कैबिनेट: पंजाब में दस्तावेजों की रजिस्ट्रेशन फीस हुई दोगुनी, स्मार्ट विलेज फंड को मंजूरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार ने मंगलवार को आय बढ़ाने के मकसद से सेल डीड (बिक्री कागजातों) से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों की रजिस्ट्रेशन फीस दोगुनी कर दी है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके तहत अचल संपत्ति की लीज के अलावा सभी अनिवार्य पंजीकृत दस्तावेजों की फीस 200 से बढ़ाकर 400 रुपये कर दी है। वहीं वसीयत रजिस्ट्रेशन की फीस 2000 से बढ़कर 4000 रुपये की गई है।
इनकी बढ़ी फीस
- गैर वसीयतनामे वाले दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन के अधीन लीज दस्तावेजों को छोड़कर अन्य सभी वैकल्पिक दस्तावेजों की रजिस्ट्रेशन फीस जो कि अभी 200 रुपये है, बढ़कर 400 रुपये हो जाएगी।
- अडॉप्शन के अधिकार की फीस 500 से बढ़कर 1000 रुपये होगी।
- स्पेशल पावर आफ अटार्नी की रजिस्ट्रेशन फीस 50 से बढ़कर 100 रुपये, जनरल पावर आफ अटार्नी की फीस 200 रुपये से बढ़कर 400 रुपये, अडॉप्शन डीड की रजिस्ट्रेशन की फीस 2000 रुपये से बढ़कर 4000 रुपये हो जाएगी।
- ट्रस्ट डीड की रजिस्ट्रेशन फीस जो कि अब तक स्टांप ड्यूटी की कीमत की आधी राशि थी, अब स्टांप ड्यूटी की राशि के बराबर हो जाएगी। यह अब तक न्यूनतम 50 रुपये थी लेकिन अब न्यूनतम 100 रुपये होगी।
- धारा 57 के तहत निरीक्षण या खोज के मामलों में, किसी एक और एक ही संपत्ति के संबंध में प्रविष्टियों या दस्तावेजों की किसी भी संख्या के निरीक्षण के लिए जनरल सर्च या एक और एक ही व्यक्ति के पक्ष में या उसके द्वारा निष्पादन के मामले में, पहले साल की फीस 20 रुपये की बजाए 40 रुपये, उसके बाद प्रत्येक नए साल के लिए फीस 10 रुपये की बजाए 20 रुपये होगी। ऐसे मामलों में अधिकतम फीस अब 500 रुपये की बजाए 1000 रुपये होगी।
- विवेकाधीन पंजीकरण के मामलों में जिले के रजिस्ट्रार की फीस 10 की बजाए 20 रुपये होगी। कमीशन जारी करने और निजी निवास पर उपस्थित होने के लिए फीस में बदलाव किया गया है।
- इस मामले में, बीमारी या दुर्बलता के लिए संतोषजनक प्रमाण पत्र जारी किए जाने की फीस 14 की बजाए 30 रुपये होगी। ट्रांसलेशन की फाइलिंग की फीस अब 2 की बजाए 4 रुपये होगी।
- सीलबंद वसीयत को जमा करने, निकालने और खोलने के मामले में फीस 2000 रुपये की बजाए अब 4000 रुपये होगी।
- जनरल पावर आफ अटार्नी के मामले में अटॉर्नी की शक्ति के प्रमाणीकरण की फीस 5 की बजाए 10 रुपये और स्पेशल पावर आफ अटार्नी के मामले में ढाई रुपये के बजाए 5 रुपये होगी।
फोटोकॉपी फीस भी बढ़ाई
पंजीकरण से पहले या बाद में कारणों, प्रविष्टियों या दस्तावेजों (अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी या हिंदी में) की फोटोकॉपी (प्रतियां) बनाने या देने के लिए की फीस भी बढ़ाई गई है। इसके तहत अगर पेज 5 से ज्यादा न हों और 20 साल से अधिक पुराने न हों तो फीस अब 200 की बजाए 400 रुपये होगी। इसी तरह 5 पेजों से अधिक हर पेज के लिए फीस 15 की बजाए 30 रुपये होगी।
पेजों की संख्या पांच हो और बीस वर्ष से अधिक पुराने हों तो फीस 50 की बजाए 100 रुपये होगी। इसी तरह 5 से अधिक हर पेज के लिए फीस 20 की बजाए 40 रुपये हो जाएगी। यहां पेस्टिंग फीस अब 100 की बजाए 200 रुपये ली जाएगी।
पंजाब मंत्रिमंडल ने मंगलवार को हुई बैठक के दौरान 384.40 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के गांवों का सर्वपक्षीय विकास करने के लिए ‘स्मार्ट गांव मुहिम ’ को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों की वार्षिक प्रशासकीय रिपोर्ट, मुख्यमंत्री सुरक्षा में सेवामुक्त पुलिस इंस्पेक्टर प्रीतपाल सिंह की डिप्टी एसपी के बराबर रैंक पर एक साल के लिए पुनर्नियुक्ति के साथ-साथ शहरी पर्यावरण के सुधार प्रोग्राम के अंतर्गत 298.75 करोड़ के फंड जारी करने की भी मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मंत्रिमंडल ने गांवों में रह रहे लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए अन्य प्रयास करने की जरूरत महसूस की है। स्मार्ट गांव मुहिम के अंतर्गत किए जाने वाले कामों को दो हिस्सों में बांटा गया है, जिनमें जरूरी और इच्छुक काम रखे गए हैं।
इस स्कीम के अंतर्गत ब्लॉक विकास और पंचायत अफसर से संबंधित विभागों से कामों के प्रस्ताव डिप्टी कमिश्नर द्वारा हासिल किए जाएंगे। डिप्टी कमिश्नर के नेतृत्व वाली कमेटी द्वारा 25 लाख रुपये तक के व्यक्तिगत कामों को मंजूरी दी जाएगी। अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (विकास) इस कमेटी के सदस्य सचिव होंगे। इस कमेटी में शामिल बाकी सदस्यों में जिला विकास और पंचायत अफसर, डिप्टी चीफ़ एग्जक्यूटिव अफसर, ज़िला परिषद और कार्यकारी इंजीनियर (पंचायती राज) होंगे।
विभिन्न विभागों की वार्षिक प्रशासकीय रिपोर्टों को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने भूमि एवं जल संरक्षण विभाग द्वारा शुरू किए गए कार्यों के लिए वर्ष 2015-16 की वार्षिक प्रशासकीय रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ वर्ष 2015 -16 और 2016 -17 की डायरेक्टोरेट ऑफ टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग की वार्षिक प्रशासकीय रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी गई। वर्ष 2016 -17 की जल सप्लाई और सैनिटेशन विभाग और वर्ष 2017 -18 की सहकारिता (ऑडिट) विभाग की वार्षिक प्रशासकीय रिपोर्ट को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
तहसीलदार (ग्रुप बी) सेवा नियमों को मंजूरी
राजस्व विभाग के कामकाज में और कुशलता लाने और पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मंत्रिमंडल ने तहसीलदार (ग्रुप बी) सेवा नियमों को भी मंजूरी दे दी है। यह नियम पर्सोनल विभाग की 20 जुलाई, 2017 की हिदायतों और वित्त विभाग के पंजाब सिविल सर्विस (रिवाइज पे) रूल्स 2009 के जवाब में तैयार किए गए हैं, जिनके तहत तारीख 27 मई, 2009 के नोटिफिकेशन के साथ पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर वेतन स्केल सुधारे गए हैं।
प्रीतपाल सिंह को दोबारा मिली नियुक्ति
मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा में सेवामुक्त पुलिस इंस्पेक्टर प्रीतपाल सिंह की डिप्टी एसपी के बराबर रैंक में एक साल के लिए पुनर्नियुक्ति की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी 1 मार्च, 2018 से 28 फरवरी, 2019 तक कांट्रेक्ट आधार पर तय शर्तों और नियमों पर आधारित दी गई है। इंस्पेक्टर प्रीतपाल सिंह की पुनर्नियुक्ति उनके शानदार सर्विस रिकार्ड को देखते हुए की गई है। वह अक्तूबर, 2011 से मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात हैं।
शहरी पर्यावरण के सुधार के लिए 298.75 करोड़ का फंड मंजूर
मंत्रिमंडल ने शहरी पर्यावरण सुधार प्रोग्राम (यूईआईपी) के अंतर्गत बुनियादी ढांचे के विकास के लिए शहरी स्थानीय इकाइयों को 298.75 करोड़ रुपये के फंड जारी करने के लिए स्थानीय निकाय विभाग के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। पंजाब बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड (पीआईडीबी) की तरफ से 50-50 प्रतिशत के हिसाब से दो किस्तों में फंड मुहैया करवाए जाएंगे।
वित्त विभाग द्वारा पीआईडीबी द्वारा शहरी पर्यावरण सुधार प्रोग्राम के अधीन जिलास्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा। संबंधित ज़िला कमेटी यूईआईपी के अधीन शहरी बुनियादी ढांचा विकास प्रोजेक्ट के प्रस्ताव, पहचान, पालन और निगरानी का काम करेगी। ये कमेटियां काम की गुंजाइश और प्रोजेक्ट के वित्तीय खर्च को दर्शाएंगी और जिलास्तरीय कमेटियां काम के अनुमानों को स्थानीय निकाय विभाग को भेजेंगी।
प्रोजेक्ट की तकनीकी परीक्षा स्थानीय निकाय विभाग द्वारा करवाई जाएगी और आगे पीआईडीबी को भेजा जाएगा। इसी तरह शहरी स्थानीय इकाइयों द्वारा करवाए जाने वाले काम स्थानीय निकाय विभाग द्वारा तैयार किए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार होंगे और पंजाब म्यूंनिसपल निगम एक्ट, पंजाब म्यूंनिसपल कमेटी एक्ट और पंजाब नगर सुधार एक्ट के अधीन किये गए उपबंधों की सख्ती से पालन किया जाएगा। किसी भी प्रोजेक्ट के खर्च में विभागीय /अचेत खर्चे या अन्य विभागीय खर्चे शामिल नहीं होंगे।