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Anil Masih: चंडीगढ़ मेयर चुनाव विवाद में सबसे ज्यादा बदनाम हुए अनिल मसीह, सुप्रीम कोर्ट से भी पड़ी फटकार
Wed, 21 Feb 2024 11:01 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 21 Feb 2024 11:01 AM IST
सार
चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी अनिल मसीह को काफी लताड़ लगाई थी। सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि यह स्पष्ट है कि रिटर्निंग अधिकारी ने मतपत्रों को नष्ट किया है। कोर्ट ने कहा था कि इस अधिकारी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इसके बाद आप और कांग्रेस अनिल मसीह पर हमलावर हो गई थी।
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वोटों पर निशान लगाते अनिल मसीह।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
चंडीगढ़ में 30 जनवरी को हुए मेयर चुनाव पर उठा विवाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद थम गया। हालांकि इसकी गूंज राजनीतिक गलियारों में काफी समय तक सुनाई देगी। इस पूरे मामले में जो नाम सबसे ज्यादा बदनाम हुआ वो है चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी अनिल मसीह का।
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सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मनोनीत पार्षद और मेयर चुनाव के पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह को कड़ी फटकार लगाई है। इसके बाद से अनिल मसीह सोशल मीडिया पर सर्च में आ गए। लोग जानना चाहते हैं कि अनिल मसीह कौन है, जिनके ऊपर चंडीगढ़ मेयर चुनाव में वोटों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा है।
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चुनाव के बाद सबको लगा था कि अनिल मसीह कोई ब्यूरोक्रेट हैं लेकिन अब धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी है। मसीह भाजपा के सक्रिय नेता हैं। उन्होंने 2011 में भाजपा के माइनॉरिटी विंग में एंट्री ली थी। इसके बाद से वे धीरे-धीरे पार्टी में सक्रिय होने लगे। उन्हें भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद का करीबी माना जाता है। उनकी सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें माइनॉरिटी मोर्चा में महामंत्री का पद दिया गया। वह कई साल माइनॉरिटी मोर्चा में महामंत्री रहे लेकिन कुछ महीने पहले भारतीय जनता पार्टी की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ।
जतिंदर पाल मल्होत्रा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हाल ही में माइनॉरिटी मोर्चा के संयोजक के नाम की घोषणा की गई है, लेकिन उसके अन्य सदस्यों के नाम की घोषणा नहीं हुई है, इसलिए अनिल मसीह के पास वर्तमान में भाजपा के अंदर कोई पद नहीं है लेकिन वह अब भी भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
2022 में बने थे मनोनीत पार्षद
2022 में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित के रिकमेंडेशन पर उन्हें मनोनीत पार्षद बनाकर निगम में भेजा गया था। तब से वह निगम की सभी बैठकों में हिस्सा लेते हैं।
पूर्व मेयर के सुझाव पर बने थे पीठासीन अधिकारी
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हर वर्ष किसी पार्षद को ही पीठासीन अधिकारी बनाया जाता है। यह प्रथा 1996 से ही चली जा रही है। इस वर्ष मेयर चुनाव की घोषणा 10 जनवरी को की गई थी। पूर्व मेयर अनूप गुप्ता के सुझाव पर डीसी विनय प्रताप सिंह ने अनिल मसीह को मेयर चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया था।
18 जनवरी को मसीह की तबीयत खराब होने के कारण टल गए थे चुनाव
पहले मेयर चुनाव 18 जनवरी को होने थे लेकिन उसी दिन अनिल मसीह की तबीयत खराब हो गई जिसके बाद चुनाव टाल दिया गया था। इसके बाद प्रशासन ने छह फरवरी को मेयर चुनाव कराने की घोषणा की लेकिन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के मेयर पद की उम्मीदवार कुलदीप कुमार जल्द चुनाव कराने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को चुनाव कराने के आदेश दिए। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में 30 जनवरी को चुनाव हुए। चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर 16 वोट पाकर जीत गए। वहीं आप और कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी को 12 वोट मिले। गठबंधन के 8 वोट अमान्य कर दिए गए। इसके बाद मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। चुनाव में वोटों की गिनती के दौरान छेड़छाड़ करने का आरोप अनिल मसीह पर लगा था।
जतिंदर पाल मल्होत्रा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हाल ही में माइनॉरिटी मोर्चा के संयोजक के नाम की घोषणा की गई है, लेकिन उसके अन्य सदस्यों के नाम की घोषणा नहीं हुई है, इसलिए अनिल मसीह के पास वर्तमान में भाजपा के अंदर कोई पद नहीं है लेकिन वह अब भी भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
2022 में बने थे मनोनीत पार्षद
2022 में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित के रिकमेंडेशन पर उन्हें मनोनीत पार्षद बनाकर निगम में भेजा गया था। तब से वह निगम की सभी बैठकों में हिस्सा लेते हैं।
पूर्व मेयर के सुझाव पर बने थे पीठासीन अधिकारी
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हर वर्ष किसी पार्षद को ही पीठासीन अधिकारी बनाया जाता है। यह प्रथा 1996 से ही चली जा रही है। इस वर्ष मेयर चुनाव की घोषणा 10 जनवरी को की गई थी। पूर्व मेयर अनूप गुप्ता के सुझाव पर डीसी विनय प्रताप सिंह ने अनिल मसीह को मेयर चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया था।
18 जनवरी को मसीह की तबीयत खराब होने के कारण टल गए थे चुनाव
पहले मेयर चुनाव 18 जनवरी को होने थे लेकिन उसी दिन अनिल मसीह की तबीयत खराब हो गई जिसके बाद चुनाव टाल दिया गया था। इसके बाद प्रशासन ने छह फरवरी को मेयर चुनाव कराने की घोषणा की लेकिन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के मेयर पद की उम्मीदवार कुलदीप कुमार जल्द चुनाव कराने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को चुनाव कराने के आदेश दिए। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में 30 जनवरी को चुनाव हुए। चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर 16 वोट पाकर जीत गए। वहीं आप और कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी को 12 वोट मिले। गठबंधन के 8 वोट अमान्य कर दिए गए। इसके बाद मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। चुनाव में वोटों की गिनती के दौरान छेड़छाड़ करने का आरोप अनिल मसीह पर लगा था।