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कैग रिपोर्टः ग्रामीण विकास निधि के 3068 करोड़ फंड में नहीं हुए जमा, वित्त प्रबंधन पर उठी उंगली
Thu, 08 Aug 2019 12:26 PM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 08 Aug 2019 12:26 PM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा में ग्रामीण विकास निधि की राशि सरकार के समेकित फंड में जमा कराए बिना ही ग्रामीण विकास निधि प्रशासन बोर्ड ने खर्च कर दी। 2011 से 2017 तक यह मनमानी चलती रही। बोर्ड ने बाजार में प्रोसेसिंग के लिए लाए गए कृषि उत्पादों की बिक्री के लाभों पर दो प्रतिशत सेस वसूल कर सात साल में 3068.82 करोड़ रुपये अर्जित किए। इस राशि को खर्च करने से पहले सरकार के समेकित फंड में जमा कराना जरूरी था। चूंकि, सरकार ने यह फंड सार्वजनिक व्यय के लिए बनाया हुआ है।
बोर्ड ने बिना राशि जमा कराए ही अर्जित राशि में से 2468.28 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। राशि को ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के विकास, डिस्पेंसरियों की स्थापना, जलापूर्ति एवं स्वच्छता प्रबंधन और गोदामों के निर्माण पर खर्च किया गया है। वार्षिक बजट प्लान में भी इस राशि को सरकार ने शामिल नहीं किया, जिससे इस निधि पर विधानसभा का कोई नियंत्रण नहीं रहा। कैग ने ग्रामीण विकास निधिक प्रशासन बोर्ड की इस मनमानी पर अपनी 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में उंगली उठाई है।
कैग ने सरकार को सुझाव दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए पहले सभी राजस्व प्राप्तियां समेकित फंड में जमा हों और उन्हें विधानसभा की स्वीकृति के बाद खर्च किया जाए। कैग ने विधानसभा के सदन पटल पर रखी अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से हर वर्ष मिलने वाले सहायता अनुदान में लगातार हो रही कमी पर भी सवाल उठाए हैं। हरियाणा को 2015-16 में 6378.76 करोड़, 2016-17 में 5677.58 करोड़ और 2017-18 में 5185. 12 करोड़ रुपये अनुदान मिला है। बीते वर्ष की तुलना हरियाणा को 492.46 करोड़ रुपये कम अनुदान मिला। जबकि इससे पिछले वर्ष यानि 2016-17 में 11 प्रतिशत कम अनुदान 2015-16 की तुलना केंद्र से प्रदेश को प्राप्त हुआ।
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बोर्ड ने बिना राशि जमा कराए ही अर्जित राशि में से 2468.28 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। राशि को ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के विकास, डिस्पेंसरियों की स्थापना, जलापूर्ति एवं स्वच्छता प्रबंधन और गोदामों के निर्माण पर खर्च किया गया है। वार्षिक बजट प्लान में भी इस राशि को सरकार ने शामिल नहीं किया, जिससे इस निधि पर विधानसभा का कोई नियंत्रण नहीं रहा। कैग ने ग्रामीण विकास निधिक प्रशासन बोर्ड की इस मनमानी पर अपनी 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में उंगली उठाई है।
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कैग ने सरकार को सुझाव दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए पहले सभी राजस्व प्राप्तियां समेकित फंड में जमा हों और उन्हें विधानसभा की स्वीकृति के बाद खर्च किया जाए। कैग ने विधानसभा के सदन पटल पर रखी अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से हर वर्ष मिलने वाले सहायता अनुदान में लगातार हो रही कमी पर भी सवाल उठाए हैं। हरियाणा को 2015-16 में 6378.76 करोड़, 2016-17 में 5677.58 करोड़ और 2017-18 में 5185. 12 करोड़ रुपये अनुदान मिला है। बीते वर्ष की तुलना हरियाणा को 492.46 करोड़ रुपये कम अनुदान मिला। जबकि इससे पिछले वर्ष यानि 2016-17 में 11 प्रतिशत कम अनुदान 2015-16 की तुलना केंद्र से प्रदेश को प्राप्त हुआ।
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अपर्याप्त बजट नियंत्रण हुआ उजागर
कैग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार का अपर्याप्त बजट नियंत्रण भी उजागर किया है। 59 मामलों में 2017-18 के अंत में 22731.21 करोड़ रुपये विभागों ने सरेंडर किए। हर मामले में दस करोड़ रुपये से अधिक की राशि सरेंडर की गई। 15 ममालों में 9158.16 करोड़ रुपये सरेंडर किए गए, जो वास्तविक बचतों से 345 करोड़ रुपये अधिक थे। ये सरकारी विभागों के अपर्याप्त बजट नियंत्रण को दर्शाता है। 23 मामलों में 8637.78 करोड़ रुपये की बचतों में से 418 करोड़ की बच विभागों ने सरेंडर ही नहीं की।
भ्रष्टाचार के पांच वर्ष पुराने 43 मामले लंबित
भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही सरकार की पोल भी कैग ने खोली है। सरकारी धन के दुरुपयोग, जालसाजी इत्यादि के 71 मामले सामने आए। जिसमें 1.34 करोड़की सरकारी राशि शामिल थी। इन मामलों पर जून 2018 तक अंतिम कार्रवाई लंबित थी। इनमें से 43 मामले पांच साल से भी अधिक पुराने हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्र के लेखांकन मानक संख्या-3 का भी उल्लंघन किया है। कर्ज एवं अग्रिमों के अतिदेय मूलधन और ब्याज की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
भ्रष्टाचार के पांच वर्ष पुराने 43 मामले लंबित
भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही सरकार की पोल भी कैग ने खोली है। सरकारी धन के दुरुपयोग, जालसाजी इत्यादि के 71 मामले सामने आए। जिसमें 1.34 करोड़की सरकारी राशि शामिल थी। इन मामलों पर जून 2018 तक अंतिम कार्रवाई लंबित थी। इनमें से 43 मामले पांच साल से भी अधिक पुराने हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्र के लेखांकन मानक संख्या-3 का भी उल्लंघन किया है। कर्ज एवं अग्रिमों के अतिदेय मूलधन और ब्याज की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।