चंडीगढ़ : पिछले साल कोविड फंड में आए थे सवा दो करोड़, आधे से ज्यादा राशन-तनख्वाह-पेट्रोल पर खर्च दिए
रेडक्रॉस ने बताया कि उनके पास कोविड-19 रिलीफ फंड में 2 करोड़ 14 लाख 79 हजार 217 रुपये आए थे। उन्होंने इस राशि का 100 फीसदी इस्तेमाल कर लिया है और इस फंड में अब एक भी रुपया नहीं बचा है।
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पिछले साल कोरोना काल में चंडीगढ़ के लोगों ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर द्वारा शुरू किए गए यूटी कोविड फंड में दो करोड़ 14 लाख रुपये जमा किए थे, ताकि प्रशासन इनका इस्तेमाल चिकित्सकीय उपकरण खरीदने में कर सके। हालांकि ऐसा नहीं हुआ, आधे से भी कम पैसों का इस्तेमाल चिकित्सकीय उपकरण खरीदने में हुआ जबकि ज्यादातर पैसे ड्यूटी में लगे कर्मचारियों और गाड़ियों के तेल आदि पर खर्च किया गया। यह खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है।
पिछले साल कोरोना के फैलने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने यूटी कोविड रिलीफ फंड की शुरुआत की थी। प्रशासन ने चंडीगढ़ रेडक्रॉस का बैंक खाता दिया था, जिसमें शहरवासियों ने दिल खोलकर पैसा जमा कराया। प्रशासन की वेबसाइट पर अब भी रेडक्रॉस के बैंक खाते की पूरी जानकारी दी गई है, ताकि लोग मदद कर सकें।
तीन माह तक एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे विभाग
कोविड फंड का इस्तेमाल कहां-कहां हुआ, इस पर जब एक आरटीआई लगाई गई तो करीब तीन महीने तक विभाग एक-दूसरे के कंधे पर जिम्मेदारी डालते रहे। आखिर में अपील डालने के बाद रेडक्रॉस की तरफ से जवाब दिया गया।
रेडक्रॉस ने बताया कि उनके पास कोविड-19 रिलीफ फंड में 2 करोड़ 14 लाख 79 हजार 217 रुपये आए थे। उन्होंने इस राशि का 100 फीसदी इस्तेमाल कर लिया है और इस फंड में अब एक भी रुपया नहीं बचा है। रेडक्रॉस ने भी बताया कि उनको केंद्र सरकार की तरफ से कोविड-19 के लिए कोई फंड नहीं मिला।
यहां हुआ खर्च राशि
1. राशन की खरीद और आवंटन, इन्फ्रारेड थर्मामीटर, पीए सिस्टम 1,12,34,742
अर्थी के लिए लकड़ी, अन्य सुरक्षा उपकरण
2. कोविड-19 ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को तनख्वाह 92,95,712
(ड्राइवर, क्वारंटीन सेंटर और इंफोसिस रेडक्रॉस सराय में मौजूद स्टाफ)
3. तेल का खर्च, एंबुलेंस, अंतिम संस्कार वैन व अन्य गाड़ियों का रखरखाव 13,21,906
(कुल- 2,18,52,360)
नोट: रेडक्रॉस ने बताया इसमें 3,73,143 रुपये उन्होंने खुद के लगाए हैं।
चंडीगढ़ के अस्पतालों में अधिकतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। कोविड-19 में कुछ चीजों की जरूरत पड़ी तो उन्हें खरीदा गया। बाकी सभी चीजें पहले से ही अस्पतालों में उपलब्ध हैं। -मनोज परिदा, सलाहकार, यूटी प्रशासक