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Chandigarh News: बदसलूकी और 300 रुपये की उगाही पड़ी भारी, कांस्टेबल को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Mon, 30 Oct 2023 09:10 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 30 Oct 2023 09:10 AM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कानून के रक्षक ने अवैध धन की मांग करके और नागरिक उत्पीड़न का कारण बनकर स्वयं कानून का उल्लंघन किया है।

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Chandigarh constable did not get relief from Punjab and Haryana High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के सेक्टर-20 में युवक-युवती को रोक पुलिस टीम द्वारा किया गया उत्पीड़न व 300 रुपये की उगाही के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी कांस्टेबल को किसी भी राहत से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में टीम का हिस्सा होने के नाते वह भी बराबर का जिम्मेदार है। हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश के खिलाफ उसकी अपील को खारिज कर दिया है।

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याचिका दाखिल करते हुए कांस्टेबल प्रदीप कुमार ने हाईकोर्ट को बताया कि जुलाई 2012 में वह कांस्टेबल राजेश कुमार के साथ पेट्रोलिंग ड्यूटी पर मौजूद था। इस दौरान एक युवक व युवती ने एमरजेंसी नंबर पर शिकायत दी कि सेक्टर-20 में पुलिस की टीम ने उनसे बदसलूकी की और 300 रुपये ले लिए। शिकायत के आधार पर एएसआई बलराम व अन्य पुलिसकर्मी अरोमा लाइट पॉइंट पर पहुंचे जहां शिकायतकर्ता मौजूद थे। इसके बाद याची की टीम व शिकायतकर्ता को सेक्टर-19 थाने लेकर गए और वहां पर याची की टीम के सदस्य ने 300 रुपये लौटा दिए।
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इसके बाद याचिकाकर्ता व उसकी टीम में मौजूद कांस्टेबल राजेश के खिलाफ विभागीय कार्रवाई आरंभ की गई और दोनों को 15 सालाना इंक्रीमेंट रोकने की सजा सुनाई गई। इसके खिलाफ अपील की गई तो उसे खारिज करते हुए सजा को कम कर 10 इंक्रीमेंट कर दिया गया। याचिकाकर्ता इसके खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल गया जहां से उसकी याचिका खारिज कर दी गई।

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हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में उसने बताया कि वह पैट्रोलिंग पार्टी का हिस्सा था लेकिन शिकायतकर्ता ने आरोप कांस्टेबल राजेश के खिलाफ लगाए थे। राजेश 21 साल से चंडीगढ़ पुलिस में था और इस दौरान उसकी सर्विस बुक में 19 बैड एंट्री थी। किसी भी गवाह ने याची के खिलाफ कुछ नहीं कहा, फिर भी याची को कांस्टेबल राजेश के बराबर सजा दी गई जो गलत है। घटना के वक्त याची को सेवा में केवल एक वर्ष हुआ था और वह अपने से वरिष्ठ कर्मचारी के खिलाफ कुछ नहीं कर सकता था।

हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का यह तर्क कि उसे पैसे की मांग के बारे में पता था लेकिन उसके पास अपने वरिष्ठ के आदेश का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, उसे उत्पीड़न में सह-प्रतिभागी होने से मुक्त नहीं करता है। अनुशासित बल का सदस्य होने के नाते, वह अपनी सेवा के हर कदम पर सत्यनिष्ठा बनाए रखने के लिए बाध्य था। साथ ही यह भी कहा कि कोई भी विवेकशील व्यक्ति इस निष्कर्ष पर पहुंच सकता है कि जब एक टीम के रूप में कोई ड्यूटी पर कार्य करता है तो टीम शिकायत पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होती है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कानून के रक्षक ने अवैध धन की मांग करके और नागरिक उत्पीड़न का कारण बनकर स्वयं कानून का उल्लंघन किया है।

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