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मेयर को मिलना है तो 12 से 1 बजे तक आएं, पहले या बाद में नहीं मिल पाएंगे
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 22 Apr 2017 02:40 PM IST
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चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल
- फोटो : File Photo
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अब शहरवासी मेयर आशा जसवाल से निगम कार्यालय में बेरोकटोक नहीं मिल पाएंगे। पब्लिक मीटिंग के लिए मेयर ने दोपहर को एक घंटे का समय 12 बजे से 1 बजे तक तय कर दिया है। मेयर ने लोगों के साथ साथ अपने पार्टी कार्यकर्ताओं पर भी यह पाबंदी लगाई है। अब पार्टी के किसी कार्यकर्ता और नेता को भी मिलना है तो वह भी इसी एक घंटे के दौरान ही मिल सकेंगे। मालूम हो कि इससे पहले कभी भी मेयर से मिलने का समय तय नहीं हुआ है।
मेयर आशा जसवाल का कहना है कि उनके कार्यकाल को तीन माह से ज्यादा का समय हो गया है। सारा दिन ही लोगों को मिलने में ही निकल जाता है। ऐसे में पालिसी के मुद्दों पर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। शहर की समस्याओं को दूर करने के लिए अधिकारियों के साथ बैठकें नहीं हो पा रही हैं ताकि समस्याएं स्थायी तौर पर दूर हो सके। इसलिए अब दोपहर 12 से एक बजे का समय पब्लिक मीटिंग का रखा गया है।
अभी तक जो भी मेयर कार्यालय के बाहर सेवादार को मिलने के लिए पर्ची देता था, उन्हें मेयर की अनुमति के बाद उनसे मिला दिया जाता था। जबकि पार्षद और अधिकारी सीधे कमरे में एंट्री कर जाते थे। मेयर के पास सुबह से लेकर शाम तक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, कार्यकर्ता, समाजसेवी और सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के पदाधिकारी शिकायत और सुझाव लेकर आते रहते हैं।
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बेटे और रिश्तेदारों पर भी लागू होगा नियम
मेयर आशा जसवाल ने अपने पीए को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 12 से एक बजे के बीच ही सभी को बुलाया जाए। अगर कोई रिश्तेदार या परिवार का सदस्य भी आते हैं तो उन्हें भी इसी एक घंटे के बीच बुलाया जाए। अगर उन्हें कोई आवश्यक काम है तो उन्हें सीनियर डिप्टी मेयर के कमरे में बिठा दिया जाए। मेयर ने यहां तक कहां कि अगर उनका बेटा भी 12 से एक बजे के बीच आता है तो ही मिलाया जाए। मालूम हो कि मेयर के बेटे वकील ब्रजेश्वर जसवाल भाजपा जिला अध्यक्ष के पद पर तैनात हैं।
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मेयर आशा जसवाल का कहना है कि उनके कार्यकाल को तीन माह से ज्यादा का समय हो गया है। सारा दिन ही लोगों को मिलने में ही निकल जाता है। ऐसे में पालिसी के मुद्दों पर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। शहर की समस्याओं को दूर करने के लिए अधिकारियों के साथ बैठकें नहीं हो पा रही हैं ताकि समस्याएं स्थायी तौर पर दूर हो सके। इसलिए अब दोपहर 12 से एक बजे का समय पब्लिक मीटिंग का रखा गया है।
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अभी तक जो भी मेयर कार्यालय के बाहर सेवादार को मिलने के लिए पर्ची देता था, उन्हें मेयर की अनुमति के बाद उनसे मिला दिया जाता था। जबकि पार्षद और अधिकारी सीधे कमरे में एंट्री कर जाते थे। मेयर के पास सुबह से लेकर शाम तक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, कार्यकर्ता, समाजसेवी और सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के पदाधिकारी शिकायत और सुझाव लेकर आते रहते हैं।
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बेटे और रिश्तेदारों पर भी लागू होगा नियम
मेयर आशा जसवाल ने अपने पीए को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 12 से एक बजे के बीच ही सभी को बुलाया जाए। अगर कोई रिश्तेदार या परिवार का सदस्य भी आते हैं तो उन्हें भी इसी एक घंटे के बीच बुलाया जाए। अगर उन्हें कोई आवश्यक काम है तो उन्हें सीनियर डिप्टी मेयर के कमरे में बिठा दिया जाए। मेयर ने यहां तक कहां कि अगर उनका बेटा भी 12 से एक बजे के बीच आता है तो ही मिलाया जाए। मालूम हो कि मेयर के बेटे वकील ब्रजेश्वर जसवाल भाजपा जिला अध्यक्ष के पद पर तैनात हैं।
पार्षदों का चीफ इंजीनियर से भी मिलने का समय भी होगा तय
मेयर आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
दो से तीन पार्षद रोज बैठेंगे समस्याओं को दूर करने के लिए :
मेयर का कहना है कि सभी पार्षदों की लोगों का काम करवाने के लिए अलग-अलग दिन ड्यूटी लगाई जाएगी। प्रतिदिन दो से तीन पार्षद लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के कमरे में बैठेंगे जो कि उनके स्तर पर अधिकारियों से लोगों का काम करवाएंगे। उनका कहना है कि पार्षद दूसरे वार्ड के लोगों की समस्याओं को भी दूर करवाएंगे।
पार्षदों का चीफ इंजीनियर से भी मिलने का समय भी होगा तय
इस समय चीफ इंजीनियर से भी कोई भी पार्षद किसी भी समय मिल लेता है। वहीं अन्य लोग भी पूरा दिन मिलने आते रहते हैं। इससे चीफ इंजीनियर के कमरे में पूरा दिन लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। यह बात चीफ इंजीनियर की ओर से मेयर को बताई गई है ऐसे में मेयर अब चीफ इंजीनियर के साथ पार्षदों का भी अलग से समय तय करने जा रही हैं। जिससे उस दौरान पार्षद ही चीफ इंजीनियर से मिल सकेंगे। इस समय कई पार्षद चीफ इंजीनियर के पास ऐसे काम भी ले आते है जो कि जेई स्तर के ही होते हैं।
मेयर अधिकारी नहीं है वह जनप्रतिनिधि है। राजनीति में आने वाले नेता को 24 घंटे लोगों की सेवा के लिए हाजिर रहना चाहिए। मेयर की ओर से एक घंटे पब्लिक की मीटिंग का समय तय करने का निर्णय ठीक नहीं है। - प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मेयर।
मेयर का कहना है कि सभी पार्षदों की लोगों का काम करवाने के लिए अलग-अलग दिन ड्यूटी लगाई जाएगी। प्रतिदिन दो से तीन पार्षद लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के कमरे में बैठेंगे जो कि उनके स्तर पर अधिकारियों से लोगों का काम करवाएंगे। उनका कहना है कि पार्षद दूसरे वार्ड के लोगों की समस्याओं को भी दूर करवाएंगे।
पार्षदों का चीफ इंजीनियर से भी मिलने का समय भी होगा तय
इस समय चीफ इंजीनियर से भी कोई भी पार्षद किसी भी समय मिल लेता है। वहीं अन्य लोग भी पूरा दिन मिलने आते रहते हैं। इससे चीफ इंजीनियर के कमरे में पूरा दिन लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। यह बात चीफ इंजीनियर की ओर से मेयर को बताई गई है ऐसे में मेयर अब चीफ इंजीनियर के साथ पार्षदों का भी अलग से समय तय करने जा रही हैं। जिससे उस दौरान पार्षद ही चीफ इंजीनियर से मिल सकेंगे। इस समय कई पार्षद चीफ इंजीनियर के पास ऐसे काम भी ले आते है जो कि जेई स्तर के ही होते हैं।
मेयर अधिकारी नहीं है वह जनप्रतिनिधि है। राजनीति में आने वाले नेता को 24 घंटे लोगों की सेवा के लिए हाजिर रहना चाहिए। मेयर की ओर से एक घंटे पब्लिक की मीटिंग का समय तय करने का निर्णय ठीक नहीं है। - प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मेयर।