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सोनिया की वापसी से मजबूत हुआ कैप्टन खेमा, दिल्ली में सत्ता परिवर्तन से बदले सूबे के सियासी समीकरण

Mon, 12 Aug 2019 06:00 AM IST
देव कश्यप अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: देव कश्यप Updated Mon, 12 Aug 2019 06:00 AM IST
सार

-बगावती सुर बुलंद करने वाली यूथ ब्रिगेड पर लगेगी लगाम
-बैकफुट पर जाने को मजबूर होंगे सीएम के विरोधी
-नए मंत्री की नियुक्ति में नहीं होगी कोई दखलंदाजी
-सोनिया के सत्ता में रहने पर हमेशा ताकतवर रहा है कैप्टन गुट

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captain amrinder singh reinforced by Sonia return, political change in Punjab
पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रदेश कांग्रेस के सियासी समीकरण भी बदलेंगे। सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह का खेमा मजबूत होगा।

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इतिहास गवाह है कि कांग्रेस में जब भी सोनिया सत्ता में रही हैं, कैप्टन गुट हमेशा ताकतवर रहा है। पूर्व पीएम राजीव गांधी के साथ कैप्टन के पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। 1997 में सोनिया ने कांग्रेस की कमान संभाली तो 1998-99 में कैप्टन ने कांग्रेस में वापसी की। उस समय पंजाब की कद्दावर नेता रजिंदर कौर भट्ठल को साइडलाइन कर कैप्टन को प्रदेश प्रधान बनाया गया। 2002 में जीत के बाद सीएम बना दिया गया। इसी कार्यकाल में जब भट्ठल ने बड़ी संख्या में विधायकों को लेकर बगावत की, तब भी सोनिया ने कैप्टन को बचाया। भट्ठल को डिप्टी सीएम बना कर स्थिति संभाली।
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उसके बाद से प्रदेश कांग्रेस की सियासत पर कैप्टन ही हावी रहे। 2013 में राहुल गांधी ने प्रताप बाजवा को प्रधान बनाया। पर 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद फिर कैप्टन सत्ता में आ गए। हालांकि बहुमत के साथ 2017 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कैप्टन ताकतवर बन कर उभरे थे। लेकिन विरोधी गुट भी अंदरखाते लॉबिंग कर रहा था। दिल्ली के कुछ नेताओं की शह पर यूथ ब्रिगेड भी मुसीबत बन रही थी। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की सीएम के साथ नहीं बनती। कुलबीर जीरा, वरिंदर जीत सिंह पाहड़ा खुल कर सरकार के खिलाफ बोल रहे थे। अब इन पर लगाम कसेगी। वहीं, कैप्टन के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस में अलग गुट बना रहे नेताओं का भी बैकफुट पर जाना तय है। नवजोत सिद्धू के इस्तीफे के बाद खाली हुई एक कैबिनेट सीट पर नियुक्ति में भी अब पूरी तरह कैप्टन अमरिंदर की ही चलेगी। दिल्ली से लेकर पंजाब का कोई दखल संभव नहीं होगा। कैप्टन से अलग राह पकड़ने वाले सुनील जाखड़ लोकसभा चुनाव में हार के बाद से पहले ही बैकफुट पर थे। अब उनकी स्थिति और कमजोर होगी।

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सिद्धू की बढ़ी मुश्किलें

पिछले दिनों सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से विवाद के बाद मंत्रिपद से इस्तीफा देने वाले नवजोत सिद्धू के लिए दिल्ली से आई खबर अच्छी नहीं है। अगर राहुल या प्रियंका गांधी में से कोई प्रधान बनता तो सिद्धू की वापसी की उम्मीद थी। लेकिन सोनिया के अध्यक्ष बनने के बाद पंजाब में कैप्टन अमरिंदर के रहते सिद्धू के ताकतवर बनने की उम्मीद कम ही है।

सीएम ने किया स्वागत
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने का स्वागत किया। उन्होंने इसे मौजूदा हालात में सबसे अच्छा फैसला बताया। साथ ही कहा कि सोनिया का अनुभव पार्टी को दिशा देने में मददगार होगा। उन्होंने सोनिया और पार्टी को शुभकामनाएं दीं। परनीत कौर और मनीष तिवारी ने भी सोनिया की नियुक्ति का स्वागत किया है।

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