चंडीगढ़: 276 में से 185 बच्चों में मिलीं एंटीबॉडीज, पीजीआई निदेशक बोले- तीसरी लहर बच्चों के लिए नहीं होगी खतरनाक
सीरो सेरोलॉजी टेस्ट के जरिए किया जाता है। इस टेस्ट में व्यक्ति के शरीर में खास संक्रमण के खिलाफ बनने वाले एंटीबॉडीज की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। अब देखा जाता है कि क्या व्यक्ति के इम्यून सिस्टम ने इंफेक्शन का जवाब दिया है। ह्यूमन बॉडी में दो तरह की एंटीबॉडीज बनती हैं, जिनमें आईजीएम और आईजीजी शामिल हैं। ये दोनों ही संक्रमण के खिलाफ काम करते हैं। आईजीजी एंटीबॉडीज शरीर में लंबे समय तक रहते हैं।
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पीजीआई ने चंडीगढ़ में बच्चों का सीरो सर्वे शुरू कर दिया है। प्रारंभिक चरण में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के 276 बच्चों की जांच में 185 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इससे इस बात की पुष्टि हो रही है कि दूसरी लहर में वयस्कों की ही तरह बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आए थे।
पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर जगतराम ने बताया कि सीरो सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अगली लहर बच्चों के लिए खतरनाक साबित नहीं होगी, क्योंकि दूसरी लहर में ज्यादातर बच्चे संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और उनमें एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी हैं। ऐसे में अगर दोबारा संक्रमण बढ़ा तो बच्चों को ज्यादा खतरा नहीं होगा। प्रो. जगतराम का कहना है कि इसके बावजूद संक्रमण को लेकर सजग रहने की जरूरत है, क्योंकि वायरस लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है। ऐसे में जरा सी लापरवाही से स्थिति भयावह हो सकती है।
अभिभावकों से मांगा सहयोग
प्रो. जगतराम ने बताया कि सर्वे के दौरान ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों की जांच का नमूना देने से कतरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि वह इस सर्वे के महत्व को समझें और पीजीआई की टीम का सहयोग करें ताकि आने वाली गंभीर स्थिति से बचाव की तैयारियां पुख्ता की जा सकें। सर्वे के दौरान शहर के विभिन्न चयनित क्षेत्रों से लगभग 2500 से 3000 बच्चों को शामिल किया जाएगा।
प्रो. जगतराम कहते हैं कि यह सर्वे उन बच्चों के प्रतिशत का अनुमान लगाने में मदद करेगा जिनमें पहले से ही एंटीबॉडी मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के बीच टीकाकरण यदि निकट भविष्य में शुरू किया गया तो इस डाटा के जरिए जरूरी व्यवस्था की जा सकेगी। बता दें कि पीजीआई के डीन (अकादमिक) प्रो. जीडी पुरी की देखरेख में यह सर्वे किया जा रहा है। इसमें वायरोलॉजी और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की टीम भी काम कर रही है।
सर्वे के लिए शहर को तीन जोन में बांटा गया
पहला: सेक्टर-3, 6, 22, 24, 29, 36, 46, 47, 48, 56 से एक समान प्रतिनिधित्व के नमूने लिए जाएंगे।
दूसरा: गांव खुड्डा जस्सू, धनास, मलोया, मौलीजागरां, माखन माजरा, रायपुर कलां, बुड़ैल, (सेक्टर-45), अटावा (सेक्टर 42), कजहेड़ी (सेक्टर- 52)।
तीसरा: हल्लोमाजरा, कालोनी नंबर चार, औद्योगिक क्षेत्र, भास्कर कालोनी, संजय कालोनी, इंदिरा कालोनी, बापूधाम, मौलीजागरां, डड्डू माजरा, कालोनी नंबर पांच, एसबीएस कालोनी, मनीमाजरा।
सीरो सर्वे का महत्व
सीरो सर्वे दो चीजें दर्शाता है। पहली कि कितनी फीसदी जनसंख्या वायरस की चपेट में आई है। दूसरी, कौन से ग्रुप में वायरस के लक्षण ज्यादा पाए गए हैं। यही वजह इस सर्वे को बाकी सर्वे से अलग बनाता है।