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BJP के मंत्री बोले, गीता का ज्ञान मेरे पल्ले नहीं पड़ता

Sat, 21 Nov 2015 04:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा) Updated Sat, 21 Nov 2015 04:17 PM IST
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cabinet minister controversial statement on holy book geeta

हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथ गीता को लेकर कैबिनेट मंत्री ने इतनी विवादित बात कह दी कि सुनने वाला हर शख्स सन्न रह गया। एक और राज्य सरकार ‘गीता’ को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की पूरी तैयारी कर चुकी है, लेकिन राज्य सरकार के मंत्री ही इसके महत्व और संदेश को समझ पाने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं।

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लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह ने वीरवार को यह कबूल कर खुद को उपहास का पात्र बना लिया। वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सिनेट हॉल में ‘भारतीय कला में गीता की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
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जब मंच पर संबोधन के लिए पहुंचे तो कहा कि ‘गीता’ मेरे पल्ले नहीं पड़ती, सिर के ऊपर से निकल जाती है। मेरी बदकिस्मती है कि ‘गीता’ विषयक सेमिनार में मुझे बुलाया गया।
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बदकिस्मती मेरी कि मुझे ‘गीता’ के कार्यक्रम में बुलाया गया

cabinet minister controversial statement on holy book geeta

राव नरबीर सिंह ने कहा कि मेरा कुरुक्षेत्र में आने का बहुत मन था, लेकिन यह मेरी बदकिस्मती है कि मुझे गीता के इस सेमिनार में बुलाया गया। गीता तो मेरे सिर के ऊपर से निकल जाती है। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि गीता एक जीवन दर्शन एवं जीवन पद्धति है, जो दुनिया को मानव कल्याण का संदेश देती है।

इसके बाद कुरुक्षेत्र के आगमन पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं तीन बार मंत्री रहा हूं और सरकार बनने के बाद सभी ने कहा कि कुरुक्षेत्र आओ। लेकिन, मैंने कहा क्यों आऊं कुरुक्षेत्र? यहां तो यदुवंशियों का विनाश हुआ था। कुरुक्षेत्र में ही 10 करोड़ यदुवंशियों का संहार किया गया था।

उन्होंने कहा, मैं यदुवंशी हूं मुझे इस पर गर्व है, लेकिन इसी धरा पर करोड़ों यादवों का विनाश भी हुआ था। इतना ही नहीं, उन्होंने तो समारोह के अंत में अतिथि परंपरा के तौर पर दिए गए स्मृति चिन्ह पर भी कटाक्ष कर दिया। इस पर कुलपति समेत अन्य लोग बगले झांकने लगे।

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