चंडीगढ़ में किरायेदारों के लिए बदल जाएंगे कई नियम, किया ये काम तो भरना पड़ेगा भारी जुर्माना
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चंडीगढ़ में यदि आप किरायेदार हैं तो होशियार हो जाइए, क्योंकि किरायेदार निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक किसी मकान में रहता है तो उसे दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना किराया अदा करना होगा। वहीं मकान मालिक को किराया बढ़ाने के लिए तीन महीने पहले किरायेदार को नोटिस देना होगा।
इसके लिए यूटी प्रशासन ने यूनियन टेनेंसी एक्ट-2019 का मसौदा तैयार कर लिया है। अगले हफ्ते इसे शहर में लागू कर दिया जाएगा। इस एक्ट के लागू होने के बाद किरायेदार को सिक्योरिटी मनी के रूप में मकान मालिक को अग्रिम दो महीने का किराया देना होगा। इससे ज्यादा पैसा मकान मालिक नहीं ले सकता है।
यूटी प्रशासन ने किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद को सुलझाने के लिए एक नए कानून का प्रस्ताव किया है। इसके लिए प्रशासन की ओर से शहरवासियों से सुझाव मांगे गए थे। इस कानून पर लोगों से 15 दिनों तक अपने सुझाव देने को कहा गया था। सुझाव की समय सीमा खत्म होने वाली है। अब सोमवार के बाद किसी भी दिन इस एक्ट पर निर्णय लिया जा सकता है।
प्रशासन की स्टेट ब्रांच में तैनात यूटी के एस्टेट ब्रांच अफसर उमाशंकर गुप्ता का कहना है कि सुझाव के लिए अब और समय लोगों को नहीं दिया गया है। अगले हफ्ते में इस एक्ट पर निर्णय ले लिया जाएगा।
अधिकतम दो महीने में होगा विवादों का निपटारा
प्रशासन अब मकान मालिक और किरायेदार के बीच मामलों को सुलझाने के लिए रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित करने जा रहा है। यहां अधिकतम दो माह में विवादों का निपटारा हो जाएगा। शहरवासियों के हजारों सुझाव प्रशासन को मिले हैं।
हालांकि व्यापारियों ने प्रशासन से सुझाव देने के लिए कुछ और समय मांगा था लेकिन प्रशासन ने इनकार कर दिया है। यही वजह है कि अब अगले हफ्ते में प्रशासन रेंट ट्रिब्यूनल को मोहर लगा देगा। ट्रिब्यूनल बनते ही वर्षों से सिविल कोर्ट के चक्कर काट रहे लोगों को राहत मिलेगी।
बिजली व पानी नहीं काट सकते मकान मालिक
माना जा रहा है कि इस एक्ट से मकान मालिकों के साथ ही किरायेदारों के हितों की भी रक्षा होगी। नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या मकान किराये पर देने से नहीं डरेंगे। मकान मालिक को किराये के परिसर में मरम्मत कार्य कराने या पुरानी चीजों को बदलने के लिए किरायेदार को 24 घंटे पूर्व नोटिस देना होगा तभी वे प्रवेश कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून के मुताबिक किरायेदार से विवाद होने की स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है।
अधिक आबादी वाले शहर के लिए है एक्ट
एक अनुमान के मुताबिक शहर के पॉश इलाकों में करीब 18 से 20 हजार मकान और फ्लैट्स खाली पड़े हैं। प्रशासन का ऐसा मानना है कि लोग किरायेदारों के बाद में घर नहीं छोड़ने के चलते मकान रेंट पर नहीं दे रहे हैं।
प्रशासन के एक अफसर का कहना है कि एक्ट बन जाने के बाद लोग आसानी से अपने मकानों को किराए पर दे सकेंगे। इस बारे में वरिष्ठ अधिवक्ता आरके गर्ग का कहना है कि अभी चंडीगढ़ में इस एक्ट की कोई जरूरत नहीं है। यह एक्ट अधिक आबादी वाले शहरों में ज्यादा प्रभावी होगा।