इसमें परिणाम एक समान मिले।
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इसके आधार पर यह तय हुआ कि इन मरीजों में 8 हफ्ते तक खुराक देने से हो रही देरी को कम किया जा सकता है क्योंकि ऐसे मरीजों में इलाज के लिए सर्जरी की जरूरत होती है, जो विटामिन डी को संतुलित किए बिना संभव नहीं होता। प्रोफेसर संजय ने बताया कि ऐसे मरीजों में दवा की खुराक को लेकर बनाई गई यह विश्व की पहली नई गाइडलाइन है।
कारण जानें
प्राथमिक हाइपरपैराथायरायडिज्म का सबसे आम कारण हाशिमोटो थायरायडाइटिस है। यह एक ऑटोइम्युन बीमारी है, जो प्रतिरक्षा तंत्र को थायरॉयड पर हमला करने का कारण बन जाती है।कैल्शियम का स्तर बनाए रखने में मददगार
थायरॉयड ग्रंथियों की ओर से उत्पादित पैराथायरॉइड हार्मोन रक्तप्रवाह और उचित कामकाज के लिए कैल्शियम पर निर्भर ऊतकों में कैल्शियम का सही संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह तंत्रिका और मांसपेशियों के कार्य के साथ-साथ हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके दो प्रकारों में से प्राथमिक हाइपरपैराथायरायडिज्म में एक या अधिक पैराथायरायड ग्रंथियों के बढ़ने से पैराथायरायड हार्मोन का अधिक उत्पादन होता है। इससे रक्त में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। प्राथमिक हाइपरपैराथायरायडिज्म के लिए सर्जरी सबसे आम उपचार है। प्राथमिक हाइपरपैराथायरायडिज्म पूरे शरीर को प्रभावित करता है और कई तरह के लक्षण पैदा कर सकता है। थायरॉइड हार्मोन का बहुत कम होना पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है।लक्षणों पर करें गौर
- कमजोर हड्डियां जो आसानी से टूट जाती हैं (ऑस्टियोपोरोसिस)
- गुर्दे की पथरी
- अत्यधिक पेशाब आना
- पेट (उदर) दर्द
- आसानी से थक जाना या कमज़ोरी
- अवसाद या विस्मृति
- हड्डी और जोड़ों का दर्द
- बिना किसी स्पष्ट कारण के बीमारी की लगातार शिकायतें
- मतली, उल्टी या भूख न लगना