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Hindi News ›   Chandigarh ›   Captain Amarinder Singh is campaigning in Patiala for assembly polls

पटियाला: चारों तरफ से घिरे कैप्टन अमरिंदर ने जीत के लिए लगाया जोर, पीठ दर्द की शिकायत के बावजूद लगातार कर रहे रैलियां और बैठक

Thu, 10 Feb 2022 04:03 PM IST
निवेदिता वर्मा संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 10 Feb 2022 04:03 PM IST
सार

राजनीतिक मामलों के माहिर पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से रिटायर प्रोफेसर बलविंदर टिवाणा के मुताबिक कैप्टन अपने गढ़ में जीत को यकीनी बनाने में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। यही वजह है कि इस बार वह पटियाला जिले के लिए पहले की तुलना में ज्यादा जोर लगा रहे हैं।

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Captain Amarinder Singh is campaigning in Patiala for assembly polls
कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : twitter @capt_amarinder

विस्तार

पंजाब में इस समय राजनीतिक समीकरण बदले हैं। अब तक कांग्रेस के रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह इस बार अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाकर भाजपा के साथ ताल मिलाकर चुनावी अखाड़े में उतरे हैं। ऐसे में जहां एक तरफ सभी प्रमुख पार्टियां कैप्टन को उनके घर में ही घेरने की तैयारी कर रही हैं। वहीं कैप्टन भी किसी को कोई मौका देने को तैयार नहीं हैं। अब तक हर चुनावों में अपने जिले में इक्का-दुक्का बड़ी रैलियां करके बाकी पंजाब में व्यस्त रहने वाले कैप्टन ने इस बार अपनी रणनीति बदल ली है। उन्होंने पिछले दो दिनों से अपने होम टाउन में डेरा जमाया हुआ है।

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मंगलवार को कैप्टन ने शहर में दो बड़ी रैलियां की थीं। बुधवार को भी वह जिला बार एसोसिएशन के वकीलों से मिले व उन्हें संबोधित किया। साथ ही शाम को भी बड़ी रैली की। 79 साल के कैप्टन की पीठ में इन दिनों दर्द की शिकायत है। ऐसे में वह रैली के दौरान कुर्सी पर बैठकर ही जनता से मुखातिब हो रहे हैं। इस दौरान कैप्टन यह बात जरूर कहते हैं कि बेशक वह उम्रदराज हैं, लेकिन पंजाब व यहां के लोगों की सेवा को लेकर उनके जज्बा कम नहीं हुआ है। उधर, राजनीतिक माहिर भी मानते हैं कि पंजाब के बदले राजनीतिक परिपेक्ष्य में इस बार कैप्टन को अपने गढ़ में ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा। 

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कोई रिस्क नहीं लेना चाहते कैप्टन : प्रोफेसर टिवाणा

राजनीतिक मामलों के माहिर पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से रिटायर प्रोफेसर बलविंदर टिवाणा के मुताबिक कैप्टन अपने गढ़ में जीत को यकीनी बनाने में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। यही वजह है कि इस बार वह पटियाला जिले के लिए पहले की तुलना में ज्यादा जोर लगा रहे हैं। ऊपर से प्रमुख पार्टियां बदले सियासी हालात का फायदा लेने को तीखे तेवर अपनाए हैं। कांग्रेस के सीएम फेस चरणजीत सिंह चन्नी खुद पटियाला जिले में निजी दिलचस्पी ले रहे हैं। चन्नी ने पटियाला फेरी दौरान यहां तक कहा था कि पटियाला कैप्टन का गढ़ था, अब नहीं है। ऐसे में कैप्टन का यहां सक्रिय होना स्वाभाविक है। इस बार कांग्रेस के वोट भी कैप्टन से टूटे हैं। यह भी एक फैक्टर है, जिससे कैप्टन ज्यादा जोर लगा रहे हैं।

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कैप्टन भले ही रहे हों गैरहाजिर, परंतु पत्नी व बेटी रहीं सोशल : प्रोफेसर बराड़

पीयू से राजनीतिक मामलों के माहिर प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़ के मुताबिक कैप्टन बतौर मुख्यमंत्री साढ़े चार साल मुश्किल से दो या तीन बार अपने हलके में आए।  परंतु दूसरी तरफ यह भी गलत नहीं है कि उनकी पत्नी सांसद परनीत कौर व बेटी जयइंद्र कौर लगातार पटियाला में सक्रिय रहीं। खासतौर से परनीत काफी सोशल हैं, इसलिए कैप्टन परिवार का लोगों में आधार है। सबसे खास देश के बंटवारे के वक्त पाकिस्तान से विस्थापित होकर पटियाला पहुंचे लोगों की शाही परिवार ने काफी मदद की थी। यह परिवार अभी भी शाही परिवार को इस बात के लिए मानते हैं। 

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