राजनीतिक नहीं है किसान आंदोलन, जान गंवाने वाले अन्नदाताओं के परिवार को देंगे पांच लाख की मदद : कैप्टन
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि संघर्षरत किसानों के परिवारों को हरसंभव मदद मुहैया करवाई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अकालियों और आम आदमी पार्टी को कृषि कानूनों के मुद्दे पर संकुचित राजनीति न करने की हिदायत देते हुए कहा कि यह मसला राजनीतिक नहीं बल्कि पंजाब और यहां के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है।
संगरूर के एक निवासी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा किसान संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाने वाले प्रत्येक किसान के परिवार को पांच लाख रुपये दिए जा रहे हैं और जरूरत अनुसार और भी मदद की जाएगी।
फेसबुक पर लाइव प्रोग्राम ‘कैप्टन से सवाल’ की 19वीं कड़ी में बुधवार को जनता से मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हम काले कृषि कानूनों का विरोध नहीं करते हैं तो हम अपने बच्चों का भविष्य खतरे में डाल देंगे। मुख्यमंत्री ने सभी को किसानों के आंदोलन पर राजनीति न करने की अपील करते हुए कहा कि किसान पिछले 28 दिनों से दिल्ली की सीमा पर कड़ाके की ठंड से जूझ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल को कृषि कानूनों के मुद्दे पर स्पष्ट तौर पर किसान के समर्थन में उतरने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने किसानों के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में न जाने का फैसला सोच समझकर लिया। उनके न जाने के बारे में सोशल मीडिया पर उठे सवालों के जवाब में कैप्टन ने कहा कि उन्होंने किसानों की भावनाओं का सत्कार करते हुए ऐसा किया है, क्योंकि किसान स्पष्ट तौर पर कह चुके हैं कि वह किसी भी राजनीतिक पक्ष को हिस्सा नहीं लेने देंगे।
कड़ाके की ठंड के बीच किसानों को अपना ख्याल रखने की अपील करते हुए कैप्टन ने उन्हें पंजाब में अपने पारिवारिक सदस्यों के लिए किसी तरह की आपातकालीन मदद के लिए 1091 हेल्पलाइन या 112 पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल करने को कहा।
पीडीएस खत्म तो गरीब को रोटी कौन देगा
शांता कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली और एफसीआई खरीद के मॉडल का अंत हो जाने के बारे में किसानों की आशंकाओं का हवाला देते हुए कैप्टन ने कहा कि गेंद अब केंद्र के पाले में है। यदि एफसीआई को खत्म कर दिया गया तो अनाज कौन खरीदेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का खात्मा हो जाएगा तो फिर गरीब को रोटी कौन देगा।
कृषि कानूनों के बारे में केंद्र ने पंजाब से नहीं की कोई चर्चा : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि कानूनों के बारे में फैसला किसी भी ऐसी समिति में नहीं किया गया, जिसका पंजाब सदस्य हो। अरविंद केजरीवाल, सुखबीर बादल, भगवंत मान सभी झूठ बोलने के साथ-साथ राजनीति कर रहे हैं। इनसे पूछें कि वे झूठ क्यों बोल रहे हैं। सत्य यह है कि कृषि सुधारों पर विचार करने को गठित केंद्र सरकार की समिति के आरंभ में पंजाब इसका सदस्य नहीं था और मैंने जब केंद्र को पत्र लिखा तब जाकर पंजाब को समिति का हिस्सा बनाया गया।
नए कानून ग्रामीण विकास का करेंगे नुकसान
कैप्टन ने आशंका जताई है कि नए कृषि कानूनों से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को बड़ा नुकसान पहुंचेगा, जिनका विकास मौजूदा प्रणाली के अंतर्गत मंडी बोर्ड को होने वाली आय से किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों ने कड़ी मेहनत कर भारत को अनाज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया और देश का दो प्रतिशत होने के बावजूद अनाज भंडार में 40 प्रतिशत का योगदान दिया।