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आर्थोपेडिक्स इंप्लांट का लेकर भी लोगों को मिलेगी बड़ी राहत, PGI ने लिया फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 12 Mar 2017 10:54 AM IST
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पीजीआई और जीएमसीएच के मरीजों के लिए ई-संजीवनी
- फोटो : डेमो फोटो
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स्टेंट की तरह अब आर्थोपेडिक्स इंप्लांट के दाम तय करने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए पीजीआई ने प्रोफेसर केएलएन राव के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की है। कमेटी को मार्च के आखिरी सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। यह कमेटी अब अलग-अलग कंपनियों के रेट और मैन्युफैक्चरिंग कास्ट की समीक्षा करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक दाम तय कर दिए जाएंगे। यदि पीजीआई ऐसा करने में सफल होता है तो यह देश का पहला संस्थान होगा, जिसमें आर्थो के इंप्लांट के दाम फिक्स होंगे। आर्थोपेडिक्स इंप्लांट में घुटना, कूल्हा व ट्रामा से संबंधित इंप्लांट शामिल होंगे।
अभी कोई रेट तय नहीं है
पीजीआई में होने वाले घुटना या हिप ट्रांसप्लांट के लिए कोई भी रेट तय नहीं है। पीजीआई में आने वाले मरीजों को डाक्टर सीधे डिस्ट्रीब्यूटर के पास भेजते हैं। डिस्ट्रीब्यूटर अपने मन मुताबिक रेट तय करते हैं। हर कंपनी के अपने रेट हैं। घुटना ट्रांसप्लांट के लिए किसी मरीज से सवा लाख रुपये लिए जाते हैं तो किसी से एक लाख। जैसा मरीज, उससे उतने रुपये। इस बारे में कई बार मरीजों ने पीजीआई को शिकायत दी। अब जाकर पीजीआई ने रेट तय करने का फैसला लिया है। इससे घुटना ट्रांसप्लांट के रेटों में भी कमी आएगी।
अमृत फार्मेसी से भी नहीं मिले इंप्लांट
नेहरू हास्पिटल में खुली अमृत फार्मेसी में आर्थोपेडिक्स इंप्लांट मिलने का दावा किया गया था। लेकिन उसमें आर्थोपेडिक्स इंप्लांट नहीं आए। पीजीआई के डाक्टरों ने बताया कि अमृत फार्मेसी में इंप्लांट न होने के कारण मरीजों को बाहर भेजा जाता था। यदि अमृत फार्मेसी में ही सामान मिलता तो मरीजों को बाहर क्यों भेजा जाता।
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स्टेंट पर खूब होती थी वसूली
पीजीआई में कुछ समय पहले तक स्टेंट के दाम पर खूब अंधाधुंध वसूली होती थी। एक-एक स्टेंट के एवज पर 50 से 70 हजार रुपये तक वसूले लिए जाते थे। इससे मरीजों को काफी चपत लगती थी। जो बेचारे गरीब मरीज होते थे, उनके लिए दो स्टेंट की भरपाई कर पाना मुश्किल होता था। इस संबंध में कई शिकायत की गई, उसके बाद पीजीआई ने स्टेंट के दाम तय कर दिए। अब तो पूरे देश में स्टेंट के दाम तय कर दिए गए हैं। किसी भी स्टेंट के 30 हजार रुपये से ज्यादा रेट नहीं वसूले जा सकते।
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अभी कोई रेट तय नहीं है
पीजीआई में होने वाले घुटना या हिप ट्रांसप्लांट के लिए कोई भी रेट तय नहीं है। पीजीआई में आने वाले मरीजों को डाक्टर सीधे डिस्ट्रीब्यूटर के पास भेजते हैं। डिस्ट्रीब्यूटर अपने मन मुताबिक रेट तय करते हैं। हर कंपनी के अपने रेट हैं। घुटना ट्रांसप्लांट के लिए किसी मरीज से सवा लाख रुपये लिए जाते हैं तो किसी से एक लाख। जैसा मरीज, उससे उतने रुपये। इस बारे में कई बार मरीजों ने पीजीआई को शिकायत दी। अब जाकर पीजीआई ने रेट तय करने का फैसला लिया है। इससे घुटना ट्रांसप्लांट के रेटों में भी कमी आएगी।
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अमृत फार्मेसी से भी नहीं मिले इंप्लांट
नेहरू हास्पिटल में खुली अमृत फार्मेसी में आर्थोपेडिक्स इंप्लांट मिलने का दावा किया गया था। लेकिन उसमें आर्थोपेडिक्स इंप्लांट नहीं आए। पीजीआई के डाक्टरों ने बताया कि अमृत फार्मेसी में इंप्लांट न होने के कारण मरीजों को बाहर भेजा जाता था। यदि अमृत फार्मेसी में ही सामान मिलता तो मरीजों को बाहर क्यों भेजा जाता।
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स्टेंट पर खूब होती थी वसूली
पीजीआई में कुछ समय पहले तक स्टेंट के दाम पर खूब अंधाधुंध वसूली होती थी। एक-एक स्टेंट के एवज पर 50 से 70 हजार रुपये तक वसूले लिए जाते थे। इससे मरीजों को काफी चपत लगती थी। जो बेचारे गरीब मरीज होते थे, उनके लिए दो स्टेंट की भरपाई कर पाना मुश्किल होता था। इस संबंध में कई शिकायत की गई, उसके बाद पीजीआई ने स्टेंट के दाम तय कर दिए। अब तो पूरे देश में स्टेंट के दाम तय कर दिए गए हैं। किसी भी स्टेंट के 30 हजार रुपये से ज्यादा रेट नहीं वसूले जा सकते।